शनिवार

टीवी से होता जा रहा लोगों का मोहभंग, मोबाइल बना टीवी

भारत में अब समय आ गया है अब लोग टीवी कम देख रहे हैं और मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। 


लोगों का जो समय पहले टीवी पर हुआ करता था उसकी जगह अब मोबाइल ने ले ली है और अभी तो आने वाले वक्त में यह और तेजी से बदलने वाला है

 क्योंकि धीरे-धीरे लोग टीवी से मोबाइल पर शिफ्ट होते चले जा रहे हैं क्योंकि सारी जानकारियां सारा मनोरंजन कहीं पर भी लोग मोबाइल के जरिए प्राप्त कर लेते हैं.  इसलिए मोबाइल आज टी वी से ज्यादा उपयोगी बन गया है।

भारत में अब समय आ गया है अब लोग टीवी कम देख रहे हैं और मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। लोगों का जो समय पहले टीवी पर हुआ करता था उसकी जगह अब मोबाइल ने ले ली है. 

अभी तो आने वाले वक्त में यह और तेजी से बदलने वाला है क्योंकि धीरे-धीरे लोग टीवी से मोबाइल पर शिफ्ट होते चले जा रहे हैं क्योंकि सारी जानकारियां सारा मनोरंजन कहीं पर भी लोग मोबाइल के जरिए प्राप्त कर लेते हैं इसलिए मोबाइल आज टी वी से ज्यादा उपयोगी बन गया है।

 टीवी आपको घर बैठ कर देखना पड़ता है मोबाइल पर वीडियो आप कंही भी और किसी भी टॉपिक पर देख सकते हैं। घर में अलग अलग व्यक्ति अपनी पसंद के हिसाब से अपने प्रोग्राम देख सकते हैं।

 आज कल आ रहे सर्वे भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं भारतीय दर्शक ऑनलाइन कंटेंट देखने के लिए अब मोबाइल का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं

 वैसे तो यह बात सही है कि टीवी पर आप वह चीजें देखते हो जो टीवी आपको दिखाता है.  मोबाइल पर आप वह सब देखते हो जो आप देखना चाहते हो.  इसलिए आज के समय में मोबाइल टीवी से बहुत आगे निकल गया है।

अब समय आ गया है जब लोग मोबाइल पर पूरी तरह शिफ्ट हो जाएंगे और टीवी बीते जमाने की बात हुआ करेगी। मोबाइल आज बहुत ही पावरफुल टूल बन गया है।

बातचीत करने के लिए तो ये है ही, लोग बैंक का काम भी मोबाइल से कर लेते हैं। फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब आज कल हर कोई अपने लिए उपयोगी मान रहा है और उपयोगी है भी।

गुरुवार

Prem Mandir Vrindavan प्रेम मंदिर वृंदावन

प्रेम मंदिर  उत्तरप्रदेश राज्य के मथुरा जिले के समीप वृन्दावन में स्थित है

vrindavan ka prem mandir
Prem Mandir

मथुरा में राष्ट्रीय राजमार्ग- 2 पर छटीकरा से वृंदावन मार्ग पर लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर  स्थित है
इसका निर्माण कृपालु जी महाराज द्वारा भगवान श्रीराधाकृष्ण  के मन्दिर के रूप में करवाया गया है।  इसमें इटैलियन करारा संगमरमर का प्रयोग किया गया है और इसे राजस्थान  और उत्तरप्रदेश के एक हजार शिल्पकारों ने तैयार किया है। इस मन्दिर के निर्माण में 11 वर्ष का समय और लगभग 100  करोड़ रुपए की धन राशि लगी है।

इस मन्दिर का शिलान्यास 14 जनवरी 2001  को कृपालुजी महाराज द्वारा किया गया था। ग्यारह वर्ष के बाद तैयार हुआ यह भव्य प्रेम मन्दिर सफेद इटालियन करारा संगमरमर से तराशा गया है।  यह मन्दिर प्राचीन भारतीय शिल्पकला के पुनर्जागरण का एक नमूना है।


