Type Here to Get Search Results !

पित्ताशय (गाल ब्लैडर) क्या है, गॉल ब्लैडर स्टोन बनने का कारण, पित्त के कार्य, पित्ताशय की पथरी क्या होती है?

पित्ताशय के कार्य को समझने के लिए सबसे पहले हम ये जानेंगे की पित्त क्या होता है और क्या काम करता है-

पित्त का अर्थ शरीर की गर्मी से होता है और यही पित्त ही शरीर को गर्मी देता है। पित्त ही शरीर को बल देता है। लारग्रंथि, अमाशय, अग्नाशय, लीवर व छोटी आँत से निकलने वाला रस भोजन को पचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है पित्त का शरीर में इतना महत्व है, कि जब तक शरीर में गर्मी है तब तक ही जीवन है और शरीर ठण्डा होते ही उसे मृत घोषित कर दिया जाता है। कभी आपने देखा होगा की उल्टी करते समय हरे व पीले रंग का लिक्विड मुँह से बाहर आता है उसी को पित्त कहते हैं।




पित्त आग का दूसरा नाम है। शरीर में पित्त आग और जल से मिलकर बना है। और जल इस आग के साथ मिलकर शरीर की जरूरत के अनुसार इसे सन्तुलित करता है। इसका स्वाद खट्टा, कड़वा और कसैला होता है और रंग नीला, हरा और पीला होता है। यह तरल पदार्थ के रूप में होता है। वैसे तो पित्त शरीर के अलग अलग भागों में होता है लेकिन हृदय से नाभि तक इसका मुख्य स्थान होता है।


पित्त के कार्यः-

- भोजन को पचाता है

- नेत्र ज्योति ठीक रखता है

- त्वचा में निखार लाता है

- याददाश और बुद्धि बढ़ता है

- भूख प्यास की इच्छा बताता है

- मल त्याग में मदद मिलती है।


पित्ताशय (गाल ब्लैडर) क्या है

पित्ताशय शरीर का वह खोखला अंग है जो शरीर में पित्त का सन्तुलन बनाये रखता है। ये पित्त को इकट्ठा और गाढ़ा करता है। पित्ताशय में करीब 50 मिलीलीटर पित्त भरा होता है।

गाल ब्लैडर नाशपाती के आकार का होता है जो 4 इंच का होता है। ये लीवर के नीचे तथा पेट के ऊपर दाहिने हिस्से में होता है।

पित्ताशय के कार्य (Functions of Gall Bladder)

- लीवर से बना हुआ पित्त रस को इक्कठा करता है।

- फैट को पचने में मदद करता है।

- पित्त को छोटी आंत तक पहुंचाता है।

- पित्त का सन्तुलन बनाये रखता है।

आमतौर पर 85 प्रतिशत लोगों के पित्ताशय में पथरी होती है। वैसे तो पथरी से कोई दिक्कत कष्ट नहीं होती है लेकिन जिन लोगों को पेट के दाएँ ऊपरी हिस्से में दर्द होता है उन्हें पथरी हो सकती है।

पित्ताशय की पथरी क्या होती है?

जब पित्ताशय में पित्त धीरे धीरे सूखने लगता है तो उसमें पाए जाने वाले चीनी-नमक और अन्य तत्व जमा होने लगता है और छोटे-छोटे पत्थर बनने लगते हैं, जिन्हें पित्ताशय की पथरी कहते है।

पित्त में पथरी का बनना एक कष्टदायक रोग है। पथरी दो तरह की बनती है- कोलेस्ट्रॉल और पिग्मेंट। लेकिन 80% पथरी कोलेस्ट्रॉल से ही बनती है। पित्त लिवर में बनता है और गॉल ब्लैडर में जाकर इकट्ठा होता है। फैट वाले भोजन को पित्त ही पचाता है लेकिन जब पित्त में कोलेस्ट्रॉल और बिलरुबिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो धीरे धीरे वो पथरी बनने लगती है।

जब पित्ताशय में पथरी का बनना शुरू होता है, तो यह आकार में बहुत ही छोटी होती है लेकिन अगर इस पर अधिक समय तक ध्यान न दिया जाए तो इसका आकर बहुत तेजी से बढ़ने लगता है। इसलिए आकार जितना बड़ा होता जायेगा, दिक्कत और दर्द भी उतना ही बढ़ेगा।






