मंगलवार

मुकेश खन्ना के निधन की उड़ी अफवाह, मुकेश खन्ना खुद बोले- मैं बिल्कुल ठीक हूं

मुकेश खन्ना एक भारतीय फिल्म और टीवी कलाकार रहे हैं। जिन्होंने मुख्य रूप से बॉलीवुड में और टीवी दुनिया में काम किया है। मुकेश खन्ना को दूरदर्शन के शो 'शक्तिमान' से सबसे ज्यादा पहचान मिली। इन्हे बी आर चोपड़ा के महाभारत शो में भीष्म के रूप में भी दर्शकों द्वारा बेहद पसंद किया गया है। और बहुत दिनों तक इन्हें भीष्म के रूप में याद किया गया।




इन्होने साल 1981 में रिलीज़ हुई फिल्म रूही अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद इन्होने काफी फिल्मों में काम किया। हिंदी फिल्मों के अलावा इन्होने मलयालम, मराठी और तेलगु सिनेमा में भी काम किया है।

टीवी के 'शक्तिमान' सीरियल से मशहूर होने वाले मुकेश खन्ना 90 के दशक में बच्चों से लेकर बूढ़े तक उनको हर कोई पसंद करता था। मुकेश खन्ना अपने किरदार की वजह से लोंगो के बीच बहुत ही लोकप्रिय हो गए थे। बच्‍चे उनके कपड़े और स्टाइल को कॉपी करने लग गए थे।


इससे पहले मुकेश खन्ना ने बीआर चोपड़ा की महाभारत में भीष्म पितामाह का किरदार निभाया था। उनका ये किरदार भी काफी पॉपुलर रहा था। इसके अलावा मुकेश खन्ना ने चंद्रकांता, युग, ब्रह्मा, एहसास और मर्यादा जैसे सीरियल में भी काम किया। मुकेश का हर किरदार अपने आप में अलग ही होता था।


लेकिन कुछ सालों बाद मुकेश खन्ना स्क्रीन से एकदम गायब हो गए। मुकेश खन्ना ने शादी नहीं की। मुकेश खन्ना भले ही फिल्‍म इंडस्ट्री से दूर हो गए हों लेकिन आज वो ऐसा काम कर रहे हैं जिस पर लोगों को गर्व होगा। मुकेश आने वाली पीढ़ी को एक्टिंग में महारत हासिल करना सिखा रहे हैं।


आज बच्चों के लिए मुकेश खन्ना दो-दो एक्टिंग स्कूल चला रहे हैं, जहां हर उस बच्चे और शख्स को ट्रेनिंग दी जाती है जो एक्टर बनने का सपना देखता है। इसके अलावा मुकेश खन्ना ने उस एक्टिंग स्कूल में भी तीन महीने का एक्टिंग कोर्स शुरू करवाया है जिससे उन्होंने खुद एक्टिंग के गुर सीखे।
एक वक्त ऐसा था जब मुकेश खन्ना की लोकप्रियता चरम पर थी।


उनके निभाए किरदार खूब लोकप्रिय हुए और आज भी लोग उन किरदारों को याद करते हैं..फिर चाहें वो भीष्म पितामह का किरदार हो, शक्तिमान का या फिर आर्यमान..प्रत्येक किरदार में मुकेश खन्ना ने अलग ही जान डाल दी। शक्तिमान के किरदार ने मुकेश खन्ना को अपार शोहरत और लोकप्रियता दी। पर वक्त के साथ मुकेश खन्ना का स्टारडम कम होता गया और वो स्क्रीन से एकदम गायब हो गए।

गुरमीत चौधरी ने महाराष्ट्र के नागपुर में गरीबों और मिड‍िल क्लास लोगों के लिए ‘आस्था’ नाम का एक कोविड हॉस्पिटल खोला है।

ढेर सारी फिल्मों के नायक और टीवी सीरियल में भगवान राम के किरदार निभाने वाले एक्टर गुरुमीत चौधरी, रियल लाइफ में भी असली हीरो बनके देश के सामने आए हैं। गुरमीत चौधरी ने महाराष्ट्र के नागपुर में गरीबों और मिड‍िल क्लास लोगों के लिए ‘आस्था’ नाम का एक कोविड हॉस्पिटल खोला है।


