Type Here to Get Search Results !

ल्यूकोरिया क्या है, इस रोग का मूल कारण क्या है, उपचार क्या है

इसे हिंदी में श्वेत प्रदर कहा जाता है या सफ़ेद पानी की समस्या भी कहते हैं। अंग्रेजी में इसे ल्यूकोरिया (Leukorrhea ) या व्हाइट्स डिस्चार्ज कहते हैं। यह महिलाओं से सम्बंधित समस्या है।

What is Lukoriya ल्यूकोरिया क्या है What is White Discharge व्हाइट डिस्चार्ज क्या है


स्त्री शरीर को हर महीने मासिक धर्म होता है जो 3 से 6 दिन तक रहता है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। जब यह 6 दिन से अधिक समय रक्तश्राव होता रहता है, तो बिगड़ कर प्रदर रोग का रूप धारण कर लेता है।

योनि मार्ग से प्रदर का श्लेष्मिक स्राव नीला गुलाबी सफ़ेद लाल हरा पीला गदा पतला मास के छिछड़े सहित फेनदार लसीला बिना बदबू का बदबूदार कई रूप रंग का होता है।
इस रोग को श्वेतप्रदर या ल्यूकोरिया कहते हैं।

इसके अनेक कारण है और उपचार से यह पूर्ण रूप से ठीक हो जाता है। यदि समय रहते इसे ठीक नहीं किया गया तो या महिला के पूरे स्वास्थ्य को बर्बाद कर देता है। सफ़ेद पानी का निकलना दो प्रमुख कारणों से होता है।

स्वाभाविक रूप से - स्त्रियों में सफ़ेद पानी का निकलना स्वाभाविक रूप से कुछ मात्रा में होता है ऐसा मासिक धर्म से पहले मासिक धर्म के बाद या सेक्स करने की इच्छा उत्पन्न होने पर कुछ मात्रा में होता है। यह स्वाभाविक रूप से होता है इसमें उपचार की कोई आवश्यकता नहीं होती।

बीमारी के कारण - स्त्री योनि से असामन्य रूप से सफ़ेद पानी का निकलना, या लाल, पीला गाड़ा, पतला, लसीला बिना बदबू का या बदबूदार कई रूप रंग का होता है। जिसके कारण महिलाओं का स्वास्थ्य बहुत कमजोर हो जाता है। गुप्तांगों से पानी जैसा बहने वाला यह स्राव कोई बीमारी नहीं है, पर यह योनि या गर्भाशय की बीमारी के लक्षण अवश्य है या प्रजनन अंगो में संक्रमण का संकेत अवश्य है।
यंहा पर आपको इस समस्या से निपटने की सम्पूर्ण जानकारी मिलेगी।

ल्यूकोरिया की वजह से आपको ऐसा महसूस हो सकता है

हड्डियाँ कमजोर हो जाएँगी
उठते बैठते चक्कर आते हैं
मासपेशिया कमजोर हो जाती हैं
योनि से अधिक स्राव होने पर पेड़ू में दर्द और भार जैसा लगता है।सिर में चक्कर आते हैं शरीर और हाथ पैरों में दर्द होने लगता है।

उल्टी आने की संभावना सी लगती है।
कमजोरी बहुत बढ़ जाती है।
स्त्री का सौंदर्य नष्ट हो जाता है।मुँह सूज सा जाता है

आंखों के चारों तरफ काला घेरा बढ़ जाता है।
शरीर पीला पड़ जाता है।
शरीर पर झुर्रियां पड़ जाती हैं।किसी का शरीर ढीला और किसी का दुबला पतला हो जाता है।

सारे शरीर में थोड़ा दर्द रहने लगता है।
आंखों और हथेलियों और पांव के तलवों में जलन होती है।
कब्ज या पेट में गेस या एसिडिटी भी को सताने लगते हैं।भूख मर जाती है।

योनि में खाज दाद एवं सूजन आ जाती है।
सहवास के समय दर्द होता है।
पेशाब में जलन होती है।किसी काम में मन नहीं लगता।

मिजाज चिड़चिड़ा हो जाता है ।
सांस फूलने लगती है।
दिल की धड़कन का रोग हो जाता है।

प्रदर के स्राव से योनि मार्ग से मवाद निकलने लगता है।
हिस्टीरिया या टीवी जैसे रोग उत्पन्न हो जाते हैं
गर्भ नहीं ठहरता
स्त्री बांझ तक हो जाती है।

इसलिए समय रहते इस रोग को ठीक कर लेना चाहिए। यदि इस रोग को ठीक करने पर आप पूरा ध्यान दे देते हैं तो यह शीघ्र ही ठीक भी हो जाता है। इसे लंबा नही खीचना चाहिए।

इस रोग का मूल कारण

अब सोचो कि नीचे दिए कारणों में से ऐसे कोनसे कारण है जो आपसे मिलते हैं। उन कारणों को तत्काल छोड़िये।

