रविवार

इस रात की भी सुबह होगी ...

इस रात की भी सुबह होगी ...

प्यारे दोस्तों,
कोविड महामारी की दूसरी लहर इतनी भयावह होगी, किसी ने भी कल्पना नहीं की थी। हम अपने जीवन के बेहद ख़राब दौर, या यूँ कहें कि, सबसे ख़राब दौर से गुज़र रहे हैं। आस-पास के लोगों, नाते-रिश्तेदारों, मशहूर हस्तियों; सब ओर से बुरी ख़बरें आ रही हैं। अस्पतालों में बेड, ऑक्सिजन सिलिंडर, कुछ जीवनरक्षक दवाओं की मारामारी है। किसने सोचा था कि मानवता इस दु:खद दौर से भी कभी गुज़रेगी। 



माना कि हालात बेहद नाज़ुक हैं। पर आप और हम अगर कुछ पल ठंडे दिमाग़ से सोचें, तो पाएँगे कि ज़्यादा तनाव लेने या निराश होकर बैठ जाने से निश्चय ही कोई समाधान निकलने वाला नहीं है। मुझे आज किसी कवि की ये पंक्तियाँ बहुत प्रासंगिक लगती हैं:-

मुहब्बत के शहर का आबो-दाना छोड़ दोगे क्या,
जुदा होने के डर से दिल लगाना छोड़ दोगे क्या,
ज़रा सा वक़्त क्या गुज़रा, चेहरों पर उदासी है,
ग़मों के ख़ौफ़ से तुम, मुस्कुराना छोड़ दोगे क्या?

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अगर हम इसी तरह सावधानियाँ बरतते हुए, मास्क और सोशल डिसटेंसिंग का ध्यान रखते रहे, तो महीने भर में केस घटने लगेंगे।

अतः मेरा आप सबसे विनम्र निवेदन है कि -

- लक्षणों की शुरुआत में ही सतर्क हो जाएँ। आरटी-पीसीआर टेस्ट कराएँ और रिज़ल्ट का इंतज़ार किए बग़ैर डॉक्टर की सलाह लेकर लक्षणों का उपचार शुरू कर दें। थर्मामीटर से तापमान और पल्स-आक्सीमीटर से ऑक्सिजन सेचुरेशन नापते रहें। आवश्यकता पड़ने पर या लक्षण गम्भीर होने पर डॉक्टर आपको ब्लड टेस्ट या चेस्ट- सीटी स्कैन की सलाह दे सकते हैं। डॉक्टर के कहने पर टेस्ट तत्काल कराएँ। सतर्क रहेंगे तो अस्पताल जाने की आवश्यकता बिलकुल नहीं पड़ेगी। नीम-हकीमों और अंधविश्वासों से एकदम दूर रहें।

- एक-दूसरे की मदद करें। ‘परस्परोपग्रहो जीवानाम’ के मंत्र के अनुरूप इस बुरे वक़्त में एक-दूसरे का साथ निभाएँ। बीमार व्यक्ति और उसके घर वालों के सम्पर्क में रहें। उनसे बात करके उनका मनोबल बढ़ाते रहें।

- अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। ख़ुद स्वस्थ रहेंगे, तभी अपनों की और किसी और की मदद कर पाएँगे।

- कभी-कभी सही समय पर सही सूचना किसी के लिए बड़ी मदद हो सकती है। पर सही सूचना ज़रूरी है। अतः अति उत्साहवश ग़लत सूचनाएँ फ़ॉर्वर्ड न करें।

- ‘प्रोनिंग’ (पेट के बल लेटकर गहरे साँस लेना) की विधि का प्रयोग करें और अपने आस-पास के लोगों को बिना मिले, फ़ोन या वीडियो कॉल पर समझाएँ।


- शादियों में, या कहीं भी भीड़ में जाने से बचें प्लीज़।


- यथासम्भव पढ़ाई-लिखाई जारी रखें। सकारात्मक बने रहें। न ख़ुद उदास रहें, न किसी और को उदास रहने दें।


फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने लिखा है-
‘दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है’

आपका
योगेन्द्र भरंगर

7 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

प्रिय योगेंद्र भाई आपकी पोस्ट बहुत सकारात्मक सोच के साथ लिखी है आपने अगर हम सब इसी सकारात्मक सोच को अपना लेंगे तो इस कठिनाई के दौर से उबर जाएंगे सभी लोगो से विनम्र अनुरोध है कि कृपया इस महामारी के दौर में संयम रखें व एक दूसरे के पूरक बनें ।अनर्गल अफवाहों पर ध्यान न दें जव बहुत आवयश्कता को तभी बाहर निकलें घर पर रहे सुरक्षित रहें ईश्वर पर भरोसा रखें सब अच्छा होगा इसी विश्वास के साथ अपनी सोच सकारात्मक रखें।

अनाम ने कहा…

Very Nice

अनाम ने कहा…

Nice

Neeraj ने कहा…

Good

Yogendra Bharangar ने कहा…

Thanks Adarniy

Yogendra Bharangar ने कहा…

Thanks

Yogendra Bharangar ने कहा…

Thanks

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