मंगलवार

मुकेश खन्ना के निधन की उड़ी अफवाह, मुकेश खन्ना खुद बोले- मैं बिल्कुल ठीक हूं

मुकेश खन्ना एक भारतीय फिल्म और टीवी कलाकार रहे हैं। जिन्होंने मुख्य रूप से बॉलीवुड में और टीवी दुनिया में काम किया है। मुकेश खन्ना को दूरदर्शन के शो 'शक्तिमान' से सबसे ज्यादा पहचान मिली। इन्हे बी आर चोपड़ा के महाभारत शो में भीष्म के रूप में भी दर्शकों द्वारा बेहद पसंद किया गया है। और बहुत दिनों तक इन्हें भीष्म के रूप में याद किया गया।




इन्होने साल 1981 में रिलीज़ हुई फिल्म रूही अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद इन्होने काफी फिल्मों में काम किया। हिंदी फिल्मों के अलावा इन्होने मलयालम, मराठी और तेलगु सिनेमा में भी काम किया है।

टीवी के 'शक्तिमान' सीरियल से मशहूर होने वाले मुकेश खन्ना 90 के दशक में बच्चों से लेकर बूढ़े तक उनको हर कोई पसंद करता था। मुकेश खन्ना अपने किरदार की वजह से लोंगो के बीच बहुत ही लोकप्रिय हो गए थे। बच्‍चे उनके कपड़े और स्टाइल को कॉपी करने लग गए थे।


इससे पहले मुकेश खन्ना ने बीआर चोपड़ा की महाभारत में भीष्म पितामाह का किरदार निभाया था। उनका ये किरदार भी काफी पॉपुलर रहा था। इसके अलावा मुकेश खन्ना ने चंद्रकांता, युग, ब्रह्मा, एहसास और मर्यादा जैसे सीरियल में भी काम किया। मुकेश का हर किरदार अपने आप में अलग ही होता था।


लेकिन कुछ सालों बाद मुकेश खन्ना स्क्रीन से एकदम गायब हो गए। मुकेश खन्ना ने शादी नहीं की। मुकेश खन्ना भले ही फिल्‍म इंडस्ट्री से दूर हो गए हों लेकिन आज वो ऐसा काम कर रहे हैं जिस पर लोगों को गर्व होगा। मुकेश आने वाली पीढ़ी को एक्टिंग में महारत हासिल करना सिखा रहे हैं।


आज बच्चों के लिए मुकेश खन्ना दो-दो एक्टिंग स्कूल चला रहे हैं, जहां हर उस बच्चे और शख्स को ट्रेनिंग दी जाती है जो एक्टर बनने का सपना देखता है। इसके अलावा मुकेश खन्ना ने उस एक्टिंग स्कूल में भी तीन महीने का एक्टिंग कोर्स शुरू करवाया है जिससे उन्होंने खुद एक्टिंग के गुर सीखे।
एक वक्त ऐसा था जब मुकेश खन्ना की लोकप्रियता चरम पर थी।


उनके निभाए किरदार खूब लोकप्रिय हुए और आज भी लोग उन किरदारों को याद करते हैं..फिर चाहें वो भीष्म पितामह का किरदार हो, शक्तिमान का या फिर आर्यमान..प्रत्येक किरदार में मुकेश खन्ना ने अलग ही जान डाल दी। शक्तिमान के किरदार ने मुकेश खन्ना को अपार शोहरत और लोकप्रियता दी। पर वक्त के साथ मुकेश खन्ना का स्टारडम कम होता गया और वो स्क्रीन से एकदम गायब हो गए।

गुरमीत चौधरी ने महाराष्ट्र के नागपुर में गरीबों और मिड‍िल क्लास लोगों के लिए ‘आस्था’ नाम का एक कोविड हॉस्पिटल खोला है।

ढेर सारी फिल्मों के नायक और टीवी सीरियल में भगवान राम के किरदार निभाने वाले एक्टर गुरुमीत चौधरी, रियल लाइफ में भी असली हीरो बनके देश के सामने आए हैं। गुरमीत चौधरी ने महाराष्ट्र के नागपुर में गरीबों और मिड‍िल क्लास लोगों के लिए ‘आस्था’ नाम का एक कोविड हॉस्पिटल खोला है।


गुरुमीत चौधरी
गुरमीत चौधरी कहते हैं- ‘अभी कुछ महीनों पहले मेरे एक मीडिया मित्र ने मुझसे कोविड से जुड़ी एक मदद मांगी थी, उसकी मदद करने के लिए जब अपने सोशल मीडिया का सहारा लिया तो मुझे पता चला कि कोरोना की वजह से देश में हालात कितने ज्यादा खराब चल रहे हैं। तब मैंने लोगों की मदद करने की ठानी।"

गुरमीत कहते हैं कि ‘ये लोगों के प्यार की वजह से जिंदगी में कलाकार के रूप में सफल हो पाए और अब मेरी बारी है देश के लोगों के लिए कुछ करने की इसलिए मैंने नागपुर शहर में डॉक्टर सैयद वजहाताली और उनकी टीम के लिए कोविड हॉस्पिटल खोला है और दूसरे शहरों में भी कोविड हॉस्पिटल खोलने की तैयारी में लगा हूं और ईश्वर की कृपा रही तो जल्द ही दूसरे शहरों में भी कोविड हॉस्पिटल खुल जाएंगे।

इस्लाम में ईद साल में दो बार मनाई जाती है। जिसमें से ये पहली ईद है

रमजान महीना खत्म होने के बाद मुसलमान ईद उल-फितर का पर्व मनाते हैं। इस त्योहार को सभी धूमधाम से मनाते हैं और खुदा से सुख-शांति और बरक्कत की दुआएं मांगते हैं। इसमें ईद का चांद दिखने के अगले दिन ये पर्व मनाया जाता है। इस बार ये त्योहार 13 या 14 मई को मनाया जा सकता है। अगर चांद 12 मई को दिखाई देता है तो ईद 13 मई को होगी और अगर 13 मई को चांद दिखता है तो ये 14 मई को मनाया जाएगा।


ईद मनाने का कारण: इस्लाम में ईद साल में दो बार मनाई जाती है। जिसमें से ये पहली ईद है और दूसरी ईद बकरीद कहलाती है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार पैगम्बर मुहम्मद ने सन् 624 ईसवी में जंग-ए-बदर के बाद पहली ईद उल-फ़ितर मनायी थी। इसलिए ईद उल फित्र के अवसर पर मुसलमान पूरा एक महीना अल्लाह की इबादत करते हैं और रोज़ा रखते हैं। और दूसरे ईद रमजान के महीने में कुरान की तिलावत करके अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं और रमजान खत्म होने के बाद बड़े हर्ष उल्लास से ईद मनाते हैं।

महत्व: ईद भाई चारे व आपसी मेल को बढ़ाने का त्योहार है। इस दिन लोग एक दूसरे के गले मिलकर ईद की बधाई देते हैं। ईद उल-फितर में ग़रीबों को फितरा दिया जाता है। जिससे ग़रीब लोग भी अपनी ईद मना सकें, नये कपडे पहन सकें। रोजे की समाप्ति के बाद ईद के दिन मुसलमान अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं। इनके ईद के त्योहार का सबसे महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ सेवई है।

ईद के दिन सुबह से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। और ईद में मस्जिदों में सुबह की प्रार्थना करने से पहले हर मुसलमान को दान देना होता है, जिसे ज़कात उल-फ़ितर कहते हैं।

सोमवार

कोरोना की दूसरी लहर में तेज़ी आने के साथ साथ खाने के चीजों के दाम में भी तेजी

कोरोना की दूसरी लहर में तेज़ी आने के साथ साथ खाने के चीजों के दाम में भी तेजी आनी शुरू हो गई है। इस साल फरवरी से मई तक दलहन और तिलहन के दाम 15 से 30 फीसदी तक बढ़ गए। ये बढ़ोतरी खुदरा और थोक दोनों मंडियों में हुई है। अप्रैल में जैसे जैसे कोरोना बढ़ रहा था, मार्केट में रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ रहे थे।






सरसों का तेल 50-75 रुपये हुआ महंगा

अभी तिलहन और दलहन की कीमत में 15 से 30 रुपये प्रति किलो/ लीटर तक का उछाल आया है। इसलिए सरसों तेल और रिफाइंड 50 से 75 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए। यही हाल दालों का भी है। दाल की कीमत में भी 40 से 50 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।

बड़ी कंपनियों के रिटेल प्राइस भी बढ़े

अचानक महंगाई से न सिर्फ रसोई का बजट गड़बड़ा गया है बल्कि आम लोगों पर भी महंगाई की मार पड़ रही है। टाटा चाय का 250 ग्राम का जो पैकेट फरवरी-मार्च में 85 रुपये का था, अब वो 125 रुपये में मिल रहा है।

जमाखोरी के कारण कीमत बढ़ी

ज्यादातर हरी सब्जी 50 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिक रही हैं। कोरोना के बढ़ते संकट के बीच बाजार में अस्थिरता आई है। आम लोग से लेकर खुदरा बाजार तक में खाद्य पदार्थों का स्टॉक कम होने लगा है। इस कारण भी कीमतों में उछाल आई है।

अनुज चौधरी को चुलबुल पांडेय के नाम से लोग बुलाते हैं, काफी बड़े कुख्यात बदमाशों की गिरफ्तारी करवाई।

आइये आज हम आपको बताते हैं एक ऐसे व्यक्ति की कहानी जिन्होंने अपने देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। और अपनी पुलिस सेवा के दौरान अपने कार्यों से जबरदस्त लोकप्रियता हॉसिल की। आज देश में इन्हें एक रीयल हीरो के रूप में जाना जाता है। किसी ने सच कहा है पूत के पांव पालने में नजर आ जाते है" यह कहावत बिल्कुल ठीक है।


Anuj kumar Chaudhary
Anuj Chaudhary

ये हैं उत्तर प्रदेश के पहलवान अनुज कुमार चौधरी, जिन्होंने कुश्ती में अपनी पहचान बनाई और ये सपना उनके दादा श्री बलजीत सिंह जी का था जो उन्होंने पूरा कर दिखाया। अनुज कुमार चौधरी उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर के छोटे से गांव बढेरी के रहने वाले हैं। अनुज कुमार चौधरी का जन्म 5 अगस्त 1980 को हुआ। महज 11 वर्ष की उम्र से अनुज कुश्ती खेलने लगे और उत्तर प्रदेश की शान बन गये।

पहली बार उत्तरप्रदेश राज्य से कोई पहलवान रास्ट्रीय स्तर पर अपने जोश, फुरती और सुन्दरता के लिए जाना जा रहा था। क्राइम कैपिटल कहा जाने वाला मुजफ्फरनगर अब पहलवान अनुज के नाम से जाना जाने लगा था।

उन्होंने छोटे से गांव से निकल कर देश-प्रदेश और अपने मुजफ्फरनगर को अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर सम्मान दिलाया। इसी क्राइम कैपिटल ने यूपी को एक ऐसा DSP दिया है, जिन्होंने मुजफ्फरनगर के साथ-साथ भारत का भी नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रौशन किया।



कुश्ती जगत में आगमन

दरअसल अनुज के करियर की शुरुआत कुश्ती से हुई थी। 11 साल की उम्र से ही अनुज ने कुश्ती करना शुरु कर दिया था। उनके दादा चोधरी बलजीत सिंह उन्हें बड़े पहलवान के रूप में देखना चाहते थें। और दादा जी का सपना पूरा करने के लिए अनुज ने मेहनत और लगन की। अपनी मेहनत और लगन से अनुज ने 1996 से लेकर 2010 तक, लगातार एक के बाद एक गोल्ड मेडल देश के लिए जीते। अनुज 2002 के कॉमनवेल्थ गेम्स में इंग्लैंड के मैनचेस्टर में खेल की सुर्खियों में आए, जहाँ उन्होंने 84 किग्रा के डिवीजन में एक रजत पदक जीता।


इसके बाद उन्हें 1998 में रेलवे में टीटी के पद पर नियुक्ति किया। लेकिन अनुज को टीटी की नौकरी अच्छी नहीं लगी और उन्होंने सन 2000 में नौकरी छोड़ दी और यूपी पुलिस मे सब इंस्पेक्टर बन गए और साल 2002 में इंस्पेक्टर बना दिया गया।

ऐसे ही अनुज 2012 में DSP बन गए। ज्यादातर लोगों ने उत्तर प्रदेश की पुलिस को विवादों में होने की खबरें देखीं होंगी । मगर उत्तर प्रदेश पुलिस में कई ऐसे भी पुलिस कर्मी हैं जिन्होंने अपने काम को बखूबी निभाया और प्रदेश और देश का नाम रोशन किया। अनुज को देश की जूनियर रेस्लिंग टीम का चीफ भी नियुक्त किया गया ।



