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इस्लाम में ईद साल में दो बार मनाई जाती है। जिसमें से ये पहली ईद है

रमजान महीना खत्म होने के बाद मुसलमान ईद उल-फितर का पर्व मनाते हैं। इस त्योहार को सभी धूमधाम से मनाते हैं और खुदा से सुख-शांति और बरक्कत की दुआएं मांगते हैं। इसमें ईद का चांद दिखने के अगले दिन ये पर्व मनाया जाता है। इस बार ये त्योहार 13 या 14 मई को मनाया जा सकता है। अगर चांद 12 मई को दिखाई देता है तो ईद 13 मई को होगी और अगर 13 मई को चांद दिखता है तो ये 14 मई को मनाया जाएगा।


ईद मनाने का कारण: इस्लाम में ईद साल में दो बार मनाई जाती है। जिसमें से ये पहली ईद है और दूसरी ईद बकरीद कहलाती है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार पैगम्बर मुहम्मद ने सन् 624 ईसवी में जंग-ए-बदर के बाद पहली ईद उल-फ़ितर मनायी थी। इसलिए ईद उल फित्र के अवसर पर मुसलमान पूरा एक महीना अल्लाह की इबादत करते हैं और रोज़ा रखते हैं। और दूसरे ईद रमजान के महीने में कुरान की तिलावत करके अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं और रमजान खत्म होने के बाद बड़े हर्ष उल्लास से ईद मनाते हैं।

महत्व: ईद भाई चारे व आपसी मेल को बढ़ाने का त्योहार है। इस दिन लोग एक दूसरे के गले मिलकर ईद की बधाई देते हैं। ईद उल-फितर में ग़रीबों को फितरा दिया जाता है। जिससे ग़रीब लोग भी अपनी ईद मना सकें, नये कपडे पहन सकें। रोजे की समाप्ति के बाद ईद के दिन मुसलमान अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं। इनके ईद के त्योहार का सबसे महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ सेवई है।

ईद के दिन सुबह से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। और ईद में मस्जिदों में सुबह की प्रार्थना करने से पहले हर मुसलमान को दान देना होता है, जिसे ज़कात उल-फ़ितर कहते हैं।

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