गुरुमीत चौधरी
गुरमीत चौधरी कहते हैं- ‘अभी कुछ महीनों पहले मेरे एक मीडिया मित्र ने मुझसे कोविड से जुड़ी एक मदद मांगी थी, उसकी मदद करने के लिए जब अपने सोशल मीडिया का सहारा लिया तो मुझे पता चला कि कोरोना की वजह से देश में हालात कितने ज्यादा खराब चल रहे हैं। तब मैंने लोगों की मदद करने की ठानी।"

गुरमीत कहते हैं कि ‘ये लोगों के प्यार की वजह से जिंदगी में कलाकार के रूप में सफल हो पाए और अब मेरी बारी है देश के लोगों के लिए कुछ करने की इसलिए मैंने नागपुर शहर में डॉक्टर सैयद वजहाताली और उनकी टीम के लिए कोविड हॉस्पिटल खोला है और दूसरे शहरों में भी कोविड हॉस्पिटल खोलने की तैयारी में लगा हूं और ईश्वर की कृपा रही तो जल्द ही दूसरे शहरों में भी कोविड हॉस्पिटल खुल जाएंगे।

इस्लाम में ईद साल में दो बार मनाई जाती है। जिसमें से ये पहली ईद है

रमजान महीना खत्म होने के बाद मुसलमान ईद उल-फितर का पर्व मनाते हैं। इस त्योहार को सभी धूमधाम से मनाते हैं और खुदा से सुख-शांति और बरक्कत की दुआएं मांगते हैं। इसमें ईद का चांद दिखने के अगले दिन ये पर्व मनाया जाता है। इस बार ये त्योहार 13 या 14 मई को मनाया जा सकता है। अगर चांद 12 मई को दिखाई देता है तो ईद 13 मई को होगी और अगर 13 मई को चांद दिखता है तो ये 14 मई को मनाया जाएगा।


ईद मनाने का कारण: इस्लाम में ईद साल में दो बार मनाई जाती है। जिसमें से ये पहली ईद है और दूसरी ईद बकरीद कहलाती है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार पैगम्बर मुहम्मद ने सन् 624 ईसवी में जंग-ए-बदर के बाद पहली ईद उल-फ़ितर मनायी थी। इसलिए ईद उल फित्र के अवसर पर मुसलमान पूरा एक महीना अल्लाह की इबादत करते हैं और रोज़ा रखते हैं। और दूसरे ईद रमजान के महीने में कुरान की तिलावत करके अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं और रमजान खत्म होने के बाद बड़े हर्ष उल्लास से ईद मनाते हैं।

महत्व: ईद भाई चारे व आपसी मेल को बढ़ाने का त्योहार है। इस दिन लोग एक दूसरे के गले मिलकर ईद की बधाई देते हैं। ईद उल-फितर में ग़रीबों को फितरा दिया जाता है। जिससे ग़रीब लोग भी अपनी ईद मना सकें, नये कपडे पहन सकें। रोजे की समाप्ति के बाद ईद के दिन मुसलमान अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं। इनके ईद के त्योहार का सबसे महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ सेवई है।

ईद के दिन सुबह से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। और ईद में मस्जिदों में सुबह की प्रार्थना करने से पहले हर मुसलमान को दान देना होता है, जिसे ज़कात उल-फ़ितर कहते हैं।

सोमवार

कोरोना की दूसरी लहर में तेज़ी आने के साथ साथ खाने के चीजों के दाम में भी तेजी

कोरोना की दूसरी लहर में तेज़ी आने के साथ साथ खाने के चीजों के दाम में भी तेजी आनी शुरू हो गई है। इस साल फरवरी से मई तक दलहन और तिलहन के दाम 15 से 30 फीसदी तक बढ़ गए। ये बढ़ोतरी खुदरा और थोक दोनों मंडियों में हुई है। अप्रैल में जैसे जैसे कोरोना बढ़ रहा था, मार्केट में रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ रहे थे।