पथरी के प्रकार-

पित्ताशय में पथरी अलग अलग प्रकार की होती हैं-

कोलेस्ट्रोल पथरी - इस पथरी का रंग पीला होता है, जो की अपच पदार्थों के इकट्ठा होने से बनती है।

पिजन पथरी - ये पथरी बिलरुबिन के बढ़ने से बनती है। शुरु में यह बहुत ही छोटे और गहरे रंग की होती है, लेकिन धीरे धीरे इसका आकर बढ़ने लगता है।

गॉल ब्लैडर स्टोन बनने का कारण

पथरी बनने का कोई सटीक कारण तो नही हैं लेकिन कुछ चीज़े स्टोन बनने के कारण होती है

मोटापा

डायबिटीज

गर्भावस्था

तेज़ी से वजन घटना

ज्यादा भूख लगना

खून की बीमारी

लगातार दवाओं का सेवन

इसके अलावा और भी कई कारण है जिससे गाल ब्लैडर स्टोन हो सकता है-

1. ब्रेड और दूसरे बेकरी प्रोडक्ट्स- बेकरी में बनी चीजें जैसे- ब्रेड, मफिन्स, कुकीज, कप केक आदि में सैचुरेटेड और ट्रांस फैट की मात्रा ज्यादा होती है जो पित्ताशय के लिए सही नहीं होता है।

2. प्रोटीन ले सीमित मात्रा में- जानवरों में पाए जाने वाले प्रोटीन से कैल्शियम स्टोन और यूरिक एसिड स्टोन के होने का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए गॉल ब्लैडर को ठीक रखने के लिए प्रोटीन की मात्रा को कंट्रोल रखना चाहिए।


3. मीठी चीज़े- मीठी चीजे ज्यादा खाने से कोलेस्ट्रोल ज्यादा बढ़ता है, इसलिए मीठी चीज़े ज्यादा नहीं लेना चाहिए।


4. गर्भनिरोधक दवाइयां गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन ज्यादा करने से गाल ब्लैडर में दिक्कत आने लगती है और पथरी का चांस बढ़ जाता है।


5. कॉफी- ज्यादा कॉफी के सेवन से गॉल ब्लैडर में दिक्कत आने लगती है, इसलिए अगर गाल ब्लैडर में स्टोन है तो काफी ज्यादा न ले।

गाल ब्लैडर पथरी होने के लक्षण-

कई बार तो पित्त की थैली में पथरी होने का कुछ पता ही नही चलता लेकिन फिर भी कुछ ऐसे लक्षण है जिससे आप जान सकते हैं।

-बदहजमी होना

-खट्टी डकार आना

-पेट फुलाने की दिक्कत

-एसिडिटी होना

-पेट में भारीपन लगना

-उल्टी आना

-पसीना आना

यह रोग 30 से 50 साल की महिलाओं में ज्यादा होता है।

अगर पित्त की थैली में इंफेक्शन होता है या स्टोन नली में फंस जाता है तो पेट के ऊपरी दाएं भाग में, छाती की हड्‌डी के नीचे, पेट के बीच में अचानक तेज और गहरा दर्द होना, कमरदर्द और दाएं कंधे में दर्द होना जैसे चीज़े होती हैं।

गॉल ब्लैडर स्टोन होने के नतीजे गंभीर होने के साथ साथ खतरनाक भी हो जाता है

1. पित्त की नली में पथरी होने से पीलिया होने का डर रहता है।

2. इससे पेट की झिल्ली का रोग हो सकता है।

3. पेनक्रियाटाइटिस हो सकता है।

4. गॉल ब्लैडर में कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है।


अगर गॉल ब्लैडर स्टोन के निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी होता है-