अनुज बने चुलबुल पांडे

नोएडा में तैनाती के दौरान अनुज को लोग चुलबुल पांडे के नाम से बुलाते थें। ऐसा नाम उनको इसलिए दिया गया क्योंकि उन्होने सुंदर भाटी और सिंह राज जैसे बदमाशों को गिरफ्तार किया था। इसके साथ ही अनुज ने कई कुख्यात बदमाशों को भी गिरफ्तार किया।

इसके बाद जब अनुज की पोस्टिंग नोएडा में हुई, तो उन्होने यहां के इलाको में कानून व्यवस्था को सही किया। लोगों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति भी दिलाई। इनके द्वारा कसवाई हुई रस्सी आज भी दादरी मंडी में वैसे की वैसे ही है। वहीं नोएडा के भट्टा पारसौल गांव के किसान विवाद के दौरान अनुज जी को दनकौर थाने का SHO नियुक्त किया गया था।

दादा का सपना पूरी लगन से किया पूरा

उनके दादा उन्हें बड़े पहलवान के रूप देखना चाहते थे और दादा का सपना पूरा करने के लिए अनुज ने रेस्लिंग को अपना लिया और एक के बाद एक गोल्ड मैडल जीतते रहे ।

अनुज ने 1996 से लेकर 2010 नेशनल लेवल पर लगातार गोल्ड मैडल जीते और अपने स्पोर्ट की बदौलत अनुज को 1998 में रेलवे ने टी टी की पोस्ट पर नियुक्त किया । जिसके बाद अनुज चौधरी ने इस नौकरी से सन् 2000 में स्तीफा दे दिया और उत्तर प्रदेश पुलिस में S I (सब इंस्पेक्टर) की पोस्ट पर ज्वाइन किया। जिसके बाद उन्हें आउट और टर्न प्रमोशन दिया गया और अनुज चौधरी को 2002 में इन्स्पेक्टर बना दिया गया।

जिसके बाद उन्हें 2005 में अनुज चौधरी को अर्जुन अवार्ड दिया गया और फिर अनुज चौधरी को 2012 में प्रमोशन मिला और उनको DSP बना दिया गया । इस तरह से अनुज चौधरी ने अपने दादा का सपना पूरा किया और देश प्रदेश के साथ साथ उत्तर प्रदेश पुलिस का नाम भी रोशन किया।




अनुज चौधरी का बदमाशों में ख़ौफ़

नोएडा में पोस्टिंग के दौरान अनुज चौधरी को चुलबुल पांडेय के नाम से लोग बुलाते थे काफी बड़े कुख्यात बदमाशों की गिरफ्तारी करवाई। अनुज की तैनाती जब नोएडा का थाना फेज़-2, में CO की पोस्ट पर रहे तो उन इलाको में उन्होंने कानून व्यवस्था बहुत अच्छे से बनाई। दनकौर और दादरी में तैनाती के दौरान अनुज ने ना केवल अपराधियों को गिरफ्तार किया बल्कि इन कस्बों को जाम मुक्त भी करवा दिया था।



राष्ट्रीय पुरस्कार

2002 लक्ष्मण पुरस्कार (उत्तर प्रदेश सरकार)

2005 में राष्ट्रपति द्वारा अर्जुन अवॉर्ड ​भारत सरकार

2010 मान्यवर काशीराम पुरूष्कार – UP

2016 में उप्र सरकर द्वारा यश भर्ती सम्मान – UP

2016 भारत गौरव पूरूष्कार – National

दोबार भारत कुमार टाइटल 1996-1997

तीनबार शेर-ए-हिंद टाइटल 1999-2000-2001

नासिक भारत अभिमन्यु टाइटल 2001

गुरु हनुमान टाइटल दिल्ली 2001

दोबार यूपी टाइटल 2000-2003

दिल्ली केसरी टाइटल 2004

यूपी केसरी टाइटल 2005

81 किलो ग्राम 7 जूनियर नेशनल फ्री स्टाइल रेस्लिंग चैंपियनशिप पुणे (महाराष्ट्र) 1996 (स्वर्ण पदक)

85 किलो ग्राम आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी रेस्लिंग चैंपियनशिप हापुड़ (यू पी) 1996 (स्वर्ण पदक)

81 किलो ग्राम 18 जूनियर नेशनल एफएस रेस्लिंग चैंपियनशिप चित्तौड़गढ़ (राज)1997 (स्वर्ण पदक)

76 किलो ग्राम 44 सीनियर एफएस रेस्लिंग चैंपियनशिप हैदराबाद (ए पी) 1997 (स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम एस एफ 53 नेशनल सीनियर रेस्लिंग कॉम्पिटिशन निधनी (हरयाणा) 31.3.2006 से 3.4.2007में (स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम 54 आल इण्डिया पुलिस गेम दिल्ली बीएसएफ 19 से 23 दिसंबर 2005 (स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम 49 सीनियर नेशनल रेस्लिंग चैंपियनशिप रांची (झारखंड) 2003 (स्वर्ण पदक)

96 किलो ग्राम पांच के डी जाधव फेडरेशन कप रेस्लिंग चैंपियनशिप रोहा (मुंबई) (स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम फ्री स्टाइल नेशनल रेस्लिंग चैंपियनशिप पूरी (उड़ीसा) 2003 (स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम 5 आल इंडिया पुलिस गेम्स भवानी (हरि) 2002 (स्वर्ण पदक)

ग्राम 32 नेशनल गेम्स हैदराबाद (ए पी) 2002 (स्वर्ण पदक)

85 किलो ग्राम नेशनल गेम्स जालंधर (पंजाब) 2001 (स्वर्ण पदक)

85 किलो ग्राम 18 सीनियर नेशनल रेस्लिंग चैंपियनशिप निडानी (हरयाणा) 2001 (स्वर्ण पदक)

85 किलो ग्राम 50 आल इंडिया पुलिस गेम्स छावला कैंप नई दिल्ली 2001 (स्वर्ण पदक)

85 किलो ग्राम 47 नेशनल सीनियर एफ एस रेस्लिंग चैंपियनशिप अमरबती (महाराष्ट्र) 2000 (स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम इंडिया पुलिस गेम्स दिल्ली सीआरपीएफ 2007 में (रजत पदक)


अंतर्राष्ट्रीय खेल उपलब्धियां

एशिया चैंपियनशिप ओहन चाइना 2005 (रजत पदक)

कॉमनवेल्थ गेम्स कनाडा 2005 (स्वर्ण पदक )

कॉमनवेल्थ गेम्स साउथ अफ्रीका 2006 (स्वर्ण पदक )

84 किलो ग्राम फ्री स्टाइल कॉमन वेल्थ गेम्स में 2010 नई दिल्ली में रजत पदक

84 किलो ग्राम फ्री स्टाइल कॉमन वेल्थ रेस्लिंग चैंपियनशिप 5 से 6 जुलाई 2003 लंडन अंटोरिया (कनाडा)(स्वर्ण पदक)

84 किलो ग्राम फ्री स्टाइल सीनियर एशिया रेस्लिंग चैंपियनशिप 3 से 7 मई 2009 थाईलैंड में (कांस्य पदक)

84 किलो ग्राम ग्रीसो रोमन वर्ल्ड पुलिस गेम्स हेल्प स्पेन 27 से 3 अगस्त 2003 में(रजत पदक)

84 किलो ग्राम एफ एस दिव्तीय ओलम्पिक क्वालीफाई रेस्लिंग चैंपियनशिप सोफिया ल्गारिया) दिनांक 14 से 15 फरवरी 2004 में (कांस्य पदक)

84 किलो ग्राम एफ एस कनाडा कप अंतर्राष्टीय रेस्लिंग चैंपियनशिप गोल्फ अंटोरिया (कनाडा)दिनांक 11 से 12 जुलाई 2003 में (रजत पदक)

84 किलो ग्राम एफ एस वर्ल्ड पुलिस गमेस स्पेन दिनांक 27 से 3 अगस्त 2003 में (रजत पदक)

76 किलो ग्राम ग्रांड प्रिक्स इब्राहिम मुस्तफा रेस्लिंग चैंपियनशिप काहिरा (मिस्र) दिनांक 28 से 30 अप्रैल 1998 में (रजत पदक)

85 किलो सेफ गमेस काठमांडू (नेपाल) दिनांक 25 से 4 अक्टूबर 1999 में (स्वर्ण पदक)

76 किलो ग्राम एफ एस अंतर्राष्ट्रीय टहकति कप रेस्लिंग चैंपियनशिप तेहरान (ईरान) दिनांक 16 से 20 फरवरी 1998 में चतुर्थ स्थान

76 किलो ग्राम एफ एस कॉमनवेल्थ रेस्लिंग चैंपियनशिप पुणे महाराष्ट्र दिनांक 6 से 8 मार्च 1997 में (स्वर्ण पदक)


Anuj Chaudhary With Honrable PM Narendra Modi

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं गृहमंत्री श्री अमित शाह जी का कश्मीर से धारा 370 हटाने के लिए बहुत बहुत आभार।अब निश्चित ही वहां के हर घर और हर युवा का १००% विकास होगा। यह कश्मीर के सुनहरे भविष्य की शुरुआत हुई है। सभी देशवासियों को इसके लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं। जय हिन्द

 अनुज चौधरी
DYSP UP Police
Olympian, Arjun Awardi wrestler
Asia, Commonwelth Champian



Anuj Chaudhary

ठोकरें अपना काम करेंगी, तू अपना काम करता चल
वो गिराएगी बार बार तू उठकर के फ़िर से चलता चल

anuj Chaudhary

मिल ही जाएगी मंजिल भटकते भटकते, गुमराह तो वो हैं जो घर से निकले ही नहीं!


इंसान का सबसे बेहतरीन साथी, उसकी सेहत है अगर उसका, साथ छूट जाए तो वह हर रिश्ते के लिए बोझ बन जाता है।
सेहतमंद रहे मस्त रहे सुप्रभात



सफलता हमेशा अकेले में गले लगाती है .! लेकिन असफलता हमेशा आपको सबके सामने तमाचा मारती है ..! यही जीवन है



सिर्फ उतना ही विनम्र बनो जितना जरुरी हो बेवजह विनम्रता दूसरों के अहम को बढ़ावा देती है


आत्म विश्वास और कड़ी महेनत, असफलता नामक बीमारी को मारने के लिए सबसे बढ़िया दवाई है,
ये आपको एक सफल व्यक्ति बनाती है


खाकी चैलेंज!

डर से मर जाने से बेहतर है जीत की कोशिश में मर जाना।

पुराने घरों और इमारतों से निकलने वाली सालों पुरानी लकड़ी की चीजों को फिर से इस्तेमाल करके, नया फर्नीचर और नयी उपयोगी चीजे बनाते हैं

जब भी लोग अपने घर, या दफ्तर के लिए फर्नीचर बनवाते हैं तो वह नयी और अच्छी लकड़ियों से बना फर्निचर चाहते है। ग्राहको का सबसे पहला सवाल भी यही रहता हैं कि फर्नीचर किस लकड़ी का बना है। हर किसी को बहुत सोच-समझकर फर्नीचर लेना चाहिए। क्योंकि हम पहले ही लकड़ियों के लिए, जंगलों को काफी नुकसान पहुंचा चुके हैं। ये बात 32 वर्षीय समरान अहमद का कहना है।




समरान अहमद, कर्नाटक के मंगलौर के रहने वाले है और फर्नीचर बनाने का काम करते हैं। उनकी सबसे खास बात यह है कि वह फर्नीचर बनाने के लिए, पुरानी और इस्तेमाल हो चुकी लकड़ियों का ही दुबारा इस्तेमाल करते हैं। पुराने-जर्जर हो चुके घरों और इमारतों को ध्वस्त करने के बाद, जो लकडियां या अन्य सामान मिलता है, उन्हीं लकड़ियों का इस्तेमाल वो फर्नीचर बनाने के लिए करते हैं।

समरान अहमद का परिवार पिछले 40 सालों से इस काम से जुड़ा हुआ है। उनको पुराने और जर्जर हो चुके घरों को तोड़ने का काम मिलता है। इसलिए उन घरों या इमारतों से, जो भी दरवाजे, खिड़कियाँ, लकड़ी के तख्ते या अन्य कोई चीज निकलती है, उन्हें वो खरीद लेते हैं। पहले उनके पापा इन सभी चीजों को दूसरे ग्राहकों को बेच दिया करते थे। लेकिन, अब अहमद इन सभी चीजों का यूज करके अलग-अलग तरह के फर्नीचर बनाते हैं।

समरान ने बिज़नेस मैनेजमेंट में ग्रैजुएशन किया है। कुछ साल दुबई में नौकरी करने के बाद भारत वापिस लौट आए। उनकी फर्म का नाम SAFA ENTERPRISES ECO WOOD SOLUTIONS है। उनके फर्म में चीजों को रिड्यूज, रीयूज और रीसाइकल का काम होता है।

पर्यावरण के लिए बेहतर कदम:

उन्हें जो भी पुरानी लकडियां मिलती है, उन्हें इकट्ठा करके अपने यहां ले आते हैं और उनके कारीगर सभी लकड़ियों के खराब हिस्से को अलग कर, अच्छे से साफ करते हैं। फिर जो अच्छी लकड़ियां बचती हैं, उन्हें इस्तेमाल करते है।

उन्हें जो लकड़ी की पट्टियां या तख्ते मिलते हैं,उन्हे नया फर्नीचर बनाने में इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा दरवाजे और खिड़कियाँ थोड़ी-बहुत मेहनत करके ठीक करते हैं। साथ ही पुरानी चीजों को नया रूप देते हैं। उन्होंने अपने एक ग्राहक के कैफ़े के लिए पुरानी खिड़कियों से मेज बनाई थी।

वो लाई हुई पुरानी लकड़ियों से लोगों के घरों के लिए खिड़कियाँ, दरवाजे, अलमारी और अन्य फर्नीचर बनाते हैं। बहुत से लोगों को लगता है कि पुरानी लकड़ियों से बनी चीजें, ज्यादा नही चलती। लेकिन, ऐसा नहीं होता, लकड़ी जितनी ज्यादा पुरानी होती है, उतनी ही अच्छी होती है। आजकल पुरानी लकडियाँ मिलना बहुत ही मुश्किल है अगर पहले से इस्तेमाल हो चुकी लकड़ियों को फिर से इस्तेमाल करें, तो यह सस्ती होने के साथ-साथ ज्यादा समय तक चलती भी हैं। ऐसे पेड़ों की कटाई भी थोड़ी कम होगी।

ग्राहकों के लिए #DIY का मौका:

अहमद अपने ग्राहकों के इच्छा अनुसार काम करते है। आजकल #DIY का ट्रेंड है। लोगों के पास बहुत सारे आईडिया भी होते हैं, लेकिन साधनों की कमी होती है। इसलिए वो ग्राहकों के आईडिया के हिसाब से काम करके देते हैं।

समरान कहते हैं कि फर्नीचर बनाते समय, वह कम से कम कचरा निकलने पर ध्यान देते हैं। वह इको-फ्रेंडली तरीकों से काम करते है। अभी उनके साथ 11 कारीगर काम कर रहे हैं। समरान उन्हें ग्राहकों की जरूरत और आईडिया के बारे में समझाते हैं। और कारीगर सभी आईडिया को बहुत ही अच्छे तरीकों से हकीकत में बदल देते हैं।

वह साल भर में, लगभग 600 टन पुरानी लकड़ियों को फिर से इस्तेमाल में लेते हैं। उनको ये नहीं पता की वो पर्यावरण की कितनी मदद कर पा रहे हैं। लेकिन, इतना अंदाजा जरूर है कि अगर कोई फर्नीचर बनवाने के लिए कम से कम तीन पेड़ कटेंगे। इसलिए हर साल कितने सारे पेड़ कटते होंगे। लेकिन, अगर हम फिर से पुरानी लकड़ियों का इस्तेमाल करें, तो बहुत सारे पेड़ों को कटने से बचा सकते है।

प्रेरणादायीं और सूझ बूझ के धनी कर्मठ स्वयंसेवक श्री ओम प्रकाश जी पारीक एडवोकेट

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ग्रहस्थ स्वयंसेवकों की श्रंखला में बाबूजी श्री ओम प्रकाश जी पारीक का जन्म सन 1927 में होली की धूल वाले दिन राजस्थान के मंडावर कस्बे के पास के गांव गढ़ हिम्मत सिंह में हुआ था।

बाबूजी ने मथुरा के किशोरी रमन इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की, पिताजी श्री पं.बनवारी लाल जी पारीक मथुरा में घी की आढ़त का कार्य करते थे।


श्री ओम प्रकाश जी पारीक
श्री ओम प्रकाश जी पारीक


मथुरा में पढ़ाई के समय ही बाबूजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे और कुशक गली स्थित संघ कार्यालय केशव दुर्ग की भूमि खरीदने तथा उसका विवाद सुलझाने में अन्य स्वयंसेवको के साथ ही बाबूजी की भी महत्व पूर्ण भूमिका रही थी ।

बाबूजी घोष के वादक थे तथा पड़व के वादक थे। और पड़व बजाना बाबूजी ने संघ के उस समय के जिला प्रचारक श्री कृष्ण चन्द्र गांधी जी से सीख था ।संघ कार्यलय पर जब छोटे कैलाश जी ने घोष का कार्य सँभाला तब देखा बाबूजी का बड़ा और भारी पड़व कार्यालय पर रखा है तब कैलाश जी भाई साहब उसे लेकर मेरठ गए और उसके दो छोटे आनक बनवा कर लाये थे।

मथुरा से इंटरमीडिएट करने के बाद उन्होंने जयपुर जाकर राजस्थान यूनिवर्सिटी से बीकॉम. एमकॉम. तथा एल एल बी. की शिक्षा प्राप्त की तथा जयपुर में पढ़ाई के साथ -साथ जयपुर नगर प्रचारक के रूप में संघ कार्य में सक्रिय रहने लगे ।

माननीय श्री लालकृष्ण जी आडवाणी उस समय जयपुर के जिला प्रचारक थे ,जयपुर में बाबूजी के घनिष्ठ मित्रों में श्री सतीश चंद जी अग्रवाल जो केंद्र में जनता पार्टी की सरकार के समय वित्त राज्य मंत्री रहे तथा कई बार विधायक भी रहे थे ,श्री भंवर लाल जी शर्मा जो कि राजस्थान में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे जनता एवं पार्टी की सरकार में शिक्षा मंत्री रहे तथा श्री सुंदर सिंह जी भंडारी एवं श्री अटल जी के सचिव रहे श्री शिवकुमार जी पारीक से भी निकट संबंध बाबूजी के रहे ।

जब 1948 में संघ पर प्रथम प्रतिबंध लगा तब किसी मुखबिर ने पुलिस को सूचना दे दी की बाबूजी जहां संघ के नगर प्रचारक हैं और बाबूजी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया तब उन्हें कारावास भी झेलना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कुछ समय जयपुर में अकाउंट ऑफिस में नौकरी भी की लेकिन जल्द ही नौकरी से त्यागपत्र देकर बाबूजी अपने पिताजी के पास मथुरा आ गए।

क्योंकि बाबूजी ने वकालत की पढ़ाई कर रखी थी इसलिए मथुरा में सन 1955 में उन्होंने श्री केदारनाथ जी गुप्ता एडवोकेट के जूनियर के रूप में भी कार्य किया 1957 से उन्होंने स्वतंत्र वकालत प्रारंभ कर दी मथुरा में बाबूजी के साथी मित्रों में श्री बांके बिहारी जी माहेश्वरी, श्री राधा कृष्ण जी खंडेलवाल ,श्री हरि गुरु, श्री चीते गुरु, श्री नवनीत लाल जी शर्मा कातिब ,श्री राम बाबू जी भाटिया, श्री गोपाल जी अग्रवाल एडवोकेट जो कि मथुरा नगर पालिका अध्यक्ष बाबू रामेश्वर दास जी के छोटे भाई थे ,तथा अन्य स्वयंसेवकों से भी बाबूजी की घनिष्ठता रहती थी ।

तीनों स्वयंसेवक तथा तीनों वकीलों की तिकड़ी मथुरा में मशहूर है जिनमें श्री बांके बिहारी जी माहेश्वरी, श्री राधा किशन जी खंडेलवाल, और श्री ओम प्रकाश जी पारिक तीनों ही वरिष्ठ वकीलों में आज भी जाने जाते हैं । परंतु स्वयंसेवक के तौर पर तीनों का व्यवहार नम्र और अपनत्व लिए रहा है ।

बाबूजी ब्रज बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष रहे ,जनसंघ के नगर अध्यक्ष रहे, मथुरा बार एसोसिएशन के दो बार सचिव तथा एक बार अध्यक्ष रहे, वकीलों और जजों के बीच भी वरिष्ठ होने के कारण बाबूजी का सभी बहुत सम्मान करते थे सन 1978 में बाबूजी दीवानी के D. G .C. भी रहे ।मथुरा नगर पालिका के कई वर्ष तक वकील रहे वृन्दावन नगरपालिका के भी वकील रहे ,नेशनल टैक्सटाइल कॉरपोरेशन मुंबई के वकील रहे तथा कई बड़ी बैंकों के वकील के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान की थीं।

बाबूजी के चार पुत्र हैं जिनमें बड़े पुत्र श्री अशोक जी पारीक अच्छे वकील है और बाबूजी के समय से ही वकालत करते हैं, संघ के स्वयंसेवक हैं तथा भारतीय जनता युवा मोर्चा के 1984 से 1986 तक नगर अध्यक्ष रहे तथा 1986 से 1992 तक जिला अध्यक्ष के रूप में कार्य किया काश्मीर गई एकता यात्रा में भाग लिया और भाजपा तथा संघ के कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं।

दूसरे पुत्र श्री अरुण जी पारीक संघ के तृतीय वर्ष प्रशिक्षित कार्यकर्ता थे और संघ के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया था तथा संघ के शिक्षा वर्ग में गण शिक्षक की भूमिका में रहते थे । श्री अरुण जी भाई साहब श्री कृष्ण चन्द्र गांधी विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के अध्यक्ष भी रहे थे, श्रीडॉ. कृष्ण गोपाल जी व श्री रामलाल जी वर्तमान में संघ के अखिल भारतीय सह -संपर्क प्रमुख से श्री अरुण जी भाई साहब की निकटता अधिक रहती थी। ईश्वर के विधान के आगे मनुष्य कुछ नहीं कर सकता और 9 जुलाई सन 2018 को श्री अरुण जी भाई साहब का ब्रेन हेमरेज होने के कारण गुरूग्राम में स्वर्गवास हो गया जो बेहद दुखद विषय है और संघ परिवार के सभी स्वयंसेवक इस घटना से स्तब्ध रह गए थे।

तीसरे पुत्र श्री राजेश जी पारीक यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी में मथुरा में अधिकारी रहे हैं। यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी में बतौर एक विकास अधिकारी के रूप उनकी एक अलग ही पहचान रही है।

चौथे और छोटे पुत्र श्री राजीव जी पारीक गोलू जी के नाम से प्रसिद्ध हैं और संघ के घोष वादक हैं। संघ शिक्षा वर्ग द्वितीय वर्ष प्रशिक्षित है तथा श्री रवींद्र जी पांडेय के नगर पालिका अध्यक्ष कार्यकाल में अपने क्षेत्र से सभासद रहे हैं।
बाबूजी की पुत्री मंजू पारीक राष्ट्र सेविका समिति की सक्रिय कार्यकर्ता रही है।

आपातकाल में बाबूजी का घर संघ की गतिविधियों का केंद्र रहता था सभी प्रचारक बंधु वहाँ आकर रुकते थे एवं बाहर से पढ़ाई के लिए आने वाले स्वयंसेवक भी बाबूजी के घर मे रहते थे।

कहने का तात्पर्य है कि बाबूजी का पूरा परिवार जन्म से स्वयंसेवक परिवार है और बाबू जी की तीसरी पीढ़ी के परिवार के सदस्य भी संघ के स्वयंसेवक हैं और संघ परिवार के विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागी होते हैं।

बाबूजी एक वाक्य हमेशा बोला करते थे "हारिये न हिम्मत, बिसारिये न राम" और 11 सितंबर 2008 को ऐसा संघर्ष शील स्वयंसेवक सदा के लिये अपनी अमिट छाप छोड़कर इस लोक से चला गया।

रविवार

सीएम का बड़ा ऐलान: यूपी में कोरोना कर्फ्यू की समयसीमा बढ़कर हुई 17 मई

यूपी में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू की समयसीमा बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। अब सीएम योगी आदित्यनाथ ने  लॉकडाउन 17 मई सुबह सात बजे तक के लिए बढ़ा दिया गया। पहले सोमवार 10 मई तक ये पाबंदिया लागू की गईं थी


यूपी सरकार ने एक और आदेश जारी किया था, जिसमें औद्योगिक गतिविधियों, मेडिकल या आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति, आपात चिकित्सा वाले व्यक्ति और दूरसंचार, डाक सेवा, आवश्यक वस्तुओं का परिवहन, ई-कॉमर्स सेवाएं, , प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया सेवा के क्षेत्र से जुड़े लोगों को ई-पास लेने की जरूरत नहीं होगी।

यूपी में कोरोना का कहर अभी थमा नहीं है. हालांकि, प्रदेश में जारी लॉकडाउन की पाबंदियों के बीच कोविड केसेज में लगातार कमी आ रही है। वहीं कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है।

शनिवार

पांच कृषि आधारित व्यवसायों के बारे में बता रहे हैं, जो किसान भाई अपने खेतों पर शुरू कर सकते हैं।