सरसों का तेल 50-75 रुपये हुआ महंगा

अभी तिलहन और दलहन की कीमत में 15 से 30 रुपये प्रति किलो/ लीटर तक का उछाल आया है। इसलिए सरसों तेल और रिफाइंड 50 से 75 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए। यही हाल दालों का भी है। दाल की कीमत में भी 40 से 50 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।

बड़ी कंपनियों के रिटेल प्राइस भी बढ़े

अचानक महंगाई से न सिर्फ रसोई का बजट गड़बड़ा गया है बल्कि आम लोगों पर भी महंगाई की मार पड़ रही है। टाटा चाय का 250 ग्राम का जो पैकेट फरवरी-मार्च में 85 रुपये का था, अब वो 125 रुपये में मिल रहा है।

जमाखोरी के कारण कीमत बढ़ी

ज्यादातर हरी सब्जी 50 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिक रही हैं। कोरोना के बढ़ते संकट के बीच बाजार में अस्थिरता आई है। आम लोग से लेकर खुदरा बाजार तक में खाद्य पदार्थों का स्टॉक कम होने लगा है। इस कारण भी कीमतों में उछाल आई है।

अनुज चौधरी को चुलबुल पांडेय के नाम से लोग बुलाते हैं, काफी बड़े कुख्यात बदमाशों की गिरफ्तारी करवाई।

आइये आज हम आपको बताते हैं एक ऐसे व्यक्ति की कहानी जिन्होंने अपने देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। और अपनी पुलिस सेवा के दौरान अपने कार्यों से जबरदस्त लोकप्रियता हॉसिल की। आज देश में इन्हें एक रीयल हीरो के रूप में जाना जाता है। किसी ने सच कहा है पूत के पांव पालने में नजर आ जाते है" यह कहावत बिल्कुल ठीक है।


Anuj kumar Chaudhary
Anuj Chaudhary

ये हैं उत्तर प्रदेश के पहलवान अनुज कुमार चौधरी, जिन्होंने कुश्ती में अपनी पहचान बनाई और ये सपना उनके दादा श्री बलजीत सिंह जी का था जो उन्होंने पूरा कर दिखाया। अनुज कुमार चौधरी उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर के छोटे से गांव बढेरी के रहने वाले हैं। अनुज कुमार चौधरी का जन्म 5 अगस्त 1980 को हुआ। महज 11 वर्ष की उम्र से अनुज कुश्ती खेलने लगे और उत्तर प्रदेश की शान बन गये।

पहली बार उत्तरप्रदेश राज्य से कोई पहलवान रास्ट्रीय स्तर पर अपने जोश, फुरती और सुन्दरता के लिए जाना जा रहा था। क्राइम कैपिटल कहा जाने वाला मुजफ्फरनगर अब पहलवान अनुज के नाम से जाना जाने लगा था।

उन्होंने छोटे से गांव से निकल कर देश-प्रदेश और अपने मुजफ्फरनगर को अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर सम्मान दिलाया। इसी क्राइम कैपिटल ने यूपी को एक ऐसा DSP दिया है, जिन्होंने मुजफ्फरनगर के साथ-साथ भारत का भी नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रौशन किया।



कुश्ती जगत में आगमन

दरअसल अनुज के करियर की शुरुआत कुश्ती से हुई थी। 11 साल की उम्र से ही अनुज ने कुश्ती करना शुरु कर दिया था। उनके दादा चोधरी बलजीत सिंह उन्हें बड़े पहलवान के रूप में देखना चाहते थें। और दादा जी का सपना पूरा करने के लिए अनुज ने मेहनत और लगन की। अपनी मेहनत और लगन से अनुज ने 1996 से लेकर 2010 तक, लगातार एक के बाद एक गोल्ड मेडल देश के लिए जीते। अनुज 2002 के कॉमनवेल्थ गेम्स में इंग्लैंड के मैनचेस्टर में खेल की सुर्खियों में आए, जहाँ उन्होंने 84 किग्रा के डिवीजन में एक रजत पदक जीता।