> पेट में दर्द इतना ज्यादा हो, कि आप सीधे न बैठ पाएं।

> त्वचा और आंखों के सफेद भाग और त्वचा में पीलापन आना।

> पेट में दर्द के साथ तेज बुखार आना या उल्टी होना।

गर्भावस्था और पित्ताशय की थैली पर प्रभाव

गर्भावस्था में शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे पित्त में कोलेस्ट्रोल बढ़ने लगता है। इसके अलावा, प्रेगनेंसी में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स भी बढ़ने लगता है जिससे पित्ताशय पर असर पड़ता है। इसलिए गर्भावस्था में पित्ताशय से जुड़ी समस्या अधिक होने लगती है।

प्रेगनेंसी में पित्ताशय की पथरी होने का कारण

पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में पित्त में पथरी की समस्या ज्यादा होती है। ऐसे ही गर्भावस्था में पित्ताशय की पथरी होने के कई कारण होते हैं-

-गर्भावस्था में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने से।

-पित्ताशय में पित्त को पूरी तरह से खाली न कर पाना।

-अधिक वजन या मोटापा होना।

प्रेगनेंसी में पित्ताशय के स्टोन के लक्षण

पित्त की पथरी के कोई सामान्य लक्षण नहीं होते हैं। इसलिए इसको पहचानने के लिए रूटीन एक्स-रे या दूसरे टेस्ट की जरूरत पड़ती है। लेकिन पथरी का आकार अगर बड़ा हो तो निम्न लक्षण देखने को मिल सकते हैं:

- पेट के ऊपरी या बीच में दर्द होना। यह दर्द 30 मिनट के लिए हो सकता है।

- बुखार आ सकता है।

- त्वचा में पीलापन आना।

- मल का रंग मिट्टी जैसा होना।

- उल्टी होना।

प्रेगनेंसी और पित्ताशय में स्टोन का टेस्ट

1. Ultrasound– ये एक इमेजिंग टेस्ट है और इससे छोटे गॉल स्टोन का पता लग सकता है और ये गर्भावस्था में बिल्कुल सुरक्षित है।


2. Abdominal CT scan– यह भी एक इमेजिंग टेस्ट है, जिसमे कम्प्यूटर की स्क्रीन पर पेट के अंदरूनी भाग का चित्र आ जाता है।

3. Endoscopic Retrograde Cholangiopancreatography– इस टेस्ट से पित्त की नलिकाओं में रुकावट पैदा करने वाली पथरियों का पता चलता है। इससे पित्ताशय की पथरी को हटाया भी जा सकता है। और गर्भावस्था में यह टेस्ट बिल्कुल सुरक्षित है।

4. Gallbladder Radionuclide scan- इस टेस्ट में पित्ताशय में ब्लॉकेज और लीकेज को देखने में मदद मिलती है। इस टेस्ट से पित्ताशय की सूजन और इन्फेक्शन का भी पता लगता है।

5. Endoscopic ultrasound – यह एक इमेजिंग टेस्ट है। इससे पाचन तंत्र के अंदर और आसपास के अंगों को देखा जा सकता है। गर्भावस्था में यह टेस्ट बिल्कुल सुरक्षित है।

6. Magnetic resonance cholangiopancreatography– यह भी एक इमेजिंग टेस्ट है और मैग्नेट की सहायता से पित्त और पैनक्रियाज की समस्याओं का पता चलता है।

7. Percutaneous transhepatic cholangiogram– ये टेस्ट पित्त नलिकाओं का एक्स-रे लेने के लिए किया जाता है। गर्भावस्था में ये थोड़ा कम सुरक्षित होता है, लेकिन पथरी की दिक्कत को देखते हुए डॉक्टर इस टेस्ट को करने को कह सकते हैं।


कुछ अन्य ब्लड टेस्ट–


1. Bilirubin blood test

2. Liver function test

3. Complete blood count

4. Pancreatic enzyme


पित्ताशय की पथरी और गर्भावस्था में होने वाली दिक्कतें–


- गर्भपात का खतरा रहता है।

- भ्रूण में दिक्कतें आ सकती है।

- समय से पहले प्रसव हो सकता है।

- बच्चे और मां दोनों के लिए मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है।