सम्पूर्ण मन्दिर 54 एकड़ में बना है तथा इसकी ऊँचाई 125 फुट, लम्बाई 122 फुट तथा चौड़ाई 115 फुट है। इसमें फव्वारे, राधा-कृष्ण की मनोहर झाँकियाँ, श्री गोवर्धन लीला, कालिया नाग दमन लीला, झूलन लीला की झाँकियाँ उद्यानों के बीच सजायी गयी है। 

यहां साफ़ सफाई बहुत अधिक रहती है। यह मन्दिर वास्तुकला के माध्यम से दिव्य प्रेम को साकार करता है। सभी वर्ण, जाति, देश के लोगों के लिये खुले मन्दिर के लिए द्वार सभी दिशाओं में खुलते है। 

मुख्य प्रवेश द्वारों पर आठ मयूरों के नक्काशीदार तोरण हैं तथा पूरे मन्दिर की बाहरी दीवारों पर राधा-कृष्ण की लीलाओं को शिल्पांकित किया गया है। मंदिर परिसर में झांकियों के माध्यम से बड़ी ही खूबसूरती से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है
mathura vrindavan ka prem mandir
Prem Mandir

इसी प्रकार मन्दिर की भीतरी दीवारों पर राधाकृष्ण और कृपालुजी महाराज की विविध झाँकियों का भी अंकन हुआ है। मन्दिर में कुल 94 स्तम्भ हैं जो राधा-कृष्ण की विभिन्न लीलाओं से सजाये गये हैं। अधिकांश स्तम्भों पर गोपियों की मूर्तियाँ अंकित हैं, जो सजीव जान पड़ती है।

मन्दिर के गर्भगृह के बाहर और अन्दर प्राचीन भारतीय वास्तुशिल्प की उत्कृष्ट नक्काशी और चित्रकारी की गयी है तथा संगमरमर की शिलाओं पर राधा गोविन्द गीत सरल भाषा में लिखे गये हैं। मंदिर परिसर में गोवर्धन पर्वत की सजीव झाँकी बनायी गयी है।

प्रेम मंदिर के बाजू में ही एक 73,000 वर्ग फीट के एक हॉल का निर्माण किया गया है, जहाँ एक साथ-एक ही समय 25,000 लोग जमा हो सकते है।

आरती के समय मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त इकट्ठे होते हैं। मंदिर के अंदर प्रवेश करने के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है और प्रवेश सभी के लिए पूरी तरह से नि: शुल्क है। पूरे मंदिर को देखने के लिए कम से कम दो घंटे का समय लगता है।

प्रेम मंदिर की भव्यता रात में कई गुना अधिक बढ़ जाती है

रात में मंदिर की लाइटिंग कई रंग बदलती है। वहीं झांकियां भी एक्शन करती हुई नजर आती हैं। पूरा परिसर जगमगा उठता है।

वहीं हर रोज शाम को करीब आधे घंटे का फाउंटेन शो होता है। जो बहुत ही मनोरम लगता है। मंदिर परिसर में ही एक रेस्टोरेंट की व्यवस्था भी है जहां आप पैसा देकर भोजन कर सकते हैं। जूते चप्पल रखने की निशुल्क व्यवस्था है। 


बांके बिहारी जी चमत्कार कथा

बोलिए बांके बिहारी लाल की जय

एक व्यक्ति पाकिस्तान से एक लाख रुपये का रूहानी इत्र लेकर आये थे। क्योंकि उन्होंने संत श्री हरिदास जी महाराज और बांके बिहारी के बारे में सुना हुआ था।


उनके मन में आया कि मैं बिहारी जी को ये इत्र भेंट करूँ। इस इत्र की खासियत ये होती है कि अगर बोतल को उल्टा कर देंगे तो भी इत्र धीरे-धीरे गिरेगा और इसकी खुशबु लाजवाब होती है।


Shri Bankeybihari ji

ये व्यक्ति वृन्दावन पहुंचा। उस समय संत जी एक भाव में डूबे हुए थे। संत देखते है कि राधा-कृष्ण दोनों होली खेल रहे हैं। जब उस व्यक्ति ने देखा कि ये तो ध्यान में हैं, तो उसने वह इत्र की शीशी उनके पास में रख दी और पास में बैठकर संत की समाधी खुलने का इंतजार करने लगा।