इसके बाद उन्हें 1998 में रेलवे में टीटी के पद पर नियुक्ति किया। लेकिन अनुज को टीटी की नौकरी अच्छी नहीं लगी और उन्होंने सन 2000 में नौकरी छोड़ दी और यूपी पुलिस मे सब इंस्पेक्टर बन गए और साल 2002 में इंस्पेक्टर बना दिया गया।

ऐसे ही अनुज 2012 में DSP बन गए। ज्यादातर लोगों ने उत्तर प्रदेश की पुलिस को विवादों में होने की खबरें देखीं होंगी । मगर उत्तर प्रदेश पुलिस में कई ऐसे भी पुलिस कर्मी हैं जिन्होंने अपने काम को बखूबी निभाया और प्रदेश और देश का नाम रोशन किया। अनुज को देश की जूनियर रेस्लिंग टीम का चीफ भी नियुक्त किया गया ।



अनुज बने चुलबुल पांडे

नोएडा में तैनाती के दौरान अनुज को लोग चुलबुल पांडे के नाम से बुलाते थें। ऐसा नाम उनको इसलिए दिया गया क्योंकि उन्होने सुंदर भाटी और सिंह राज जैसे बदमाशों को गिरफ्तार किया था। इसके साथ ही अनुज ने कई कुख्यात बदमाशों को भी गिरफ्तार किया।

इसके बाद जब अनुज की पोस्टिंग नोएडा में हुई, तो उन्होने यहां के इलाको में कानून व्यवस्था को सही किया। लोगों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति भी दिलाई। इनके द्वारा कसवाई हुई रस्सी आज भी दादरी मंडी में वैसे की वैसे ही है। वहीं नोएडा के भट्टा पारसौल गांव के किसान विवाद के दौरान अनुज जी को दनकौर थाने का SHO नियुक्त किया गया था।

दादा का सपना पूरी लगन से किया पूरा

उनके दादा उन्हें बड़े पहलवान के रूप देखना चाहते थे और दादा का सपना पूरा करने के लिए अनुज ने रेस्लिंग को अपना लिया और एक के बाद एक गोल्ड मैडल जीतते रहे ।

अनुज ने 1996 से लेकर 2010 नेशनल लेवल पर लगातार गोल्ड मैडल जीते और अपने स्पोर्ट की बदौलत अनुज को 1998 में रेलवे ने टी टी की पोस्ट पर नियुक्त किया । जिसके बाद अनुज चौधरी ने इस नौकरी से सन् 2000 में स्तीफा दे दिया और उत्तर प्रदेश पुलिस में S I (सब इंस्पेक्टर) की पोस्ट पर ज्वाइन किया। जिसके बाद उन्हें आउट और टर्न प्रमोशन दिया गया और अनुज चौधरी को 2002 में इन्स्पेक्टर बना दिया गया।

जिसके बाद उन्हें 2005 में अनुज चौधरी को अर्जुन अवार्ड दिया गया और फिर अनुज चौधरी को 2012 में प्रमोशन मिला और उनको DSP बना दिया गया । इस तरह से अनुज चौधरी ने अपने दादा का सपना पूरा किया और देश प्रदेश के साथ साथ उत्तर प्रदेश पुलिस का नाम भी रोशन किया।




अनुज चौधरी का बदमाशों में ख़ौफ़

नोएडा में पोस्टिंग के दौरान अनुज चौधरी को चुलबुल पांडेय के नाम से लोग बुलाते थे काफी बड़े कुख्यात बदमाशों की गिरफ्तारी करवाई। अनुज की तैनाती जब नोएडा का थाना फेज़-2, में CO की पोस्ट पर रहे तो उन इलाको में उन्होंने कानून व्यवस्था बहुत अच्छे से बनाई। दनकौर और दादरी में तैनाती के दौरान अनुज ने ना केवल अपराधियों को गिरफ्तार किया बल्कि इन कस्बों को जाम मुक्त भी करवा दिया था।



