बुधवार

लाल पीली नीली हरी मिठाई न खाएं

लाल, पीली, नीली,  हरी मिठाइयां बाजार में  आपको मिलती हैं।  आजकल लोग रंगीन मिठाइयों को खरीद भी खूब रहे हैं। क्या यह उस मिठाई का प्राकृतिक रंग है,  निश्चित ही इसका उत्तर नहीं है।

 जब मिठाई बनती है तो उसका अपना प्राकृतिक रंग होता है।  तो उस प्राकृतिक रंग वाली मिठाई को खाने में क्या परेशानी है।  खानी तो मिठाई है फिर लोग लाल पीली नीली हरी मिठाई क्यों खरीदते हैं क्यों खाते हैं।

यह बात आप निश्चित ही मानिए के जब हम प्राकृतिक मिठाई में रंग मिलाते हैं तो वह कहीं ना कहीं मनुष्य के शरीर को नुकसान ही पहुंचाते हैं। फिर लाल पीली नीली हरी मिठाई खाने का क्या औचित्य है। 

क्यों हम अपने शरीर में जहर घोल रहे हैं। लाल पीली नीली हरी मिठाई देखने में हो सकता है अच्छी लगे लेकिन ये उसका प्राकृतिक रंग तो नहीं है तो फिर क्यों उसे खाया जाए।
 
ऐसा भी नहीं है कि मिठाई को रंगीन करने से उसके स्वाद बढ़ जाता हो।  जो लाल पीली नीली हरी मिठाई हम खाते हैं तो मिठाई में मिले रंग हमारे शरीर के अंदर ही तो प्रवेश कर जाते हैं क्या वह हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

 हम जाने-अनजाने ऐसीअनेक गलतियां करते रहते हैं जिनके परिणाम अनेक बीमारियों के रूप में हमारे सामने आते हैं।  क्या लाल पीली नीली हरे रंग से मिठाई का स्वाद बढ़ जाता है, यदि नहीं तो फिर क्यों खाते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

Mathura Vrindavan

लाल पीली नीली हरी मिठाई न खाएं

लाल, पीली, नीली,  हरी मिठाइयां बाजार में  आपको मिलती हैं।  आजकल लोग रंगीन मिठाइयों को खरीद भी खूब रहे हैं। क्या यह उस मिठाई का प्राकृतिक रंग...