आज के जमाने में किसानों के लिए कृषि से जुड़े और भी साधन होना बहुत जरूरी है। ताकि, अगर उन्हें किसी कारन अपनी फसल से अच्छी कमाई न मिले, तो उनके पास कमाई का कोई दूसरा रास्ता हो। किसानों की आय को अच्छी करने के लिए, कृषि विभाग द्वारा कई तरह की योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। किसानों को सौर ऊर्जा से लेकर तालाब खुदवाने के लिए भी सरकार से सब्सिडी मिल रही है।

 

लेकिन कुछ ऐसे काम भी हैं, जो किसान खुद कम से कम लागत में शुरू कर सकते हैं और अच्छी आमदनी कर सकते हैं। किसान इन्हें अपने खेतों पर ही शुरू कर सकते हैं। 

पांच कृषि आधारित व्यवसाय-

1. वर्मीकंपोस्टिंग यूनिट(केंचुआ खाद)

आजकल वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) की बाजार में अच्छी मांग है।  आजकल बहुत से किसान जैविक खेती से जुड़ना चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें ज्यादा मात्रा में केंचुआ खाद की जरूरत पड़ती है। छोटे किसानों को केंचुआ खाद तैयार करना आसान होता है। लेकिन, बड़े किसान, खाद ज्यादातर बाजार से ही खरीदते हैं। इसलिए किसान चाहे, तो अपने खेतों पर ही 15-20 हजार रुपए में वर्मीकम्पोस्टिंग यूनिट शुरू कर सकते हैं और अगर कोई किसान सही ट्रेनिंग लेकर, सही तरीके से वर्मीकम्पोस्टिंग यूनिट शुरू करता है, तो अच्छा मुनाफा कमा सकता है।

2. मशरूम:

मशरूम खाने में जितना अच्छा और हेल्थी होता है, इसकी खेती उतनी ही आसान है। किसान इसे अपने खेतों में या घर में, छोटी-बड़ी शेड लगाकर उगा सकते हैं। मशरूम में जल्दी उत्पादन मिलता है और इसकी बाजार में काफी अच्छी डिमांड भी है। 

मशरूम की खेती करने वाले किसान को ‘कृषि विज्ञान केंद्र’ से मशरूम की खेती की ट्रेनिंग लेनी चाहिए, क्योंकि, इस काम के लिए सही ट्रेनिंग लेना बहुत जरूरी है। इसके बाद खेती के साथ-साथ, कम से कम लागत में मशरूम की खेती शुरू कर सकते हैं। 

3. मोती पालन:

किसानों को अपने खेतों में तालाब खुदवाने के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी दी जा रही है और वो इस योजना का फायदा उठाकर अपने खेतों पर ही सामान्य खेती के साथ-साथ, तालाब में मोती पालन भी शुरू कर सकते हैं। तालाब की क्षमता के अनुसार इसमें सीप डाले जा सकते हैं। एक सीप से दो मोती निकलते हैं और इनकी q के अनुसार, इनकी कीमत 100 से 250 रुपए तक मिल जाती है। ऐसे छोटे से छोटे तालाब से भी किसान अच्छा मुनाफा ले सकते हैं। 

4. नर्सरी:

अगर कोई किसान फल-सब्जियों की अच्छी पौध तैयार कर सकता है, तो उसे अपने खेतों पर नर्सरी का काम भी करना चाहिए। अपने खेतों के लिए सब्जियों के पौधे तैयार करते करते नर्सरी भी तैयार कर सकते हैं। और इन पौधों को आसपास के इलाके के किसानों को बेच सकते हैं। सब्जियों के अलावा, किसान फलों, अन्य पेड़-पौधे जैसे चंदन, महोगनी आदि की नर्सरी भी कर सकते हैं। 

5. प्रोसेसिंग:

प्रोसेसिंग ऐसा व्यवसाय है, जो छोटे-बड़े सभी किसानों को करना चाहिए। जब किसान खुद अपनी उगाई हुई चीजों को प्रोसेस करके बाजार में बेचेंगे, तो उनकी कमाई अपने आप ही बढ़ जाएगी। 

प्रोसेसिंग में काफी मेहनत लगती है, लेकिन इसमें मुनाफा भी ज्यादा है। अगर आप घर पर हाथ से प्रोसेसिंग नहीं कर सकते हैं, तो आप दाल मिल या आटा मिल खोजकर, वहां अपनी उपज को प्रोसेस करा सकते हैं। ऐसा करने से ज्यादा लागत भी नहीं आती और प्रोसेस की हुई चीजों को आप, अपने ब्रांड नाम देकर के ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। 

कंगना रनौत को हुआ कोरोना, कहा- खत्म कर दूंगी इसे

कोरोना वायरस की बढ़ती लहर ने बॉलीवुड के बहुत सारे सेल‍िब्रिटीज को भी अपनी चपेट में ले लिया है। अब एक्ट्रेस कंगना रनौत भी कोरोना की चपेट में आ गई हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट के जर‍िए अपने कोव‍िड टेस्ट की रिपोर्ट पॉज‍िट‍िव होने की बार बताई हैं। उन्होंने अपने हालचाल के बारे में भी बताया है।



कंगना रनौत ने अपनी फोटो शेयर कर कोरोना पॉज‍िट‍िव होने की खबर दी है, जिसमे वो ध्यान में लीन है। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि 'मुझे पिछले कुछ दिनों से थकान और कमजोरी महसूस हो रही थी और आंखों में हल्की जलन भी थी। हिमाचल जाने की सोच रही थी इसल‍िए आज मैंने टेस्ट करवाया तब पता चला कि मैं कोरोना पॉज‍िट‍िव हूं। मैंने खुद को क्वारनटीन कर लिया है।

मुझे अंदाजा नहीं था कि ये वायरस मेरे शरीर के अंदर पार्टी कर रहा है, अब जब मुझे पता चल गया है तो मैं इसे खत्म कर दूंगी। लोगों, प्लीज किसी को भी खुद से जीतने की ताकत ना दें। अगर आप डरे हुए हैं तो ये आपको और भी डराएगा। आइए इस कोव‍िड-19 का खात्मा करें। ये कुछ नहीं बस एक छोटे समय का फ्लू है जिसे बहुत अटेंशन मिली और अब ये लोगों को डरा रहा है। हर हर महादेव'। कोरोना की खबर के बाद कंगना के फैंस ने उनके जल्द ठीक होने की कामना की है।

कुछ दिनों पहले कंगना रनौत के ट्व‍िटर अकाउंट सस्पेंड होने की खबर आई थी। पश्च‍िम बंगाल चुनाव में भड़की हिंसा और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आपत्त‍िजनक ट‍िप्पणी देने के बाद उनके अकाउंट को क्लोज कर दिया गया। इसके लिए कंगना ने नाराजगी भी जताई थी।

कंगना ने ट्व‍िटर सस्पेंशन पर दी सफाई

कंगना ने ANI को ट्व‍िटर सस्पेंशन को लेकर कहा कि- 'ट्व‍िटर ने ऐसा कर के मेरा ही प्वाइंट साबित किया कि वे अमर‍िकी हैं और जन्म से ही श्वेत, अश्वेता पर अपना माल‍िकाना हक समझने लगता है। वे आपको बताना चाहते हैं कि हमें क्या सोचना चाह‍िए क्या बोलना चाह‍िए और क्या करना चाह‍िए। मेरे पास बहुत सारे प्लेटफॉर्म्स हैं जहां मैं अपनी आवाज बुलंद कर सकती हूं. मैं सिनेमा के जर‍िए भी अपनी कला को दिखा सकती हूं। मेरा दिल देश के उन लोगों के लिए टूट जाता है जिन्हें सताया गया, अत्याचार हुए, नौकर बना कर रखा और हजारों सालों तक उनपर पाबंद‍ियां लगा कर रखी गई, इस दुख का कोई अंत नहीं है।'

ट्व‍िटर प्रवक्ता ने बताई वजह

ट्व‍िटर प्रवक्ता ने कंगना के साथ की गई कार्रवाई पर कहा था- हम बहुत क्ल‍ियर थे कि किसी भी ऐसे बर्ताव जो ऑफलाइन तौर पर नुकसान पहुंचाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई करेंगे.l। ट्व‍िटर के नियमों का लगातार उल्लंघन, करने की वजह से उनके ट्व‍िटर अकाउंट को परमानेंटली सस्पेंड कर दिया गया है।

गले में इंफेक्शन होने पर कुचकुचाहट और दर्द जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। इससे छुटकारा पाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

मौसम बदलने के साथ लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी होने लगती हैं। ऐसे ही बदलते मौसम में गले में दर्द और खराश की परेशानी सबसे आम है। लेकिन इस कोरोना काल में सर्दी-खांसी जैसी मामूली परेशानी भी लोगों को डरा रही है। अब गले में दर्द और सूजन को भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ कोरोना का एक लक्षण मानते हैं। गले में इंफेक्शन होने पर कुचकुचाहट और दर्द जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। किसी किसी को भोजन निगलने में दिक्कत होने लगती है। लेकिन इससे छुटकारा पाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल कर सकते हैं।





गले में खराश के कारण:

गले में दर्द और खराश वायरल संक्रमण के कारण होता है। कई बार सर्दी-जुकाम होने पर भी ऐसी परेशानी हो जाती है। इसके अलावा, बैक्टीरियल इंफेक्शन, एलर्जी, पॉल्यूशन, गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स और ज्यादा जोर से चिल्लाने से भी गले में दर्द की समस्या होने लगती है।

घरेलू नुस्खे

काली मिर्च: काली मिर्च में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण पाए जाते हैं जो सर्दी-जुकाम और गले में खराश की परेशानी को दूर करता है। इससे गला साफ होता है और दर्द भी गायब हो जाता है।

शहद: गले की खराश को दूर करने में शहद बहुत ही फायदेमंद है। इसमें एंटी-बायोटिक तत्व पाए जाते हैं। शहद यूज करने से गले की कोटिंग हो जाती है जिससे खराश की परेशानी कम होती है। दिन में 2 बार शहद लेने से गले को आराम मिलता है।

गर्म पानी का गरारा: गले में दर्द और निगलने में परेशानी के लिए रात को सोने से पहले गरारा करना चाहिए। इसके लिए आप दो गिलास पानी को बर्तन में डालकर गैस पर चढ़ाएं, फिर उसमें आधा चम्मच हल्दी और इतने ही मात्रा में सेंधा नमक मिलाएं। 10 मिनट तक उबलने दें और फिर सोने से पहले और सुबह उठने के बाद गरारा करें।

हल्दी वाला दूध: हल्दी दूध एंटी-सेप्टिक के रूप में कार्य करता है, साथ ही ये एक नैचुरल एंटी-बायोटिक भी है। ये गले की खराश, सूजन और दर्द को दूर करता है।

ऐसे Summer Flowering Plants जो गर्मी के मौसम में भी लगाए जाते हैं

रंग-बिरंगे फूल किसे पसंद नहीं होते। खूबसूरत फूलों को देखकर हर किसी का मन खुश हो जाता है। इसलिए वो चाहे बड़ा बागान हो या छोटी सी बालकनी में गार्डन, फूलों को लगाना ज़रूर पसंद करता है। मौसमी फूलों के बहुत से पौधे होते हैं, जिनमें से कुछ में गर्मियों में भी फूल आते हैं।




आज हम आपको ऐसे Summer Flowering Plants के बारे में बताएँगे, जो गर्मी के मौसम में भी लगाए जाते हैं।


1. बेला (Bela):

बेला को अरेबियन जैस्मिन भी कहा जाता हैं। इसको लगाने के लिए जड़ों की जरूरत नहीं पड़ती। इसे कटिंग से भी लगा सकते हैं। लेकिन कटिंग करते समय कटिंग बहुत ज्यादा मोटी नहीं होनी चाहिए और हरे रंग की हो।

-पॉटिंग तैयार करने के लिए, आप बराबर मात्रा में मिट्टी, रेत और गोबर की खाद ले।

-कटिंग को लगाने के लिए डिस्पोजेबल ग्लास या किसी प्लास्टिक की बोतल को काटकर प्लांटर बना लें।

-इस प्लांटर के तले में छेद कर लें, ताकि पानी आसानी से निकल सके।

-प्लांटर में पॉटिंग मिक्स भरें और बेला के पौधा की कटिंग लगा दें।

-कटिंग लगाने के बाद, इसमें ऊपर से पानी डालें लेकिन ध्यान रखें की कटिंग हिले नहीं।

-अब आप प्लांटर को ऐसी जगह रखें, जहां दिनभर हल्की धूप मिलती रहे। ऐसी जगह न रखें, जहां बहुत तेज धूप आती हो।

-10-12 दिन में कटिंग में ग्रोथ दिखने लग जाएगी।

-पानी देते रहें और लगभग एक महीने बाद, आप इसे 12 से 15 इंच के गमले में लगा सकते हैं।

