शुक्रवार

पथ (पीले फूल)-भाग 2 रीमा ठाकुर (लेखिका ) धारावाहिक

घर पहुँचते ही नीरु माँ के रुम मे भाग कर गई ,पास जाकर देखा ,तो माँ का चेहरा भावशून्य हो रहा था,,,,

नीरु डर गई,माँ माँ क्या हुआ,आपको ,नीरु माँ के बहुत नजदीक पहुँच गई,नीरु बेटा ,,,पापा को फोन लगाकर बुला ले,माँ कराहते हुऐ बोली,माँ आप ऐसा क्यू बोल रही है""""""

नीरु फफक पडी,अचानक से माँ की न थमने वाली खाँशी शुरु हो गई,""""""""         

कितनी बार समझाया, माँ अपना ख्याल रखो,पर मेरी सुनता कौन है,,,,


नीरु आँसू पोछती हुई बोली,तभी माँ ने एक जोर की खाँशी के साथ,बहुत सारा खून उगल दिया,और निस्तेज हो,.वही पंलग पर निढाल हो गई,,,,,,

धीरे धीरे माँ का जिस्म ठंडा  होने लगा,बस उनके मुहँ कुछ अस्पष्ट से शब्द सुनाई दे रहे थे""""

नीरु मेरा बहादुर बच्चा अपना और पापा का ख्याल रखना,,

माँ,आप ऐसा क्यू बोल रही हो,नीरु सिसक उठी""""""

अब माँ खमोश थी""""

माँ ,की हालात देख नीरु"बाहर गेट की ओर भागी ,वापस आयी तो उसके साथ पडोस की काकी थी""""

क्या हुआ बेटा"""""

पता नही काकी माँ ,को कुछ हो गया है""""""

रुम मे पैर रखते ही,काकी ठिठक गई,रुम मे खून बिखरा पडा था""""""""

वो पलंग के पास पहुँची,दमयंती  अरे वो दमयंती आँखे खोलो,माँ की ओर से जबाब न पाकर ,,काकी भी घबरा गई,

वो माँ के पँलग के नजदीक खडी हो गई"""""

हाथ से गर्दन उठाई तो गर्दन एक ओर लुढक गई""""""

माँ के जिस्म मे कुछ हरकत न देख,काकी समझ गई"""

की  दमयंती  अब इस दुनिया से विदा ले चुकी है!


नीरु बेटा बाहर  से सब को बुला लाओ,और काका को 

बोलो की पापा को फोन कर सूचित करे"""""

जितनी जल्दी हो सके,घर पहुँचे""""""कृमशः 

आगे जारी भाग -3-प्रिये  पाठक✍️🏻🙏🏼

कृपया आपसब  बताऐ की दूसरा भाग कैसा लगा 

आपसे अनुरोध है,समीक्षा मे  जरुर बताये"""""

       आपकी अपनी लेखिका रीमा ठाकुर🙏🏼✍️🏻


मथुरा वृंदावन के मंदिरों की सम्पूर्ण जानकारी

रविवार

Do rail bus ply between Mathura Junction and Vrindavan?

 मथुरा से वृन्दावन 12 KM है।  

ट्रेन रुट है तो सही लेकिन वहां तक ट्रेन जाती नही है। मथुरा से वृन्दावन जाने के लिए टेम्पो, टेक्सी, आदि ही सफल हैं।

"दिव्य कुम्भ - भव्य कुम्भ" दिनांक 16 फरवरी 2021 से 25 मार्च 2021 #श्रीधाम_वृन्दावन (मथुरा)

"दिव्य कुम्भ - भव्य कुम्भ"
दिनांक 16 फरवरी 2021 से 25 मार्च 2021
#श्रीधाम_वृन्दावन (मथुरा)



Kumbh Mela Vrindavan


"दिव्य कुम्भ - भव्य कुम्भ"
दिनांक 16 फरवरी 2021 से 25 मार्च 2021
#श्रीधाम_वृन्दावन (मथुरा)


श्रीधाम_वृन्दावन कुंभ  शुभारंभ 16 फरवरी को वसंत पंचमी के दिन तीनों अनी अखाड़ों द्वारा ध्वजारोहण के साथ होगा। रंगभरनी एकादशी 25 मार्च को पंचकोसीय परिक्रमा के साथ मेले का समापन होगा। तीन शाही स्नान की तिथियां घोषित की गई हैं।

पहला शाही स्नान माघी पूर्णिमा 27 फरवरी को होगा। 
द्वितीय शाही स्नान फाल्गुन कृष्ण पक्ष 9 मार्च को होगा
तीसरा शाही स्नान अमावस्या 13 मार्च को होगा।
 

शनिवार

जानिए बबासीर क्या है और इसे कैसे ठीक करना है।

बवासीर की आरंभिक अवस्था में गुदाद्वार की भीतरी और बाहरी नसों में खुजली और जलन महसूस होती है। जलन कभी भीतरी नस में होती है कभी बाहर ही नस में।