ल्यूकोरिया या व्हाइट डिस्चार्ज का मुख्य कारण प्राकृतिक जीवन न जीना है।
अप्राकृतिक भोजन पीजा, बर्गर, पेस्ट्री, कस्टर्ड, चाट, ज्यादा मसाले वाले पदार्थ,चाउमीन, पैक्ड फ़ूड, मैदा की चीजो का इस्तेमाल तत्काल बंद कर दें।
गंदी आदतें, पोर्न साइट अथवा अश्लील द्रश्यों को देखना
मासिक स्राव के समय मैथुन करना।
अत्यधिक सहवास करना
दवाओं का अधिक सेवन,, दिन में सोना ,अजीर्ण और कब्ज आलस्य अकर्मण्यता, मासिक धर्म की बीमारियां
माता पिता से वंशानुगत बचपन में कन्या को को यह हो जाता है जिसे बचपन का श्वेत प्रदर या अंग्रेजी में इम्फेन्टाइल ल्यूकोरिया कहते हैं।

Natural treatment of white discharge प्राकृतिक उपचार

रोग की चिकित्सा आरंभ करने से पहले सर्वप्रथम यह जानना जरूरी है कि जिन कारणों से हुआ है उन कारणों को संभवत दूर कर दिया जाए और पूरे परहेज से रहा जाए। अपने योनि के आस पास सफाई का पूरा ध्यान रखें।

हवादार सूती वस्त्र के अंडरगार्मेंट्स का प्रयोग करें
अपनी स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें
जब भी वाशरूम जाएँ तो नीचे के एरिया को अच्छे से साफ करें साफ सूती कपडे से पोंछे
अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं
सेक्स करने के बाद पेशाब करें नीचे के एरिया को साफ करके सुखा लें
कब्ज न होने दें

श्वेत प्रदर की वजह से यदि गर्भाशय या योनि में सूजन या घाव आदि हो गया है। तो सबसे पहले उसे मिटाने का प्रयत्न करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले 7 दिनों तक नियमित हल्के हल्के गर्म पानी का डूस योनि मार्ग में देना चाहिए। नीम के पत्तों को गर्म करके छानकर दिया जाय तो बहुत अच्छा। सात दिनों तक लगातार डूस देने के फिर सप्ताह में तीन बार डूस देना चाहिए। फिर अगले सप्ताह में दो बार देना चाहिए और उससे अगले सप्ताह में एक बार डूस देना चाहिए।

रोगिणी को आरंभ में शक्ति के अनुसार 3 से 7 दिन तक उपवास रस आहार या फलाहार आदि करना चाहिए। इन दिनों 7 दिनों तक एनिमा भी लेना चाहिए।

White Discharge ke liye ayurvedik upchar आयुर्वेदिक उपचार

1 शीशम के पत्तों को खाने से ल्यूकोरिया या व्हाइट डिस्चार्ज की समस्या पूरी तरह ख़तम हो जाती है एक पूर्ण सफल प्रयोग है। आठ दस शीशम के पत्ते लें, उनको घोटकर के पीसकर के पानी में मिला लें और उसे सुबह शाम पियें।
2. चंद्रप्रभावटी की एक गोली प्रतिदिन एक महीने तक
3.आवंले का जूस

Allopathy Treatment Of white discharge


इसके लिए आपको योग्य महिला चिकित्सक गायनोकोलॉजिस्ट के पास जाएँ। जाने के बाद डॉक्टर आपका परिक्षण करेगा जिससे यह पता चलेगा की आपको किस प्रकार का इन्फेक्शन है।

शारीरिक व्यायाम एवं आसान

कपालभाति प्राणायाम बहुत ही जबरजस्त और प्रभावकारी होता है।
सुबह शौच आदि से निवृत्त होकर आसान एवं व्यायाम करें। सबसे सरल व्यायाम तो मॉर्निंग वॉक है। उसके बाद आकर के आप आसन करने हैं।
आसनों में सर्वांगासन, पादपश्चिमोत्तानासन, भुजंगासन, हलासन विशेष रूप से लाभप्रद होते हैं। सुबह शाम खुले मैदान में वायु सेवन करना। हल्की कसरत करना।

भारत में लिकोरिया या वाइट डिस्चार्ज की वजह से बहुत बड़ी संख्या में महिलाएं पीड़ित है । इसलिए शर्म और झिझक को छोड़कर आपको चिकित्सक के द्वारा परामर्श लेकर अथवा स्वयं इस रोग से निजात पा लेना चाहिए।

वैसे भी यह रोग एक प्रकार से बहुत ही ग्लानि वाला रोग है, क्योंकि यदि आप कंही बैठे हैं और वहां आप योनि को खुजाए जा रहे हैं तो देखने वाले लोंगों को बड़ा ही भद्दा लगता है। आपको लगे न लगे दूसरे लोग बड़ा बुरा फील करते हैं।

खाने में कोनसी चीजो का प्रयोग करें।

केला, अंजीर, आंवला, गाजर, मूली, चुकंदर, मेथी, जामुन, नीबू, पका आम,


ल्यूकोरिया को जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य लें

आप यह लक्ष्य लें कि 1 महीने के अंदर मुझे इस बीमारी से पूर्ण रूप से मुक्त होना है। जो भी ऊपर बताये नियम है। चाहे वह खाने पीने के हों या सही दिनचर्या के, उनका पूरी लगन से पालन करना है।

कुछ लोंगो की आदत होती है कि हम करेंगे कुछ नही, और न ही हम अपने आहार विहार में कोई परिवर्तन करेंगे। बस कोई गोली दे दो जिससे हम तुरंत ठीक हो जाएं। इस बात को आप निश्चित मान लो यदि आपने अपने आहार-विहार रहन-सहन खान-पान में परिवर्तन नहीं किया तो गोलियों से ठीक होने वाले नही हैं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Below Post Ad

Hollywood Movies