-3-4 महीनों में बेला का पौधा काफी बड़ा हो जाएगा।


2. बोगनविलिया (bougainvillea):

बोगनविलिया फूल कई रंगों के होते हैं। इसके पौधों को कटिंग से लगाना बहुत ही आसान है। बोगनविलिया लगाते समय तापमान का ध्यान जरूर रखें। कटिंग को लगाने का सबसे अच्छा मौसम मानसून होता है।


-कटिंग लगाने के लिए आप बगीचे की मिट्टी ले सकते हैं।

-इसे 12 से 15 इंच के गमले में भर लीजिए।

-इस गमले में तीन-चार कटिंग लगा दीजिए।

-अब गमले में ऊपर से पानी डालें और ऐसी जगह रखें, जहां इस पर बहुत ज्यादा धूप न लगे।

- दो हफ्तों में कटिंग में विकास दिखने लगेगा। अब गमले को धूप में रख सकते हैं।

- रोज पानी देते रहें और ध्यान देते रहें कि कौन-सी कटिंग विकसित हो रही है।

-अगर कोई कटिंग दो-तीन हफ्तों बाद भी बढ़ नहीं रहा, तो आप उसे निकाल दें।

-ढाई-तीन महीने में बोगनविलिया का पौधा अच्छे से बढ़ने लगेगा।


3. पोर्टुलाका (Portulaca):

इस पौधे को कई जगह मोस रोज और गुल-ए-शमा भी कहते हैं। इसमें अलग-अलग रंग के फूल आते है। इसे भी आप कटिंग करके लगा सकतें हैं।

-पोर्टुलाका की कटिंग लगाने के लिए, आप बगीचे की मिट्टी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

- प्लास्टिक के कप में मिट्टी भर लें और तले में एक छेद कर लें।

-कटिंग को मिट्टी में लगा दें और ऊपर से पानी डालें।

-पौधा ऐसी जगह रखें, जहां सीधी धूप न पड़े।

- एक-दो हफ्तों में ही कटिंग बढ़ने लगती है और जड़ें भी बनने लगती हैं। लेकिन इसे किसी दूसरे गमले में तब तक नहीं लगाना है, जब तक ये अच्छे से न बढ़ने लगें।

-एक महीने बाद आप कटिंग को किसी बड़े गमले में लगा सकते हैं।

4. सूरजमुखी (Sunflower):

सूरजमुखी के फूल दिखने में जितने खूबसूरत होते हैं, उतने ही ज्यादा समय तक खिले भी रहते हैं। इसे आप बीजों से लगा सकते हैं। इसके बीज आपको किसी नर्सरी या बीज भंडार की दूकान में मिल जायेंगे। सूरजमुखी के बीजों को सीधा गमलों में भी लगा सकते हैं या फिर पहले इसका पौधा तैयार कर सकते हैं।

-सूरजमुखी के पौधे लगाने के लिए, आप गमला या कोई बड़ा प्लास्टिक का डिब्बा लें और इसके नीचे तले में छेद कर दें।

-पॉटिंग मिक्स को तैयार करने के लिए 50% मिट्टी, 40% खाद और 10% रेत मिला लें।

- पॉटिंग मिक्स भरकर गमले को तैयार करें।

-अब इसमें बीज बो दें और थोड़ा थोड़ा पानी छिड़कते रहे।

सूरजमुखी के बीज 7-10 दिन में अंकुरित होने लगते हैं, लेकिन कभी-कभी इन्हें दो हफ्ते भी लग जाते है।

-जब पौधे बढ़ने लगें, तो गमले को ऐसी जगह रखें, जहां धूप अच्छी आती हो।

- नियमित रूप से पानी देते रहें। लेकिन पानी सिर्फ तभी देना चाहिए, जब मिट्टी सूखी हो। गमले में पानी भरा नहीं रहना चाहिए

-सूरजमुखी के पौधे तीन महीनों में तैयार हो जाते हैं।


5. कॉसमॉस ऑरेंज (Cosmos Orange):

कॉसमॉस ऑरेंज के पौधे को बीज से लगा सकते हैं। इसके बीज ऑनलाइन मंगवा सकते हैं या किसी बीज स्टोर से खरीद सकते हैं।

-आप एक मध्यम आकार का गमला लें।

-पॉटिंग मिक्स तैयार करने के लिए, 70% कोकोपीट, 20% मिट्टी और 10% रेत लें।

-अब गमले में पॉटिंग मिक्स को भर लीजिए और बीज को लगा दें।

-ऊपर से पानी का थोड़ा थोड़ा छिड़काव करें। केवल पानी से छिड़काव ही करें, क्योंकि इसके बीज बहुत हल्के होते हैं।

-आप गमले के ऊपर कोई पॉलिथीन शीट लगा सकते हैं। जिससे बीज अंकुरित हो जाते हैं।

-गमले को ऐसी जगह रखें, जहां धूप सीधी न पड़ती हो।

-एक हफ्ते में इसके बीज अंकुरित होने लगते हैं।

-जब बीज अंकुरित हो जाएं, तो पॉलिथीन हटा दें और गमले को धूप में रख दें।

- 20-25 दिन में ये पौधे इतने बड़े हो जायेंगे कि इन्हें दूसरे गमलों में भी लगा सकते हैं।

-पौधों को दूसरे गमले में लगाने के लिए, पॉटिंग मिक्स में मिट्टी, रेत और वर्मीकम्पोस्ट मिलाये।

-इस पॉटिंग मिक्स को आप दूसरे गमलों में भर लें और पौधों को दूसरे गमले में लगा दें।

-तीन महीनों में पौधे अच्छे से तैयार हो जाते हैं।

फूल के पौधों को महीने में एक दो बार खाद और नियमित रूप से पानी की जरूरत होती है। खाद के लिए आप केले और प्याज के छिलकों को दो-तीन हफ्तों तक पानी में भिगोकर रख सकते हैं। फिर इस घोल को पौधों में डाल सकते हैं। पौधों को कीड़ों से बचाने के लिए, आप नीम के तेल को पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं या पानी में बेकिंग पाउडर मिलाकर छिड़काव करें।

Whtasapp पर आए कई धांसू स्टीकर्स, बढ़ जाएगा चैटिंग का मजा, फटाफट कर लें डाउनलोड.

WhatsApp इस साल के अंत तक कई नए फीचर्स को लॉन्च करने जा रहा है। एक रिपोर्ट से पता चला था कि कंपनी Read Later और Multi Device सपोर्ट जैसे फीचर्स पर काम करने में लगी हुई है। अब व्हाट्सऐप ने अपने एक फीचर में अपडेट किया है। कंपनी ने चैटिंग को और ज्यादा अच्छा बनाने के लिए छह नए WhatsApp Sticker Pack लेकर आई हैं। इन स्टीकर्स को इस्तेमाल भी लोग बहुत ज्यादा कर रहे हैं। ये नए स्टिकर पैक कार्टून पर आधारित हैं। सभी छह स्टिकर पैक को iOS और एंड्रॉयड यूजर्स के लिए लॉन्च किया गया है।




कैसे मिलेंगे Stickers

WhatsApp के इस नए स्टीकर पैक में पहला स्टीकर पैक 'A Burdensome Pigeon named Eagle" है। दूसरा स्टीकर पैक 'Betakkuma 2' है। तीसरा बेस्ट फ्रेंड्स है जो 'Egg and Chup' हैं। चौथा 'Realistic Rabbit' हैं। पांचवा पैक स्पॉन्जबॉब की तरह है जो 'Square Cheese’s Daily Life' है। छठवां पैक फ्रैंकली वियर्ड है जो 'Woman Cactus' है। व्हाट्सऐप ने कुछ और स्टीकर पैक भी लॉन्च किए थे।


कैसे करें Stickers को डाउनलोड

इन नए स्टिकर पैक को यूज करने के लिए, आपको सबसे पहले व्हाट्सऐप ऐप को अपडेट करना होगा। अगर आपकी अपडेट सेटिंग ऑटो पर सेट है, तो ऐप ऑटोमेटिकली अपडेट हो जायेगा। जिसके बाद आप इन स्टीकर्स को आराम से यूज कर सकते हैं।


कैसे भेजें Stickers?

- सबसे पहले अपना व्हाट्सऐप ओपन करें और जिसे Sticker भेजना चाहते हैं उसकी चैट ओपन करें।

- 'type a message' पर क्लिक करें और emoji पर जाएं।

- इसके आपको 3 ऑप्शन दिख जायेंगे जिसमें emoji, GIF और तीसरा ऑप्शन Sticker होंगे।

- इन Sticker को एड करने के लिए आप प्लस आईकन पर क्लिक करें।

- आपको जो भी स्टिकर पसंद है, उन्हें डाउनलोड ऑप्शन पर क्लिक करके एड कर सकते हैं।

- अब आप जिसको भी ये स्टिकर भेजना चाहें, भेज सकते हैं।

- इन स्टीकर को फेवरेट स्टीकर्स में भी डालने का ऑप्शन होता हैं

- इसके लिए आपको स्टीकर पर थोड़ी देर प्रेस करके रखना होगा।

- एड करने के बाद आपको स्टार वाले आईकन में वो स्टीकर नजर आ जायेंगे।

रिया चक्रवर्ती के अंकल का कोरोना से निधन, ऐक्ट्रेस ने तस्वीर शेयर कर बताया- रियल लाइफ हीरो

 भारत में कोरोना महामारी ने बहुत ही भयानक रूप धारण कर लिया है और कई लोगों मौत के मुंह भी जा रहें है। बॉलिवुड ऐक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि उन्होंने अपने अंकल को कोरोना की वजह से खो दिया है। उन्होंने अपने अंकल की तस्वीर शेयर कर उनको श्रद्धांजलि दी है।



रिया चक्रवर्ती ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट में अंकल रिटायर्ड कर्नल एस सुरेश कुमार की तस्वीर शेयर की, उन्होंने पोस्ट के जरिए ये भी बताया कि उनके अंकल का जन्म 10 नवंबर 1968 को हुआ था, और 1 मई 2021 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

रिया चक्रवर्ती ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'एक जाने माने ऑर्थोपेडिक सर्जन, एक सम्मानीय अधिकारी, एक प्यारे पिता और एक बेहतरीन इंसान। कोविड ने आपको हमसे छीन लिया, लेकिन आपकी विरासत हमेशा रहेगी... सुरेश अंकल आप एक रियल लाइफ हीरो हैं। मैं आपको सलाम करती हूं सर। मैं आप सभी से विनती करती हूं कि आप सभी घर पर रहें और सुरक्षित रहें। कोविड अच्छा और बुरा नहीं देखता।'

आप सभी जानते है कि रिया चक्रवर्ती का नाम सुशांत सिंह राजपूत केस में जमकर उछला था। ऐक्टर के साथ उनका अफेयर भी था। सुशांत सिंह राजपूत मामले में उनको जेल भी हुई थी। केस में नाम आने के बाद से ही सोशल मीडिया से दूर हो गई थी। लेकिन अब वो सोशल मीडिया पर वापसी कर रही हैं।

शुक्रवार

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए विटामिन-सी और विटामिन डी वाली चीजों का सेवन करना काफी फायदेमंद है

 कोरोना के लगातार बढ़ते आंकड़ों की वजह से लोग अपनी इम्युनिटी क्षमता को लेकर सचेत हो रहें हैं। कोरोना से बचने के लिए और स्वस्थ रहने के लिए हर कोई आयुर्वेदिक काढ़ा और दादी-नानी के नुस्कों को अपना रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए विटामिन-सी और विटामिन डी वाली चीजों का सेवन करना काफी फायदेमंद है।


विटामिन डी के फायदे: विटामिन डी एक ऐसा पोषक तत्व है, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। इसके अलावा हड्डियों, मांसपेशियों और नसों को भी स्वस्थ रखता है। विटामिन-डी का सबसे बड़ा स्त्रोत सूरज है, लेकिन कुछ ऐसे फूड्स भी है जिनमें विटामिन डी के पोषक तत्व भी अच्छी-खासी मात्रा मौजूद है।

विटामिन डी के सेवन से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है। जिनमें वजन घटना, डिप्रेशन, हृदय रोग जैसी बीमारियां शामिल हैं। इसी के साथ विटामिन डी मस्तिष्क को स्वस्थ बनाने में भी मदद करता है।

विटामिन डी वाले खाद्य पदार्थ: संतरे के रस, दूध, दही, साल्मन, टूना मछली और अंडे आदि में विटामिन डी की मात्रा होती है। जिन लोगों की हड्डियां कमजोर होती हैं, उन्हें भी अपनी डाइट में इन चीजों को शामिल करना चाहिए।

विटामिन सी के फायदे: विटामिन-सी संक्रमण को दूर कर, स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद करता है। यह शरीर में मौजूद कोशिकाओं के विकास में भी भूमिका निभाता है। इसके अलावा विटामिन सी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखने के लिए बहुत जरूरी है। विटामिन सी घाव को जल्दी भरने में भी मदद है और हड्डियों को मजबूत बनाता है।


