शुक्रवार

राशन कार्ड अभी नहीं बना है तो शीघ्र बनवा लें, हैं कई फायदे

राशन कार्ड एक सरकारी कागजात है, जिसकी मदद से उचित दर की दुकानों से चावल, गेंहू ,राशन आदि समान मार्किट रेट से कम दाम पर खरीद सकते हैं।

 कोरोना काल में उत्तर प्रदेश सरकार  ने राशन कार्ड धारकों को राशन मुफ्त में बांटा है जो अभी भी दिया जा रहा है। इसके अलावा कई जगहों पर राशन कार्ड का इस्तेमाल आईडी प्रूफ  के तौर पर भी होता है। जैसे- एलपीजी कनेक्शन, ड्राइविंग लाइसेंस आदि में।

राशन कार्ड 3 प्रकार के होते हैं- 
गरीबी रेखा के ऊपर (APL),
गरीबी रेखा के नीचे (BPL) 
अन्‍त्योदय (Antyodaya) परिवारों के लिए

अंत्योदय कैटेगरी में बेहद ज्यादा गरीब लोग आते हैं। ये कैटेगरी व्यक्ति की सालाना आय के आधार पर तय की जाती है।

राशन कार्ड बनवाने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना अनिवार्य शर्त है। जो व्यक्ति जिस प्रदेश से राशन कार्ड बनवाना चाहता है, उसके पास किसी अन्य राज्य का राशन कार्ड नहीं होना चाहिए।

राशन कार्ड बनवाने वाले कि आयु 18 साल से अधिक होनी चाहिए। जिन बच्चों की उम्र 18 साल से कम होती है, उन बच्चों के नाम माता-पिता के राशन कार्ड में शामिल किया जाता है।

राशन कार्ड के लिए आपको आवेदन करना होगा। जिसकी जांच आवेदन करने के 30 दिन के अंदर पूरी हो जाती है। सभी डिटेल वेरिफाई होने के बाद राशन कार्ड बन जाता है। 

इसका प्रयोग बैंक खाता खोलने, सिम लेने, आई डी प्रूफ, पते का प्रमाण पत्र आदि कई जगह पर कर सकते हैं।

गुरुवार

पत्नी भक्ति

मैंने एक दिन अपनी पत्नी से पूछा ~
       क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता,
    मैं बार-बार तुमको बोल देता हूँ, 
       डाँट देता हूँ , फिर भी तुम 
    पति भक्ति में लगी रहती हो, 
        जबकि मैं कभी 
 पत्नी भक्त बनने का प्रयास नहीं करता ?

    मैं विधि का विद्यार्थी और मेरी पत्नी
         विज्ञान की, परन्तु उसकी 
  आध्यात्मिक शक्तियाँ मुझसे कई गुना 
  ज्यादा हैं , क्योकि मैं केवल पढता हूँ,
            और वो  
     जीवन में उसका पालन करती है.

      मेरे प्रश्न पर, जरा वो हँसी, और 
       गिलास में पानी देते हुए बोली ~
          ये बताइए, एक पुत्र यदि 
     माता की भक्ति करता है, तो उसे 
      मातृ भक्त कहा जाता है, परन्तु 
            माता यदि पुत्र की 
             कितनी भी सेवा करे,
               उसे पुत्र भक्त तो 
           नहीं कहा जा सकता न.

              मैं सोच रहा था,
    आज पुनः ये मुझे निरुत्तर करेगी.
      मैंने प्रश्न किया ~ ये बताओ ....
       जब जीवन का प्रारम्भ हुआ, तो 
         पुरुष और स्त्री समान थे,

   फिर पुरुष बड़ा कैसे हो गया, जबकि
     स्त्री तो शक्ति का स्वरूप होती है ?

  मुस्काते हुए उसने कहा ~आपको 
   थोड़ी विज्ञान भी पढ़नी चाहिए थी.
              मैं झेंप गया.

       उसने कहना प्रारम्भ किया ~
    दुनिया मात्र दो वस्तु से निर्मित है ...
         ◆  ऊर्जा और पदार्थ, ◆

    पुरुष -->  ऊर्जा का प्रतीक है, और
     स्त्री  -->  पदार्थ की.
   पदार्थ को यदि विकसित होना हो, तो 
     वह ऊर्जा का आधान करता है, 
         ना की ऊर्जा पदार्थ का.