राष्ट्रीय पुरस्कार

2002 लक्ष्मण पुरस्कार (उत्तर प्रदेश सरकार)

2005 में राष्ट्रपति द्वारा अर्जुन अवॉर्ड ​भारत सरकार

2010 मान्यवर काशीराम पुरूष्कार – UP

2016 में उप्र सरकर द्वारा यश भर्ती सम्मान – UP

2016 भारत गौरव पूरूष्कार – National

दोबार भारत कुमार टाइटल 1996-1997

तीनबार शेर-ए-हिंद टाइटल 1999-2000-2001

नासिक भारत अभिमन्यु टाइटल 2001

गुरु हनुमान टाइटल दिल्ली 2001

दोबार यूपी टाइटल 2000-2003

दिल्ली केसरी टाइटल 2004

यूपी केसरी टाइटल 2005

81 किलो ग्राम 7 जूनियर नेशनल फ्री स्टाइल रेस्लिंग चैंपियनशिप पुणे (महाराष्ट्र) 1996 (स्वर्ण पदक)

85 किलो ग्राम आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी रेस्लिंग चैंपियनशिप हापुड़ (यू पी) 1996 (स्वर्ण पदक)

81 किलो ग्राम 18 जूनियर नेशनल एफएस रेस्लिंग चैंपियनशिप चित्तौड़गढ़ (राज)1997 (स्वर्ण पदक)

76 किलो ग्राम 44 सीनियर एफएस रेस्लिंग चैंपियनशिप हैदराबाद (ए पी) 1997 (स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम एस एफ 53 नेशनल सीनियर रेस्लिंग कॉम्पिटिशन निधनी (हरयाणा) 31.3.2006 से 3.4.2007में (स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम 54 आल इण्डिया पुलिस गेम दिल्ली बीएसएफ 19 से 23 दिसंबर 2005 (स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम 49 सीनियर नेशनल रेस्लिंग चैंपियनशिप रांची (झारखंड) 2003 (स्वर्ण पदक)

96 किलो ग्राम पांच के डी जाधव फेडरेशन कप रेस्लिंग चैंपियनशिप रोहा (मुंबई) (स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम फ्री स्टाइल नेशनल रेस्लिंग चैंपियनशिप पूरी (उड़ीसा) 2003 (स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम 5 आल इंडिया पुलिस गेम्स भवानी (हरि) 2002 (स्वर्ण पदक)

ग्राम 32 नेशनल गेम्स हैदराबाद (ए पी) 2002 (स्वर्ण पदक)

85 किलो ग्राम नेशनल गेम्स जालंधर (पंजाब) 2001 (स्वर्ण पदक)

85 किलो ग्राम 18 सीनियर नेशनल रेस्लिंग चैंपियनशिप निडानी (हरयाणा) 2001 (स्वर्ण पदक)

85 किलो ग्राम 50 आल इंडिया पुलिस गेम्स छावला कैंप नई दिल्ली 2001 (स्वर्ण पदक)

85 किलो ग्राम 47 नेशनल सीनियर एफ एस रेस्लिंग चैंपियनशिप अमरबती (महाराष्ट्र) 2000 (स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम इंडिया पुलिस गेम्स दिल्ली सीआरपीएफ 2007 में (रजत पदक)


अंतर्राष्ट्रीय खेल उपलब्धियां

एशिया चैंपियनशिप ओहन चाइना 2005 (रजत पदक)

कॉमनवेल्थ गेम्स कनाडा 2005 (स्वर्ण पदक )

कॉमनवेल्थ गेम्स साउथ अफ्रीका 2006 (स्वर्ण पदक )

84 किलो ग्राम फ्री स्टाइल कॉमन वेल्थ गेम्स में 2010 नई दिल्ली में रजत पदक

84 किलो ग्राम फ्री स्टाइल कॉमन वेल्थ रेस्लिंग चैंपियनशिप 5 से 6 जुलाई 2003 लंडन अंटोरिया (कनाडा)(स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम फ्री स्टाइल सीनियर एशिया रेस्लिंग चैंपियनशिप 3 से 7 मई 2009 थाईलैंड में (कांस्य पदक)