विटामिन सी वाले खाद्य पदार्थ: नींबू, आंवला, अमरूद, पालक, केल, संतरा, सरसों का साग और कीवी जैसी सब्जियां और फल विटामिन सी पाया जाता हैं।

नींबू: नींबू विटामिन सी का सबसे अच्छा स्त्रोत माना जाता है। आप नींबू को कई तरह से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। नींबू पानी के अलावा सब्जी में डालकर नींबू के रस का सेवन कर सकते हैं।

आंवला: आंवले में विटामिन-सी के अलावा एंटी-ऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती है। यह शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल, रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता हैं।

डायबिटीज से ग्रसित लोगों को कोरोना में अपना सबसे ज्यादा ध्यान रखने की ज़रूरत है

कोरोना महामारी धीरे-धीरे भयानक रूप लेती जा रही है। और लोग इस संक्रमण से उबरने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। जो लोग पहले-से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित है, उनके लिए ये बहुत बड़ी चुनौती का समय है। डायबिटीज उन्ही में से एक बीमारी है और डायबिटीज से ग्रसित लोगों को कोरोना में अपना सबसे ज्यादा ध्यान रखने की ज़रूरत है।


आज की खराब खानपान और जीवन शैली के कारण लोग डायबिटीज का शिकार होते जा रहे हैं। WHO के अनुसार इस बीमारी से हर साल लगभग 1.6 मिलियन मौत होती हैं। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को अपना खानपान अच्छा बनाने की जरूरत है। डायबिटीज को कंट्रोल रखने में गिलोय और नीम से बना जूस बहुत ही फायदेमंद है। साथ ही यह ब्लड शुगर लेवल को भी कंट्रोल रखने में मदद करता है।

नीम और गिलोय से बना जूस नेचुरल इम्युनिटी बूस्टर है। जो लोग सांस की बीमारी या कमजोर लिवर की समस्या से ग्रसित हैं, वह भी अगर इस जूस का सेवन करें तो उन्हें फायदा मिल सकता है। डायबिटीज की बीमारी से जूझ रहे लोग इंसुलिन की जगह नीम के पत्ते के पाउडर का सेवन करना चाहिए। यह डायबिटीज के लिए बहुत ही फायदेमंद है।

ब्लड शुगर कंट्रोल करता है गिलोय: गिलोय एक तरह की आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। इसके सेवन से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है।

संक्रमण से बचाता है नीम: नीम में मौजूद एंटी-वायरल, ट्राइटरपेनॉइड, फ्लेवेनॉइड्स और ग्लाइकोसाइड्स ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता हैं। इसका सेवन से ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है और किसी भी तरह के संक्रमण से भी बचा जा सकता है।

नीम और गिलोय का जूस बनाने का तरीका: 10 से 15 नीम के पत्तों को धोकर उबाल लीजिए। फिर पत्तों को निकालकर उसमें एक चम्मच सूखा गिलोय पाउडर, थोड़ा-सा कद्दूकस किया हुआ अदरक, 10 पुदीने के पत्ते, 2 चम्मच नमक और एक चम्मच काली मिर्च डालकर उसका पेस्ट बना लें। फिर इस मिश्रण को छानकर पीएं। यह जूस आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद हो सकता है।

डिलीवरी के बाद कमजोरी और थकान दूर करने के लिए महिलाओं को हेल्दी और एनर्जेटिक फूड

हर महिला के लिए मां बनने का अहसास सबसे खास होता है। गर्भावस्था से लेकर डिलीवरी तक महिलाओं को बहुत ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत होती है क्योंकि डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में कमजोरी आ जाती है। लेकिन इस दौरान मां के लिए बच्चे को पोषण देना भी आवश्यक होता है, और ये शिशु को ब्रेस्ट मिल्क से ही मिल सकता है।




ऐसे में डिलीवरी के बाद कमजोरी और थकान दूर करने के लिए महिलाओं को हेल्दी और एनर्जेटिक फूड खाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि, ऐसे खाने से केवल मां के साथ साथ शिशु को भी पोषण मिलता है। तो आज हम आपको ऐसे खाने के बारे में बताने जा रहें हैं, जिसका सेवन आपको डिलीवरी के बाद करना चाहिए:-

सब्जियों और गार्लिक से बना सूप:

सब्जियां शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होती हैं। यह पोषण तो देती ही हैं साथ ही घाव को भरने में भी मदद करती हैं। वहीं, लहसुन ब्रेस्ट मिल्क को बढ़ावा देता है। इसलिए आपको ये सूप पीना चाहिए। ये गर्भावस्था के दौरान बढ़े हुए वजन को कम करने में मदद करता है।


ऐसे बनाएं सूप:

सब्जियों और गार्लिक का सूप बनाने के लिए एक कढ़ाई में थोड़ा-सा तेल डालकर गर्म करें। फिर उसमें एक चौथाई बारीक कटी हुई प्याज और दो बारीक कटे हुए लहसुन डालें। इसके बाद उसमें सब्जियां जैसे बेबी कॉर्न, गाजर आदि मिलाये। अब इस मिश्रण में डेढ़ कप मिल्क, 2 चम्मच ओट्स और नमक मिलाये। जब तक सूप गाढ़ा न हो जाए, तब तक उसे पकाते रहे।

जौ का सूप: डिलीवरी के बाद साबुत अनाज खाने के लिए कहा जाता है। क्योंकि, इनमें पाए जाने वाले पोषक तत्व महिलाओं में कमजोरी को दूर करता हैं। गेहूं में प्रोटीन, आयरन और फाइबर की मात्रा होती है, यह घावों को जल्दी भरने में मदद करता हैं।

इस तरह बनाएं: इस सूप को बनाने के लिए करीब दो घंटे पहले दो चम्मच जौ को भिगोकर रख दें। फिर कुकर में थोड़ा-सा तेल डाल लें। उसमें एक चौथाई बारीक कटी हुई प्याज और दो चम्मच घिसा हुआ लहसुन डाले। अब दो चम्मच जौ, एक चौथाई कप कटी गाजर, दो चम्मच धुली हुई साबुत लाल दाल और साढ़े चार कप पानी डाले। करीब 3 सीटी आने तक सूप को पकने दें। फिर इसमें बारीक कटा हुआ धनिया, टमाटर, नमक डालकर उबाल लें। नमक डालकर गरमागर्म इसका सेवन करें।

ग्राम प्रधान का चुनाव तो जीता लेकिन कोरोना संक्रमण से जिंदगी की जंग हार गए

कोरोना के कहर के बीच उत्तर प्रदेश में हुए पंचायत चुनाव के दौरान कई लोगों ने अपनी जान गवाई है। पंचायत चुनाव के नतीजों में कई प्रत्याशी ऐसे भी हैं, जिनकी चुनावों में जीत हुई है और कोरोना के कारण मौत भी हो गई। ऐसे ही दो नाम है दुष्यंत त्यागी और अमरीश कुमार के जिन्होंने ग्राम प्रधान का चुनाव तो जीता लेकिन कोरोना संक्रमण से जिंदगी की जंग हार गए। पंचायत चुनाव में संभल जिले के इन दो प्रत्याशियों के साथ जिन लोगो की ड्यूटी लगी थी, उनमें से भी कई लोगों की मौत हुई है।


संभल जिले के असमोली ब्लॉक के राझा गांव में रहने वाले 52 वर्षीय दुष्यंत त्यागी ने नतीजे वाले दिन ही अस्पताल में दम तोड़ दिया। वह यह भी नहीं जान पाए कि उनको जीत मिली या हार। इसके अलावा माथना गांव के 45 वर्षीय अमरीश का निधन भी नतीजे के एक दिन बाद हो गया।

उत्तर प्रदेश में हुए पंचायत चुनाव में कई विजेता प्रत्याशी कोरोना से जिंदगी की जंग हार गए। इनमें फिरोजाबाद, मैनपुरी, गोरखपुर, देवरिया तथा अन्य जगहों के केस शामिल हैं। इन सीटों पर अब दोबारा चुनाव कराया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटों में कोविड-19 से संक्रमित 353 लोगों की मौत हुई और 26780 नए एक्टिव मामले सामने आए हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं को बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान कोविड-19 संक्रमित 353 और मरीजों की मौत हो गई और मरने वालों की संख्या बढ़कर 14501 हो गई है।

अगर सीढ़ियां चढ़ते या फिर दौड़ते हुए आपकी सांस फूलती है या फिर थोड़ा सा भी काम करने

आज की तनाव भरी जिंदगी में इंसान कई तरह की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। उनमें से एक बीमारी है सांस फूलने की। मेडिकल टर्म में इसको डिस्पानिया कहते है। अगर सीढ़ियां चढ़ते या फिर दौड़ते हुए आपकी सांस फूलती है या फिर थोड़ा सा भी काम करने, भारी सामान उठाने से आपकी सांस फूल जाती है, तो इसे आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये खराब जीवन शैली के कारण भी होता है। मोटापे, एंजाइटी, अस्थमा, दिल की बीमारी, कैंसर, टीवी, एनीमिया के कारण भी सांस फूलने की समस्या होती है।



 

कोरोना का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर ही पड़ता है, ऐसे में कुछ लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कतें होती हैं। इसलिए आप कुछ घरेलू उपायों के जरिए सांस फूलने की इस समस्या से निजात पा सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में:

गहरी सांस लें: सांस फूलने से छुटकारा पाने के लिए पेट से गहरी सांस लें। इसके लिए लेट जाइए और अपने दोनों हाथों को पेट पर रख लें। नाक से गहरी सांस लें और पेट को फुलाते हुए अपने फेफड़ों में हवा भरने की कोशिश करें। इसके बाद मुंह से सांस लें और धीरे धीरे हवा को बाहर निकालें। इसको आप दस मिनट तक कर सकते हैं।

कॉफी: सांस फूलने की समस्या को कम करने के लिए कॉफी काफी फायदेमंद है। इसमें मौजूद कैफीन सांस की नली में मौजूद मांशपेशियों को आराम देती हैं। इसलिए आप सांस फूलने की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप ब्लैक कॉफी का सेवन कर सकते हैं लेकिन इसका सीमित प्रयोग ही करिए।

अदरक: अदरक सांस की नली से संक्रमण को हटाने में मदद करती है। अदरक सांस की नली में पैदा करने वाले बेक्टेरिया आरएसवी वायरस से लड़ने में मदद करता है। इसके लिए आप अदरक को गर्म पानी में या खाने में डालकर इस्तेमाल कर सकते हैं।

लाइफस्टाइल मे परिवर्तन लाएं: सांस की समस्या का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करना होता है। इसलिए आपको धूम्रपान के सेवन से भी बचना चाहिए। इसके साथ नियमित तौर पर व्यायाम भी करना चाहिए।

गुरुवार

क्या संपूर्ण लॉकडाउन लगाएगी मोदी सरकार?

भारत में कोरोना की दूसरी लहर बहुत तेज़ी से बढ़ता जा रहा है, ऐसे में क्या भारत सरकार पूरा लॉकडाउन लगा सकती है? केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा ऐसी संभावना से इनकार नहीं किया है। नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नेशनल लॉकडाउन लगने पर भी चर्चा चल रही है।



वीके पॉल नेशनल कोविड-19 टास्क फोर्स के हेड हैं उन्होंने कहा है कि ताजा हालात को लेकर एडवाइज़री जारी की गई हैं, और अगर सख्त पाबंदियों की ज़रूरत पड़ती हैं, तो उस पर भी चर्चा होती है। इसलिए जिन फैसलों की भी ज़रूरत पड़ेगी उन्हें चर्चा में लिया जाएगा।

बुधवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि राज्य सरकारों को स्थानीय स्थिति के आधार पर, 10 फीसदी से अधिक पॉजिटिविटी रेट आता है तो जिलावार पाबंदियां लगाना होगा।

महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, कर्नाटक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्य पहले ही लॉकडाउन, कर्फ्यू, नाइट कर्फ्यू, वीकेंड लॉकडाउन जैसे कदम उठा चुके हैं।

संपूर्ण लॉकडाउन के लिए उठ रही है मांग

जब से कोरोना की दूसरी लहर ने आई है, एक्सपर्ट्स की ओर से नेशनल लॉकडाउन को लेकर बोला जाने लगा है। राहुल गांधी भी संपूर्ण लॉकडाउन की मांग कर चुके हैं।

अमेरिका के टॉप हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. एंटनी फाउची ने भी लॉकडाउन के लिए कहा है। लॉकडाउन लगने से ट्रांसमिशन की रफ्तार को रोक लग सकता है। इसलिए सरकार को अपनी पूरी तैयारी करनी चाहिए।

गुरुवार को सामने आए रिकॉर्ड मामले

गुरुवार को कुल 4.12 लाख केस दर्ज किए गए, जबकि करीब 4 हजार मौतें दर्ज की गई। एक्टिव केस की संख्या भी तीस लाख से ऊपर बनी हुई है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा केसेज आ रहे हैं। दुनिया में कोरोना संक्रामण पर भारत का नाम सबसे ऊपर है।