जिस जगह जलन और खुजली होती है वहां बिना मुंह के फोड़े की जैसी छोटी-छोटी गांठ जिनको मस्से भी कहते हैं निकल आते हैं जो आगे चलकर काफी बड़े हो जाते हैं।यही जब फट जाते हैं और उनसे खून निकलने लगता है तो इसे बवासीर खूनी कहते हैं। और जब खून नहीं निकलता है उस स्थिति में बादी बवासीर कहते हैं।


babasir kya hai
What Is Piles

बवासीर कोई रोग नहीं है, अपितु रोग का एक लक्षण है

बवासीर रोग सभ्य समाज का रोग है। मैदा, डबल रोट, डिब्बाबंद, पैक्ड फ़ूड, अत्यधिक तेज मसाले, अधिक तली हुई खाद्य पदार्थ प्रयोग करने से पेट साफ नहीं होता और कब्ज जब बराबर बना रहता है तब आंतो में उसकी सड़न से गर्मी बढ़ जाती है, जिसके फलस्वरूप आंतों की झिल्ली कमजोर हो जाती है।

गुदा स्थान में भारीपन का अनुभव होता है

मलत्याग में कठिनाई और कष्ट होता है तथा उसके पास की नसों की अंतिम छोर में दूषित रक्त इकट्ठा हो जाने से धीरे-धीरे गंदा मास का निर्माण होता चला जाता है यही बवासीर है।

गुदा के पास की नसें शरीर की एक लंबी रक्त वाहिका का सबसे निचला हिस्सा है जिस पर मार्ग की पेशियां असाधारण अवस्था में अनावश्यक दबाव डालकर उन शिरों के रुधिर प्रवाह में रूकावट डालती है।

शरीर में विजातीय द्रव्य की मात्रा अधिक हो चुकी है

गुदा पर ये मस्से इस बात को प्रकट करते हैं कि शरीर में विजातीय द्रव्य की मात्रा अधिक हो चुकी है रक्त दूषित हो चुका है तथा पेट में मल भरकर पुराना पड़ चुका है।

इस कथन से स्पष्ट है कि बवासीर का मूल कारण कब्ज के कारणों से भी गहरा है। बवासीर के कारणों में से कब्ज होना सिर्फ एक कारण है क्योंकि हर कब्ज के रोगी को बवासीर नहीं होती परंतु बवासीर के रोगी को कब्ज होना जरूर होता है।

बवासीर के अन्य कारणों में लीवर की खराबी पेट की खराबी और किसी भी प्रकार का रक्त विकार आदि हो सकते हैं।

बवासीर की तकलीफ जड़ से दूर करने के लिए

यह आवश्यक है कि कब्ज को सबसे पहले दूर किया जाए और फिर उसे कभी ना होने दिया जाए। कब्ज दूर करने का निश्चित उपाय किया जाए।

पुराना बवासीर सारे शरीर की स्थिति के सुधार होने पर ही जाता है अर्थात कहने का मतलब यह है कि बवासीर को ठीक करना है तो संपूर्ण शरीर को स्वस्थ करना होगा उसके बाद वह अपने आप ही ठीक हो जाएगा।

बवासीर के रोगी की आंतें बहुत कमजोर हो जाती हैं। बबासीर के रोगी को ऐसे खाद्य पदार्थ देने चाहिए जिनसे कब्ज दूर हो साथ ही मल भी मुलायम बने जिससे कि वह बिना तकलीफ दिए गुदा मार्ग से बाहर हो जाए।

सबसे पहले आपको अपना खानपान ठीक करना होगा।

सलाद, रसदार फल या उसका रस, तरकारी या उसके सूप की अधिकता हो जिसमें ऊपर से पानी मिलाने या पीने की आवश्यकता ना हो जिससे यह लाभ है कि तरल पदार्थ शुद्ध रूप में प्राप्त हो जाता है।

यह इस प्रकार का आहार कुछ दिनों तक चलाते रहने पर रोग उत्पन्न करने वाली स्थिति बहुत कुछ दूर हो जाएगी और यदि रोग आरंभिक अवस्था में होगा तो वह अच्छा भी हो जाएगा। ऐसे रोगी एनिमा भी लेना चाहिए।

खाने-पीने में गेहूं का दलिया, चोकर समेत आटे की रोटी, पालक, बथुआ तोरई, परवल, मूली पत्ता गोभी हरा, पपीता आदि सभी साग सब्जियां, पका पपीता, सेव, नाशपाती, मट्ठा, दूध किशमिश, मुनक्का, आलूबुखारा, अंजीर, कच्चा नारियल ले सकते हैं।

दाल और उत्तेजक खाद्य पदार्थ, पैक्ड फ़ूड एकदम से त्याग कर देना चाहिए।

बवासीर को ठीक करने में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सबसे पहले आपको अपना खानपान ठीक करना होगा। उसके बाद दैनिक दिनचर्या को व्यवस्थित करना होगा।

खानपान में बहुत ही सात्विक प्रकृति का भोजन लेना होगा और सलाद फल आदि का प्रयोग अधिकतम कर के भोजन कम करना होगा। भोजन को खूब चबा चबाकर आराम और तसल्ली से करना चाहिए।

बवासीर को पूर्ण रूप से ठीक किया जा सकता है, थोड़ा आयुर्वेदिक औषधि लें यदि आप अपनी दिनचर्या को और खानपान को सुव्यवस्थित करलें तो निश्चित ही बवासीर में पूर्ण आराम मिलेगा।

Mathura Vrindavan

पथ (पीले फूल)-भाग 2 रीमा ठाकुर (लेखिका ) धारावाहिक

घर पहुँचते ही नीरु माँ के रुम मे भाग कर गई ,पास जाकर देखा ,तो माँ का चेहरा भावशून्य हो रहा था,,,, नीरु डर गई,माँ माँ क्या हुआ,आपको ,नीरु माँ...