तभी संत देखते हैं की राधा जी और कृष्ण जी एक दूसरे पर रंग डाल रहे हैं। पहले कृष्ण जी ने रंग से भरी पिचकारी राधा जी के ऊपर मारी। और राधा रानी सर से लेकर पैर तक रंग में रंग गई। अब जब राधा जी रंग डालने लगी तो उनकी कमोरी(छोटा घड़ा) खाली थी।

संत को लगा की राधा जी तो रंग डाल ही नहीं पा रही है। क्योंकि उनका रंग खत्म हो गया है। तभी संत ने तुरंत वह इत्र की शीशी खोली और राधा जी की कमोरी में डाल दी और तुरंत राधा जी ने कृष्ण जी पर रंग डाल दिया। हरिदास जी ने सांसारिक दृष्टि में वो इत्र भले ही रेत में डाला। लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि में वो राधा रानी की कमोरी में डाला।

उस भक्त ने देखा की इन संत ने सारा इत्र जमींन पर गिरा दिया। उसने सोचा मैं इतने दूर से इतना महंगा इत्र लेकर आया था, पर इन्होंने तो इसे बिना देखे ही सारा का सारा रेत में गिरा दिया। मैंने तो इन संत के बारे में बहुत कुछ सुना था। लेकिन इन्होने मेरे इतने महंगे इत्र को मिट्टी में मिला दिया।

वह कुछ भी ना बोल सका। थोड़ी देर बाद संत ने आंखे खोली उस व्यक्ति ने संत को अनमने मन से प्रणाम किया। अब वो व्यक्ति जाने लगा। तभी संत श्री हरिदास जी ने कहा  कि आप मंदिर के अंदर जाकर बिहारी जी के दर्शन कर आइये।

उस व्यक्ति ने सोचा कि अब दर्शन करें  या ना करें क्या लाभ। इन संत के बारे में जितना सुना था सब उसका उल्टा ही पाया है। फिर भी चलो चलते समय दर्शन कर ही लेता हूँ। क्या पता अब कभी आना हो या ना हो।

ऐसा सोचकर वह व्यक्ति बांके बिहारी के मंदिर में अंदर गया तो वह देखता है कि सारे मंदिर में वही इत्र महक रहा है और जब उसने बिहारी जी को देखा तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ बिहारी जी सिर से लेकर पैर तक उसी  इत्र में नहाए हुए थे।


उसकी आंखों से प्रेम के आंसू बहने लगे और वह सारी लीला समझ गया तुरंत बाहर आकर संत के चरणों मे गिर पड़ा और उन्हें बार-बार प्रणाम करने लगा। कहने लगा संत जी मुझे माफ़ कर दीजिये। मैंने आप पर अविश्वास दिखाया।

संत श्री हरिदास ने उसे माफ़ कर दिया और कहा कि भैया तुम भगवान को भी सांसारिक दृष्टि से देखते हो लेकिन मैं संसार को भी आध्यात्मिक दृष्टि से देखता हूँ।

बोलिए बांके बिहारी लाल की जय!

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श्री बाँकेबिहारी जी का इतिहास

मंगलवार

भगवान श्री कृष्ण की सबसे प्रिय गोपी राधा बरसाना की ही रहने वाली थीं।

बरसाना मथुरा  जिले के नंदगाँव ब्लाक में स्थित एक क़स्बा है। 


बरसाना  मथुरा से 43 KM की दूरी पर और दिल्ली से 114 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मथुरा से बरसाना जाते समय गोवर्धन रास्ते में पड़ता है। और गोवर्धन से बरसाना १५ किलोमीटर है। 

barsana ki radha rani
Barsana

राधा बरसाना की ही रहने वाली थीं

भगवान श्री कृष्ण की सबसे प्रिय गोपी राधा बरसाना की ही रहने वाली थीं। इनके पिता का नाम वृषभानु था। क़स्बे के मध्य श्री राधा की जन्मस्थली माना जाने वाला श्री राधावल्ल्भ मन्दिर स्थित है।