- पित्ताशय में सूजन की दिक्कत हो सकती है।

- इंफेक्शन और पीलिया का खतरा रहता है।

- पित्ताशय में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।


गर्भावस्था में स्टोन से बचाव

पित्ताशय की पथरी ना हो, इसके लिए स्वस्थ खानपान जरूरी है। इसके साथ साथ फिजिकल एक्टिविटी करना भी जरूरी है, जिससे वजन संतुलित रहने में मदद मिलती है। गर्भावस्था में गॉल ब्लैडर स्टोन से बचाव के तरीके

- फाइबरयुक्त खाद्यपदार्थ का सेवन करना जैसे – फल, सब्जियां, बीन्स, मटर, भूरे चावल, ओट्स और गेहूं।

- चीनी का सेवन कम करें।

- ऑलिव ऑयल और फिश ऑयल का इस्तेमाल ज्यादा करें।

- अनहेल्दी फूड जैसे डेसर्ट और तली भुनी चीजों से बचें।


प्रसव के तुरंत बाद पित्त पथरी विकसित होना आम है?

हां, प्रसव के बाद, पहले साल में पित्त पथरी होने के चांसेज बहुत ज्यादा रहते है।

गर्भावस्था के दौरान छोटी-छोटी चीजों का ख्याल रखना जरूरी होता है क्योंकि इस समय महिलाओं में बहुत सारे हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। जिसकी वजह से गॉल स्टोन हो सकता है, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। अगर सही समय पर इसकी पहचान कर ली जाए, तो इलाज से ये ठीक हो सकता है।

पित्ताशय में पथरी को ठीक करने के तरीके

पित्ताशय में पथरी को ठीक करने के लिए जीवनशैली और आहार में बदलाव लाना जरूरी है जैसे-

खानपान-

- गाजर और ककडी के रस को पीने से पित्त की पथरी ठीक होती है।

- सुबह खाली पेट नींबू का रस पीने से एक सप्ताह में लाभ होता है।

- शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी और शक्कर वाले पेय पदार्थ से बचने की कोशिश करें।

- नाशपाती खूब खाना चाहिए, ये पित्त की पथरी के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है।

- विटामिन-सी वाली चीज ज्यादा खानी चाहिए, यह गॉलब्लैडर की पथरी दूर करने में मदद करता है।

- हरी सब्जियां और फल ज्यादा खाना चाहिए। इसमें कोलेस्ट्रॉल कम होता है।

- रोज एक चम्मच हल्दी खाए, इससे पथरी दूर होती है।

क्या नहीं खाना चाहिए-

- अंडे नहीं खाने चाहिए।

- तली भुनी चीजे ज्यादा नहीं खानी चाहिए।

- मीट, लाल मांस, सूअर का मांस और चिकन आदि मांसाहारी चीजे नहीं खानी चाहिए।

- प्रोसेस्ड फूड जैसे चिप्स, कुकीज, डोनट्स, मिठाई या मिश्रित पैक वाले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।

- व्हाइट ब्रेड, पास्ता, सफेद चावल और चीनी नहीं खानी चाहिए।

- डेयरी प्रोडक्ट ज्यादा नहीं लेना चाहिए, अगर ले तो कम फैट वाले ले।

जीवनशैली-

व्यायाम- नियमित व्यायाम करने से कोलेस्ट्रॉल घटता है, इसलिए प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए। ये पित्ताशय में पथरी होने के खतरे होने को कम करता है।

योग- योग से भी आप पित्ताशय के पथरी से बच सकते है इसके लिए आप नीचे दिए हुए योग रोज करिए, इससे आपको जरूर फायदा मिलेगा

-सर्वांगासन

--शलभासन

-धनुरासन

--भुजंगासन


सर्जरी ही क्यों जरूरी है-

गॉल ब्लैडर स्टोन का एक ही इलाज है और वो है सर्जरी। सर्जरी आजकल दूरबीन विधि से होती है इसलिए इसके लिए सिर्फ एक दिन का समय चाहिए होता है। और सर्जरी के तीसरे से चौथे दिन बाद से अपने रुटीन वर्क में आ जाता है।


पित्ताशय की पथरी के घरेलू नुस्खे-

1. एप्पल सिडार विनेगर- एक गिलास सेब के रस में सेब साइडर सिरका मिलाकर रोज दिन में एक बार लें। इससे पथरी ठीक होने में मदद मिलती है।