     ठीक इसी प्रकार ... जब एक स्त्री 
    एक पुरुष का आधान करती है, तो 
       शक्ति स्वरूप हो जाती है, और 
         आने वाली पीढ़ियों अर्थात् 
             अपनी संतानों के लिए 
             प्रथम पूज्या हो जाती है, 
                      क्योंकि 
             वह पदार्थ और ऊर्जा
         दोनों की स्वामिनी होती है,
                जबकि पुरुष 
    मात्र ऊर्जा का ही अंश रह जाता है.

         मैंने पुनः कहा ~
          तब तो तुम मेरी भी
            पूज्य हो गई न, क्योंकि 
              तुम तो ऊर्जा और पदार्थ 
                दोनों की स्वामिनी हो ?

 अब उसने झेंपते हुए कहा ~ आप भी 
    पढ़े लिखे मूर्खो जैसे बात करते हैं.
           आपकी ऊर्जा का अंश 
            मैंने ग्रहण किया, और 
          शक्तिशाली हो गई, तो क्या 
            उस शक्ति का प्रयोग 
             आप पर ही करूँ ?
         ये तो कृतघ्नता हो जाएगी.

          मैंने कहा ~ मैं तो तुम पर
            शक्ति का प्रयोग करता हूँ ,
                फिर तुम क्यों नहीं ?

         
    जानते हो उसने क्या कहा ~ उसने कहा, जिसके संसर्ग मात्र से 
       मुझमें जीवन उत्पन्न करने की 
              क्षमता आ गई, और 
          ईश्वर से भी ऊँचा जो पद 
          आपने मुझे प्रदान किया,
       जिसे माता कहते हैं 
 उसके साथ मैं विद्रोह नहीं कर सकती.

    फिर मुझे चिढ़ाते हुए उसने कहा ~
      यदि शक्ति प्रयोग करना भी होगा, 
         तो मुझे क्या आवश्यकता ?
  मैं तो माता सीता की भाँति
           लव कुश तैयार कर दूँगी,
              जो आपसे मेरा
          हिसाब किताब कर लेंगे.

शुक्रवार

मथुरा वृन्दावन के सम्पूर्ण दर्शन Mathura Vrindavan ke sampurn Darshan

shri krishn janm sthan
Radhakrishnaji Mathura

श्रृंगार -दर्शन श्रीराधाकृष्णजी महाराज,
विराजमान श्रीकृष्ण-जन्मस्थान, मथुरा.


keshav dev mandir
Keshav Dev Ji
ठाकुर श्री केशव देव जी महाराज , 
विराजमान श्री कृष्ण जन्मस्थान , मथुरा ।
आज के दिव्य शृंगार दर्शन

परम दिव्य श्री गर्भगृह ( जन्मस्थान ) 
 श्री कृष्ण जन्मस्थान , मथुरा

shayan darshan keshavdevji
Keshav devji Shayan Darshan
ठाकुर श्री केशव देव जी महाराज , 
विराजमान श्री कृष्ण जन्मस्थान , मथुरा ।
आज के दिव्य शयन दर्शन।

छप्पन भोग के दिव्य दर्शन, विराजमान श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा।

श्री बाँके बिहारी जी वृन्दावन
bankey bihariji temple
Shri Bankey Bihari Temple

bihariji vrindavan
Shri Bankey Bihari ji

 ठाकुर श्री बाँके बिहारी जी की सईया सेज के दर्शन जय बिहारी जी की इस सेज पर ठाकुर जी विश्राम करते हैं

Nidhivan
निधिवन राज वृन्दावन ये पेड जो दिख रहे है ये कोई पेड नही ब्लकि साक्षात गोपियाँ है ये रात्रि मै गोपी रुप मै आकर श्याम सुन्दर व राधारानी के साथ नित्य रास करते है और प्रातः सूर्य कि पहली किरण के साथ पेड बन जाते है इनकि संख्या 16108 है

नंदगाँव
Nand Bhavan

छप्पन भोग दर्शन नंदगांव नंदभवन

दाऊजी
Dauji Baldev
दर्शन ठाकुर बल्देव जू महाराज दाऊजी

गोवर्धन
Govardhan

गोवर्धन गिर्राज जी दर्शन

Kusam sarovar
कुसम सरोवर, गोवर्धन


माँ मानसी गंगा, गोवर्धन



Mathura Vrindavan

क्या है हाई ब्लड प्रेशर? हाई ब्लड प्रेशर कितने प्रकार के होते हैं? हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण क्या हैं? हाई ब्लड प्रेशर के कारण क्या है?

हाई ब्लड प्रेशर आज कल आम समस्या बनती जा रही है। इसे गंभीरता से न लेने के कारण ज्यादातर लोग आसानी से इसका शिकार बनते जा रहे हैं। भारत में 8 ल...