तीसरी लहर की आई चेतावनी

देश अभी कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहा है, और एक्सपर्ट तीसरी लहर की चेतावनी भी देने लगे हैं। उनका कहना है कि भारत में कोरोना की तीसरी लहर का आना तय है, लेकिन ये कब तक आएगी इसका अंदाजा नहीं लगा सकते। ऐसे में सवाल आता है कि जब दूसरी लहर ने ही देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल दी, तो तीसरी लहर क्या होगा।

गुरुवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने भी तीसरी लहर को लेकर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार को अभी से सभी तैयारी करनी होंगी क्योंकि अगर तीसरी लहर में बच्चों पर असर डाला तो बच्चों का इलाज, उनके मां-बाप का क्या होगा, ये सब अभी से सोचना होगा। इसके साथ ही डॉक्टर्स, नर्स का बैक-अप प्लान भी तैयार करके रखना होगा।

5G के ट्रायल के लिए भारत के दूरसंचार विभाग ने मंजूरी दे दी है। ये ट्रायल गांव, कस्बे और शहरों में किया जाएगा

5G के ट्रायल के लिए भारत के दूरसंचार विभाग ने मंजूरी दे दी है। ये ट्रायल गांव, कस्बे और शहरों में किया जाएगाऔर इस ट्रायल के लिए देश की चार बड़ी दूरसंचार कंपनियों ने आवेदन किया है।




ट्रायल के मिला छह महीने का वक्त

दूरसंचार विभाग ने कंपनियों को 5जी के ट्रायल के लिए छह महीने का वक्त दिया गया है। इसमें 5 जी उपकरण लगाने में दो महीने का समय भी शामिल है।

ट्रायल करने वाली कंपनियां

5जी के ट्रायल के लिए एयरटेल, रिलायंस जियो, वोडाफोन, आइडिया और एमटीएनएल ने आवेदन किया है। इसके अलावा इन कंपनियों ने 5जी उपकरण के लिए एरिक्सन, नोकिया, सैमसंग और सी-डॉट कंपनियों के साथ टाई-अप किया है।

स्वदेशी तकनीक का उपयोग करेगी जियो

देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो 5जी के ट्रायल के लिए स्वदेशी तकनीक का उपयोग करने जा रही है। अभी जियो देश में सबसे बड़ी 4जी नेटवर्क कंपनियों में से एक है और ग्राहकों की संख्या के मामले में पहले नंबर पर है।

स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल की इजाजत

कंपनियों को 5जी ट्रायल के लिए मिड-बैंड (3.2 गीगाहर्ट्ज से 3.67 गीगाहर्ट्ज), मिलीमीटर वेब बैंड (24.25 गीगाहर्ट्ज से 28.5 गीगाहर्ट्ज) और सब-गीगाहर्ट्ज बैंड (700 गीगाहर्ट्ज) के स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करना होगा। इसके साथ साथ कंपनियां 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम का उपयोग करेगी।

सब जगह किया जाएगा ट्रायल

मंत्रालय ने कहा है कि हर दूरसंचार सेवाप्रदाता कंपनी 5जी के ट्रायल हर तरह के इलाके में करे। हर कंपनी को गांव, कस्बे और शहरों में 5जी टेक्नोलॉजी का ट्रायल करना होगा। ये सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित नही रहेगा।

देसी तकनीकों को देनी होगी अहमियत

5जीआई टेक्नोलॉजी स्वदेशी तकनिकी है। इसलिए मंत्रालय ने ये भी कहा है कि कंपनियों को आईआईटी मद्रास, आईआईटी हैदराबाद और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के वायरलेस टेक्नोलॉजी द्वारा विकसित 5जीआई टेक्नोलॉजी का उपयोग करना होगा।

कोविड-19 की स्थितियों पर PM मोदी ने ली मीटिंग, शाह और राजनाथ भी रहे मौजूद

देशभर में कोरोना का प्रकोप बढ़ रहा है। इसी वजह से आज पीएम मोदी ने देश में कोरोना संबंधित स्थिति पर मीटिंग की। इस मीटिंग में पीएम ने विभिन्न राज्यों और जिलों में कोरोना के प्रकोप के बारे में जानकारी ली। बैठक में अधिकारियों ने पीएम को 12 राज्यों के हालत बताए, जहां अभी एक लाख से ज्यादा एक्टिव मामले हैं। इसके अलावा उच्च रोग भार वाले जिलों के बारे में भी उनको बताया गया।




बैठक में पीएम को राज्यों द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। और उन्होंने निर्देश दिया कि राज्यों के स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सहायता और मार्गदर्शन दिया जाए।

मीटिंग में त्वरित और सभी रोकथाम उपायों की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। पीएम मोदी ने राज्यों में गंभीर जिलों की पहचान करने के लिए एक एडवाइजरी भेजी थी जहां पॉजिटिविटी केस 10% या उससे अधिक है और ऑक्सीजन सपोर्टेड पर बेड ऑक्यूपेंसी 60% से अधिक है।

पीएम ने दवाओं की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी ली। अगले कुछ महीनों में टीकों पर उत्पादन बढ़ाने और टीकाकरण बढ़ाने की समीक्षा की। उन्हें बताया गया कि राज्यों में 17.7 करोड़ टीके की पूर्ति की गई है। पीएम ने वैक्सीन वेस्टेज पर भी समीक्षा की। पीएम को बताया गया कि 45 वर्ष से अधिक आयु के 31% लोगो को एक खुराक दी गई है।

पीएम ने आदेश दिए है कि टीकाकरण की रफ्तार में कमी नहीं आनी चाहिए। लॉकडाउन होने पर भी टीकाकरण के लिए लोगों को सुविधा दी जानी चाहिए। टीकाकरण करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को अन्य ड्यूटी के लिए डायवर्ट नहीं किया जाना चाहिए। पीएम की इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण, डॉ. हर्षवर्धन, पीयूष गोयल, मनसुख मंडाविया, अन्य मंत्री और अधिकारी भी मौजूद रहे।

सबसे सस्ते फाइबर ब्रॉडबैंड प्लान्स

कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ते जा रहा है। जिसकी वजह से कंपनियां फिर वर्क फ्रॉम होम पर आ गई है। इसकी वजह से इंटरनेट का उपयोग भी काफी बढ़ गया है। इस समय फ़ास्ट इंटरनेट स्पीड की डिमांड भी बढ़ गई है। जिसकी वजह से कई इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनियां फाइबर ब्रॉडबैंड सर्विस देना शुरू कर दिया हैं। इसलिए आप भी नया ब्रॉडबैंड कनेक्शन लेने की सोच रहे हैं तो ये खबर आपके लिए फायदेमंद है। आज हम 500 रुपये से कम के Best Broadband Plans के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां आपको ज्यादा डेटा के साथ साथ अच्छी स्पीड भी मिलेगी। ये प्लांस कुछ ऐसे हैं-




JIO ₹500 ब्रॉडबैंड प्लांस

रिलायंस जियो की ब्रॉडबैंड सर्विस JioFiber 500 रुपये से कम में बहुत अच्छा प्लान है जो 399 रुपये का है। इसमें अनलिमिडेट कॉलिंग और अनलिमिटेड इंटरनेट मिलता है। इस प्लान में 3300GB डेटा और 30Mbps की इंटरनेट स्पीड मिलती है।

BSNL ₹449 ब्रॉडबैंड प्लांस

BSNL के 449 रुपए के प्लान में 30 Mbps की स्पीड के साथ 3300GB डेटा मिलता है। लेकिन यह प्लान सिर्फ फर्स्ट टाइम यूजर्स के लिए है। इसके बाद यूजर्स को 599 रुपये का ब्रॉडबैंड प्लान करवाना पड़ेगा। इस प्लान में 60 Mbps की स्पीड के साथ 3300GB डेटा मिलता है। लेकिन डेटा लिमिट समाप्त होने के बाद स्पीड कम होकर 2 Mbps रह जाएगी।

Excitel ₹500 ब्रॉडबैंड प्लांस

जियो फाइबर, एयरटेल एक्सट्रीम और बीएसएनएल जैसी पॉपुलर कंपनी की तरह आपके पास और भी कई ऑप्शन हैं। जिनमें 500 रुपये से कम में Excitel के 3 प्लान है जिसका आप फायदा उठा सकते हैं। ये प्लान 399 रुपये, 449 रुपये और 499 रुपये वाले है। लेकिन इनमें कुछ नियम और शर्तें भी हैं। आप अगर 100mbps वाला प्लान लेते हैं तो एक साल के लिए मंथली 399 रुपये वाला प्लान ले, या आप 200 mbps वाली स्पीड लेते हैं तो 449 रुपये मंथली वाला प्लान लें और 300mbps वाली स्पीड के लिए 499 रुपये मंथली वाला प्लान लें।

Airtel XStream ₹449 ब्रॉडबैंड प्लांस

एयरटेल की ब्रॉडबैंड सर्विस Airtel XStream में आपको 500 रुपये से कम में प्लान मिल जायेंगे, जो 499 रुपये का है। इस प्लान में 40Mbps की स्पीड में अनलिमिडेट इंटरनेट और अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग की सुविधा मिलती है। इसमें आपको Airtel XStream, Wynk Music, Shaw academy, Voot Basic, Eros Now, Hungama Play, Shemaroo M और Ultra आदि चलाने का भी ऐक्सेस मिलता है।

तो अगर आपके लिए ये प्लांस अच्छे हैं, तो उसने आप जरूर आजमाकर देखिए।

बुधवार

ATM जैसा आधार कार्ड, मंगाएं घर बैठे

आधार कार्ड एक बहुत ही जरूरी दस्तावेज है। इसका उपयोग हर जगह जरूरी हो गया है। यह बैंक खातों और पैन कार्ड के साथ तो लिंक होता ही है, साथ ही सरकारी योजनाओं में भी ये बहुत जरूरी है।

आधार कार्ड को अब ID कार्ड के रूप में भी माना जाने लगा है। इसलिए आपके पास हर समय आधार कार्ड होना चाहिए। ज्यादातर लोगों के पास जो आधार कार्ड होता है वह कागज पर एक कलर प्रिंट आउट होता है। लेकिन अब आप ATM की तरह दिखने वाले आधार कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं।



घर बैठे ही हो जाएगा काम

कागज़ के आधार कार्ड के भीगने, फटने और धुल जाने का डर रहता है। लेकिन अब आप आधार कार्ड जारी करने वाला विभाग (UIDAI) की वेबसाइट के जरिए पीवीसी कार्ड पर प्रिंट हुआ आधार कार्ड अप्लाई कर सकते हैं। और यह काम आप घर बैठे ही कर सकते हैं। और यह सीधा आपके घर स्पीड पोस्ट के जरिए आ भी जाएगा।


आधार पीवीसी कार्ड के फीस और फायदे

पीवीसी आधार कार्ड की क्वालिटी अच्छी होती है और इसे आसानी से कही भी रखा जा सकता है। पीवीसी आधार कार्ड में होलोग्राम, Guilloche पैटर्न, Ghost Image और माइक्रोटेक्स्ट सिक्योरिटी फीचर्स जैसे फीचर्स दिए होते है जिसमें क्यूआर कोड के जरिए ऑफलाइन वेरिफिकेशन भी कर सकते है। इस कार्ड के लिए आपको सिर्फ 50 रुपये देना होगा।


आधार PVC कार्ड अप्लाई करने का तरीका

1. इसके लिए आप UIDAI की वेबसाइट (uidai.gov.in/my-aadhaar/get-aadhaar.html) पर जाइए।
2. स्क्रोलिंग करके नीचे आएं और Order Aadhaar PVC Card ऑप्शन पर क्लिक कर दें।
3. अब आपको अपना आधार नंबर और Security Code डालना होगा।
4. Send OTP ऑप्शन पर क्विल कर दें।
5. अब आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा, जिसे आपको दर्ज करने होगा और Submit बटन पर क्लिक कर दें।
6. अब आपको डीटेल्स वेरिफाई करना होगा और सब सही होने पर Payment करने होगा।
7. अब आप नेट बैकिंग,यूपीआई, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड किसी के भी जरिए पेमेंट कर दें।
8. पेमेंट पूरा होने पर आपको स्लिप मिल जाएगी और आपका आधार कार्ड कुछ दिन में स्पीड पोस्ट के जरिए आपके घर आ जाएगा।

मई के महीने में बैंको में 12 दिन का अवकाश रहेगा

भारतीय रिज़र्व बैंक की हॉलिडे कैलेंडर लिस्ट के अनुसार, मई के महीने में बैंको में 12 दिन का अवकाश रहेगा, जिसमें महीने के दूसरे और चौथे शनिवार और रविवार शामिल है ही। भारतीय रिज़र्व बैंक ने छुट्टियों को तीन ब्रैकेट्स में रखा है जिसमें परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत अवकाश, परक्राम्य लिखत अधिनियम और वास्तविक समय सकल निपटान अवकाश के तहत छुट्टी और बैंक क्लोजिंग के अवकाश शामिल है।