कुछ का कहना है कि राधाजी का जन्म यमुना के निकट बसे स्थित ग्राम रावल में हुआ था और बाद में उनके पिता बरसाना में बस गए। इस मान्यता के अनुसार नन्दबाबा एवं वृषभानु का आपस में घनिष्ठ प्रेम था। 


राधारानी का प्रसिद्ध मंदिर बरसाना ग्राम की पहाड़ी पर स्थित है। बरसाना में राधा को 'लाड़लीजी' कहा जाता है।

बरसाने की लट्ठमार होली

जब बात होली पर्व की होती है तो बरसाना की होली लोगों के लिए काफी आकर्षण का केंद्र रहती है। बरसाना गांव में होली अलग तरह से खेली जाती है.  जिसे लठमार होली कहते हैं। इस होली में पुरुष महिलाओं पर रंग डालते हैं और महिलाएं उन्हें लाठियों तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से मारती हैं। 
बरसाना की होली 

देश विदेश से पर्यटकों का होली पर बरसाना आना एक अलग आकर्षण है। बरसाना गाँव लठ्ठमार होली के लिये सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है जिसे देखने के लिये हजारों भक्त एकत्र होते हैं।  बसंत पंचमी से बरसाना होली के रंग में सरोबार हो जाता है।  यहां के घर-घर में होली का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।  

प्रमुख मंदिर : राधारानी मंदिर

लाड़ली जी के मंदिर में राधाष्टमी का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।  राधाष्टमी के उत्सव में राधाजी के महल को काफी दिन पहले से सजाया जाता है। राधाजी को लड्डूओं का भोग लगाया जाता है और उस भोग को मोर को खिला दिया जाता है जिन्हें राधा कृष्ण का स्वरूप माना जाता है। 

राधा रानी मंदिर में राधा जी का जन्मदिवस राधा अष्टमी मनाने के अलावा कृष्ण जन्माष्टमी, गोवर्धन-पूजन, गोप अष्टमी और होली जैसे पर्व भी बहुत धूम-धाम से मनाए जाते हैं। इन त्योहारों में मंदिर को मुख्य रूप से सजाया जाता है, प्रतिमाओं का श्रृंगार विशेष रूप से होता है, मंदिर में सजावटी रोशनी की जाती है और सर्वत्र सुगन्धित फूलों से झांकियां बना कर विग्रह का श्रृंगार किया जाता है। राधा को छप्पन भोग भी लगाए जाते हैं। 

बरसाने के दर्शनीय स्थान

यंहां राधा जी का मुख्य मंदिर तो है ही साथ में इन जगहों पर भी जाना चाहिए।
बरसाना में कुशल विहारी जी का कलात्मक मंदिर जयपुर नरेश माधोसिंह II ने बरसाने में निर्मित करवाया था यह एक बृहत पहाड़ी की तलहटी में बसा है। यह राधा जी के मंदिर से 1 KM की दूरी पर है। इस मंदिर को देखकर ऐसा लगता है कि यह किसी राजा का भव्य राजमहल है।

radha rani ka goan
Barsana

कृपालु जी महाराज द्वारा बनवाया कीर्ति मंदिर बरसाना में दर्शनीय हैं। यंहा श्री राधा जी को बहुत ही सुन्दर ढंग से दिखाया है।  यहां पार्किंग की अच्छी व्यवस्था है। कीर्ति मंदिर बिलकुल रोड पर ही है। वंही पर खानपान की व्यवस्था भी है। इस मंदिर में बेहद साफ सफाई रहती है। सुबह शाम यह मंदिर दर्शन के लिए खुलता है।   

Mathura Vrindavan

ठाकुर बाँके बिहारी जी का मंदिर खुला, डेढ़ हजार भक्तों ने किए पहले दिन दर्शन

वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी जी मंदिर को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया है।  मंदिर के बाहर और अंदर कोविड-19 के नियमो...