84 किलो ग्राम ग्रीसो रोमन वर्ल्ड पुलिस गेम्स हेल्प स्पेन 27 से 3 अगस्त 2003 में(रजत पदक)

84 किलो ग्राम एफ एस दिव्तीय ओलम्पिक क्वालीफाई रेस्लिंग चैंपियनशिप सोफिया ल्गारिया) दिनांक 14 से 15 फरवरी 2004 में (कांस्य पदक)

84 किलो ग्राम एफ एस कनाडा कप अंतर्राष्टीय रेस्लिंग चैंपियनशिप गोल्फ अंटोरिया (कनाडा)दिनांक 11 से 12 जुलाई 2003 में (रजत पदक)

84 किलो ग्राम एफ एस वर्ल्ड पुलिस गमेस स्पेन दिनांक 27 से 3 अगस्त 2003 में (रजत पदक)

76 किलो ग्राम ग्रांड प्रिक्स इब्राहिम मुस्तफा रेस्लिंग चैंपियनशिप काहिरा (मिस्र) दिनांक 28 से 30 अप्रैल 1998 में (रजत पदक)

85 किलो सेफ गमेस काठमांडू (नेपाल) दिनांक 25 से 4 अक्टूबर 1999 में (स्वर्ण पदक)

76 किलो ग्राम एफ एस अंतर्राष्ट्रीय टहकति कप रेस्लिंग चैंपियनशिप तेहरान (ईरान) दिनांक 16 से 20 फरवरी 1998 में चतुर्थ स्थान

76 किलो ग्राम एफ एस कॉमनवेल्थ रेस्लिंग चैंपियनशिप पुणे महाराष्ट्र दिनांक 6 से 8 मार्च 1997 में (स्वर्ण पदक)


Anuj Chaudhary With Honrable PM Narendra Modi

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं गृहमंत्री श्री अमित शाह जी का कश्मीर से धारा 370 हटाने के लिए बहुत बहुत आभार।अब निश्चित ही वहां के हर घर और हर युवा का १००% विकास होगा। यह कश्मीर के सुनहरे भविष्य की शुरुआत हुई है। सभी देशवासियों को इसके लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं। जय हिन्द

 अनुज चौधरी
DYSP UP Police
Olympian, Arjun Awardi wrestler
Asia, Commonwelth Champian



Anuj Chaudhary

ठोकरें अपना काम करेंगी, तू अपना काम करता चल
वो गिराएगी बार बार तू उठकर के फ़िर से चलता चल

anuj Chaudhary

मिल ही जाएगी मंजिल भटकते भटकते, गुमराह तो वो हैं जो घर से निकले ही नहीं!


इंसान का सबसे बेहतरीन साथी, उसकी सेहत है अगर उसका, साथ छूट जाए तो वह हर रिश्ते के लिए बोझ बन जाता है।
सेहतमंद रहे मस्त रहे सुप्रभात



सफलता हमेशा अकेले में गले लगाती है .! लेकिन असफलता हमेशा आपको सबके सामने तमाचा मारती है ..! यही जीवन है



सिर्फ उतना ही विनम्र बनो जितना जरुरी हो बेवजह विनम्रता दूसरों के अहम को बढ़ावा देती है


आत्म विश्वास और कड़ी महेनत, असफलता नामक बीमारी को मारने के लिए सबसे बढ़िया दवाई है,
ये आपको एक सफल व्यक्ति बनाती है


खाकी चैलेंज!

डर से मर जाने से बेहतर है जीत की कोशिश में मर जाना।

Mathura Vrindavan

मुकेश खन्ना के निधन की उड़ी अफवाह, मुकेश खन्ना खुद बोले- मैं बिल्कुल ठीक हूं

मुकेश खन्ना एक भारतीय फिल्म और टीवी कलाकार रहे हैं। जिन्होंने मुख्य रूप से बॉलीवुड में और टीवी दुनिया में काम किया है। मुकेश खन्ना को दूरदर्...