2. नाशपाती - नाशपाती में पेक्टिन नामक तत्व होता है जो पथरी को नरम बनाता है और शरीर से आसानी से बाहर निकालने मदद करता है।

3. चुकंदर, खीरा और गाजर का रस- चुकंदर का रस, खीरे का रस और गाजर के रस को बराबर मात्रा में मिला कर पीना चाहिए। यह पेट और खून की सफाई में मदद करता है।

4. सिंहपर्णी- सिंहपर्णी के पत्ते शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।

5. पुदीना- इसमें टेरपिन नाम का तत्व पाया जाता है जो पथरी को तोड़ता है। इसलिए आप इसे रोज ले सकते हैं।

6. इसबगोल- इसबगोल फाइबर का अच्छा स्रोत है जो पथरी बनने को रोकने में मदद करता है।

7. नींबू- नींबू का रस सिरके का काम करता है और लीवर में कोलेस्ट्रॉल को बनने से रोकता है। इससे ये पथरी को रोकने में मदद करता है।

8. लाल शिमला मिर्च- एक लाल शिमला मिर्च में बहुत अधिक मात्रा में विटामिन-सी होता है, यह पथरी को रोकने में मदद करता है। इसलिए अपने खाने में शिमला मिर्च को शामिल करें।

9. साबुत अनाज- साबुत अनाज और अन्य अनाज को अपने आहार में शामिल करें। ये पथरी को बनने से रोकने में मदद करता है।

10. हल्दी- हल्दी में एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेट्री तत्व होते है जो पथरी को तोड़ने में मदद करती है।

पित्ताशय की पथरी से जुड़े कुछ सवाल

प्रश्न 1. पित्त की पथरी क्यों बनती है?

यदि पित्ताशय के अंदर पित्त में कोलेस्ट्रॉल घुल नहीं पाता है तो यह धीरे धीरे पत्थर का आकार ले लेता है। इसके अलावा अगर पित्त में बिलीरुबिन ज्यादा होता है, तो यह पत्थर बनाने लगता है।

प्रश्न 2. पित्त कहाँ बनता है?

पित्त लीवर में होता है। पित्त भोजन में फैट को पचाने में मदद करता है और ये पित्त पित्ताशय में जाकर इकट्ठा होता है।

प्रश्न 3. पित्तशामक आहार क्या क्या है?

पित्त को कम करने वाले आहार दूध व उससे बनी चीजें, चावल, मिठाई, ठंडा पानी, केला, सेब, अनार, अंगूर, आंवला, लोकी, करेला, मैथी, परवल व हरी पत्ते वाली सब्जियां हैं।

प्रश्न 4. क्या पत्थर बनने के कोई विशेष कारण होते हैं?

40 वर्ष की आयु से अधिक महिलाओं में मोटापा, खराब जीवन शैली, अत्यधिक वसा वाले आहार, मधुमेह और पारिवारिक इतिहास में इसके होने की उम्मीद ज्यादा रहती है।

प्रश्न 5. पित्त पथरी लक्षण क्या हैं?

पेट के दाहिने हिस्से के नीचे दर्द होना, पेट में भारीपन, मतली और उल्टी लगना, पीलिया, तेज बुखार आदि ये सब लक्षण पित्त के पथरी के हैं।

प्रश्न 6. पित्त की पथरी का इलाज किनको जरूरी है?

जिन लोगो को दर्द, बुखार, पीलिया, अग्नाशय में सूजन है, उन लोगो को इलाज करवाना चाहिए।

प्रश्न 7. क्या पित्त की पथरी बनने के खतरे को कम कर सकते है?

हाँ बिल्कुल, एक उचित वजन बना रहे, नियमित व्यायाम करें और कम कैलोरी वाला खाना खाए, तो पथरी बनने के खतरे को कम किया जा सकता है।

प्रश्न 8. क्या ज्यादा स्टोन से गाल ब्लैडर फटने का खतरा होता है?

हा, अगर स्टोन ज्यादा हों तो गॉल ब्लैडर के फटने का खतरा रहता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Below Post Ad

Hollywood Movies