हर राज्य में कुछ बैंक की छुट्टियां भी अलग-अलग होती हैं। पूरे देश में बैंक केवल राजपत्रित अवकाश देखते हैं। आरबीआई की वेबसाइट के हिसाब से, ईद-उल-फितर, भगवान श्री परशुराम जयंती, बुद्ध पूर्णिमा त्योहार मई 2021 में बैंक अवकाश के रूप में आते हैं।

मई 2021 में बैंकों में अवकाश की लिस्ट

मई 1, 2021: महाराष्ट्र दिन/लेबर डे

मई 2, 2021: रविवार

मई 7, 2021: जमात-उल-विदा

मई 8, 2021: दूसरा शनिवार

मई 9, 2021: रविवार

मई 13, 2021: रमजान-ईद (ईद-उल-फितर)

मई 14, 2021: भगवान श्री परशुराम जयंती/ रमजान ईद/ बसवा जयंती/ अक्षय तृतीया

मई 16, 2021: रविवार

मई 22, 2021: चौथा शनिवार

मई 23, 2021: रविवार

मई 26, 2021: बुद्ध पूर्णिमा

मई 30, 2021: रविवार

यूपी में सोमवार तक बढ़ा लॉकडाउन-

यूपी में 10 मई तक बढ़ाया गया लॉकडाउन

उत्तर प्रदेश में कोरोना का कहर जारी है। दिन प्रतिदिन कोरोना के 20 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। इसलिए मामलों को कम करने के लिए सरकार हर तरह से प्रयास करने में लगी है। पहले सरकार ने रात्रि में कर्फ्यू लगाया लेकिन जब उससे बात नहीं बनी तो वीकेंड लॉकडाउन लगा दिया। पर अब जब हालात ज्यादा बिगड़ने लगे है तो योगी सरकार ने एक बार फिर से लॉकडाउन बढ़ा दिया है।



पूर्व के आदेश के अनुसार गुरुवार 6 may के सुबह यूपी में लॉकडाउन खत्म होना था लेकिन अब आने वाले सोमवार 10 मई तक इसे और बढ़ा दिया। लेकिन पाबंदियां वही लागू रहेंगी जो पहले होती थीं। आइए जाने क्या रहेगा खुला और क्या बंद....
1. सिर्फ जरूरी सेवाएं जैसे मेडिकल, किराना आदि छोड़कर सभी दुकानें व सेवाएं बंद रहेंगी।

2. पहली बार मास्क न लगाने पर 1000 रुपये जुर्माना और गलती दोहराने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा।

3. आवश्यक सेवाओं के लिए जारी किए जाएंगे पास।

4. मॉल, जिम, स्पा, ऑडिटोरियम बंद रहेंगे । रेस्त्रां खुलेंगे, लेकिन सिर्फ होम डिलीवरी की सेवा रहेगी चालू।

5. दूसरे राज्यों में आवा जाही कर सकते हैं।

6. शादी समारोह में सिर्फ 50 लोगों को शामिल होने की अनुमति और वो भी सिर्फ 3 घंटे। अंतिम संस्कार में सिर्फ 20 लोग शामिल हो सकते हैं।

7. साप्ताहिक बंदी के साथ साथ रात्रि कर्फ्यू भी जारी रहेगा।

8. 15 मई तक सभी स्कूल बंद रहेने की अनुमति।

9. सामाजिक, राजनीतिक, खेल, मनोरंजन, अकादमिक, सांस्कृतिक, धार्मिक उत्सव में भीड़ तथा सभाएं आयोजित नहीं किए जाएंगे।

ईको फ्रेंडली हॉउस, जिसमें ये दंपत्ति रहती है फिट & फ़ाईन

आए दिन सभी को कोई ना कोई बीमारी लगी ही रहती है, कभी छोटी तो कभी बड़ी बीमारियाँ। आप को ऐसा कोई नहीं मिलेगा जो ये कह दे की उसे 1साल से कोई भी बीमारी नहीं हुई।


eco friendly house


लेकिन आज हम आपको एक ऐसे कपल की कहानी बताने वाले हैं, जो 17 सालों से बीमार हुए ही नहीं और ना ही कभी दवाई लेने की जरूरत पड़ी। इसके पीछे का राज़ है उनका Eco Friendly House और उनकी Healthy Lifestyle.

हरी और उनकी पत्नी आशा को प्यार है नेचर से

ये दोनों प्रकृति से बहुत प्यार करते हैं। और ये प्रकृति प्रेम हम उनकी लाइफस्टाइल में देख सकते हैं। जब इनकी शादी हुई थी, तो इन्होंने शादी में कई प्रकृति प्रेमियों को बुलाया था।

आर्किटेक्ट दोस्त से बनवाया मिट्टी का घर

उन दोनों ने मिलकर फ़ैसला किया कि वे एक ऐसा घर बनवाएंगे जो ऊर्जा से भरपूर तो होगा ही, साथ ही प्रकृति के पास भी हो। फिर उन्होंने अपनी ये सोच आर्किटेक्ट फ्रेंड को बताया, जिसने उनकी मदद की और हरी और आशा का ड्रीम हाउस बन गया। उनका यह घर 960 sq. ft. है, जो कि केरल  राज्य के कन्नूर  जिले में बना है। इसकी खासियत यह है की ये घर मिट्टी से बनाया गया है।

जानिए इस घर की खासियत…

दिन के समय सूर्य की किरणें घर के अंदर आती हैं, पर घर के अंदर की हवा के कारण घर दिन में गर्म नहीं होता और रात में ठंडी हवा चलने लगती है जिसकी वज़ह से इस घर में पंखे की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। केरल में बारिश ज़्यादा होती है, इसलिए मकान की छत कॉनक्रीट और नालीदार टाइल से बनी हुई है।

उनके इस मकान में बिजली का उपयोग बहुत ही कम किया जाता है। जब उन्होंने यह मकान बनवाया था तब प्रकाश की व्यवस्था कुछ इस तरह से की थी कि हर एक लैंप को ऐसे लगाया जिससे ज़्यादा दूरी तक रौशनी रहे।

भोजन को ताज़ा रखने का खास तरीका

इन्होंने अपने घर में फ्रिज नहीं रखा हुआ है। जब इन्हें किसी चीज को ज़्यादा वक़्त तक अच्छा और ताज़ा रखना हो तो उसके लिए उन्होंने एक अलग टेक्निक का यूज किया है। उन्होंने अपने किचन के एक कोने में ईंटो की एक दीवार बनाई है उस दीवार के अंदर एक चौकोर स्थान बनवाया, जिसमें अंदर की तरफ़ एक मिट्टी का घड़ा रख दिया। इस घड़े में जब खाना रखा जाता है तो वह करीब एक हफ्ते तक खराब नहीं होता, क्योंकि इसके चारों और रेत ढंकी जाती है। यह टेक्निक खाना अच्छा रखने में बहुत मददगार होता है।

बिजली की खपत होती है कम

हरि और आशा ने मकान में सोलर पैनल भी लगवा रखा है। घर से जो भी कचरा और माल निकलता है उससे बायोगैस बना ली जाती है फिर उसी का उपयोग वे अपने घर में भी करते हैं। साधारणतया किसी घर में बिजली की करीब 50 यूनिट तक खपत होती है, परंतु इनके घर में 1 महीने में केवल 4 यूनिट बिजली ही इस्तेमाल की जाती है। इन्होंने अपने घर में कई इलेक्ट्रिक उपकरण जैसे टीवी, कम्प्यूटर, मिक्सर इत्यादि भी रखे हुए हैं, लेकिन यह ऊर्जा का अच्छे तरह से उपयोग करते हैं।

जंगल के बीचों बीच बसा है उनका सपनों का घर

उनका यह सपनों का घर जंगल के बीचों-बीच बसा हुआ है। इस जंगल में बहुत-सी तितलियाँ, चिड़ियाएँ, पशु पक्षी रहते है। वो अपनी ज़मीन में बहुत सारे फल और सब्जियाँ को भी उगाते हैं।

17 सालों से नहीं पड़ी जरूरत कभी दवा की

हरि और आशा का कहते है कि उनके नेचर फ्रेंडली लाइफस्टाइल से उनको बहुत फायदा मिलता है। प्रकृति के बीच रहने से उन्हें स्वच्छ वातावरण और हवा-पानी मिल रहा है जिससे वे कभी बीमार नहीं पड़े और 17 सालों से किसी भी तरह की दवाई भी नहीं खाई। वो लोग प्राकृतिक रूप से उगाया गया भोजन ही खाते हैं।

हरि ने कहा कि उन्हें कभी सर्दी-जुकाम हो भी जाता है तो वो पेय पदार्थों का सेवन, रेस्ट करने से उनका शरीर फिर से ठीक हो जाता है। लेकिन हर आदमी, हरि और आशा की तरह जंगल बनाकर नहीं रह सकतें है, लेकिन उनकी लाइफस्टाइल से हम कुछ चीज़े तो अपना ही सकते हैं, जैसे प्रकृति के साथ मिलकर रहना और सादा, व्यवस्थित जीवन गुजारना।





मंगलवार

गाँव से आई एक लड़की ने इस परीक्षा को अपनी मेहनत से पास कर लिया

हर व्यक्ति UPSC की परीक्षा पास नहीं कर पाता लेकिन गाँव से आई एक लड़की ने इस परीक्षा को अपनी मेहनत से पास कर लिया। ये हैं IAS सुरभि गौतम। इन्होंने अपने लक्ष्य के लिए बहुत परिश्रम किया और कामयाब भी होकर दिखाया।



सुरभि गौतम ने वर्ष 2016 में सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास की और ऑल इंडिया लेवल पर 50 वी रैंक भी हासिल की। ये मध्य प्रदेश में सतना जिले के अमदरा गाँव की रहने वाली है। इनके पिता MP मईहर कोर्ट में वकील हैं और माता स्कूल में टीचर हैं। सुरभि ने ऐसे विद्यालय से पढ़ाई की जहाँ पर बिजली, किताबें और दूसरी ज़रूरत की सुविधाएँ भी ठीक से नहीं मिलती थी।

बीमार होने के बाद भी करती रहीं पढ़ाई

उन्होंने 10वीं कक्षा में 93.4% नम्बर हासिल किए, और गणित और विज्ञान में 100 अंक प्राप्त किए थे। इससे उनका नाम मेरिट लिस्ट में भी आया था। 12वीं कक्षा में उनको Rheumatic बुखार आ गया था जिसके कारण उन्हें 15 किलोमीटर दूर डॉक्टर को दिखाने जाना पड़ता था। लेकिन ऐसी हालत में भी उन्होंने पढ़ाई से ध्यान नहीं हटाया।

कॉलेज में हीन भावना से हुई ग्रस्त

12वीं की पढ़ाई के बाद उन्होंने स्टेट इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा को भी पास किया और भोपाल के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन्स में पढ़ाई शुरू की। इस कॉलेज में अधिकतर बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूल से पढ़े हुए थे, लेकिन उन्होंने हिन्दी मीडियम स्कूल से पढ़ाई की थी जिसकी वजह से उनकी अंग्रेज़ी कमजोर थी। इस वजह से वो कॉलेज में हीन भावना की शिकार भी हुई थी लेकिन बाद में उन्होंने अपनी अंग्रेज़ी को भी इंप्रूव किया।

नींद में भी करने लगी थी इंग्लिश में बातें

सुरभि अपनी अंग्रेज़ी सुधारने के लिए हर रोज़ 10 वर्ड मीनिंग याद करती थीं। यह मीनिंग याद रखने के लिए वो दीवारों पर भी मीनिंग लिख देती थी। इंग्लिश सीखने का जुनून उन पर इतना सवार हो गया था कि वह सपनों में भी इंग्लिश में ही बात करती थी।

कई प्रतियोगी परीक्षाएँ की पास

कॉलेज प्लेसमेंट से सुरभि को Tata Consultancy Services में जॉब मिल गई थी। लेकिन वो कुछ और करना चाहती थी इसलिए उन्होंने जॉब ज्वाइन नहीं की। फिर उन्होंने ISRO, BARC, GTE, MPPSC, SAIL, FCI, SSC और दिल्ली पुलिस जैसे बहुत सारे कंपटीशन एग्जाम दिए और पास हुईं।

फिर वर्ष 2013 में उन्होंने IES परीक्षा निकाली, इस परीक्षा में उनकी फर्स्ट रैंक आई थी। लेकिन उनका सपना था IAS बनना। इसके लिए उन्होंने बहुत मेहनत की। और 2016 में IAS की परीक्षा पास करके IAS ऑफिसर बन गईं।


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