बुधवार

ईको फ्रेंडली हॉउस, जिसमें ये दंपत्ति रहती है फिट & फ़ाईन

आए दिन सभी को कोई ना कोई बीमारी लगी ही रहती है, कभी छोटी तो कभी बड़ी बीमारियाँ। आप को ऐसा कोई नहीं मिलेगा जो ये कह दे की उसे 1साल से कोई भी बीमारी नहीं हुई।


eco friendly house


लेकिन आज हम आपको एक ऐसे कपल की कहानी बताने वाले हैं, जो 17 सालों से बीमार हुए ही नहीं और ना ही कभी दवाई लेने की जरूरत पड़ी। इसके पीछे का राज़ है उनका Eco Friendly House और उनकी Healthy Lifestyle.

हरी और उनकी पत्नी आशा को प्यार है नेचर से

ये दोनों प्रकृति से बहुत प्यार करते हैं। और ये प्रकृति प्रेम हम उनकी लाइफस्टाइल में देख सकते हैं। जब इनकी शादी हुई थी, तो इन्होंने शादी में कई प्रकृति प्रेमियों को बुलाया था।

आर्किटेक्ट दोस्त से बनवाया मिट्टी का घर

उन दोनों ने मिलकर फ़ैसला किया कि वे एक ऐसा घर बनवाएंगे जो ऊर्जा से भरपूर तो होगा ही, साथ ही प्रकृति के पास भी हो। फिर उन्होंने अपनी ये सोच आर्किटेक्ट फ्रेंड को बताया, जिसने उनकी मदद की और हरी और आशा का ड्रीम हाउस बन गया। उनका यह घर 960 sq. ft. है, जो कि केरल  राज्य के कन्नूर  जिले में बना है। इसकी खासियत यह है की ये घर मिट्टी से बनाया गया है।

जानिए इस घर की खासियत…

दिन के समय सूर्य की किरणें घर के अंदर आती हैं, पर घर के अंदर की हवा के कारण घर दिन में गर्म नहीं होता और रात में ठंडी हवा चलने लगती है जिसकी वज़ह से इस घर में पंखे की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। केरल में बारिश ज़्यादा होती है, इसलिए मकान की छत कॉनक्रीट और नालीदार टाइल से बनी हुई है।

उनके इस मकान में बिजली का उपयोग बहुत ही कम किया जाता है। जब उन्होंने यह मकान बनवाया था तब प्रकाश की व्यवस्था कुछ इस तरह से की थी कि हर एक लैंप को ऐसे लगाया जिससे ज़्यादा दूरी तक रौशनी रहे।

भोजन को ताज़ा रखने का खास तरीका

इन्होंने अपने घर में फ्रिज नहीं रखा हुआ है। जब इन्हें किसी चीज को ज़्यादा वक़्त तक अच्छा और ताज़ा रखना हो तो उसके लिए उन्होंने एक अलग टेक्निक का यूज किया है। उन्होंने अपने किचन के एक कोने में ईंटो की एक दीवार बनाई है उस दीवार के अंदर एक चौकोर स्थान बनवाया, जिसमें अंदर की तरफ़ एक मिट्टी का घड़ा रख दिया। इस घड़े में जब खाना रखा जाता है तो वह करीब एक हफ्ते तक खराब नहीं होता, क्योंकि इसके चारों और रेत ढंकी जाती है। यह टेक्निक खाना अच्छा रखने में बहुत मददगार होता है।

बिजली की खपत होती है कम

हरि और आशा ने मकान में सोलर पैनल भी लगवा रखा है। घर से जो भी कचरा और माल निकलता है उससे बायोगैस बना ली जाती है फिर उसी का उपयोग वे अपने घर में भी करते हैं। साधारणतया किसी घर में बिजली की करीब 50 यूनिट तक खपत होती है, परंतु इनके घर में 1 महीने में केवल 4 यूनिट बिजली ही इस्तेमाल की जाती है। इन्होंने अपने घर में कई इलेक्ट्रिक उपकरण जैसे टीवी, कम्प्यूटर, मिक्सर इत्यादि भी रखे हुए हैं, लेकिन यह ऊर्जा का अच्छे तरह से उपयोग करते हैं।

जंगल के बीचों बीच बसा है उनका सपनों का घर

उनका यह सपनों का घर जंगल के बीचों-बीच बसा हुआ है। इस जंगल में बहुत-सी तितलियाँ, चिड़ियाएँ, पशु पक्षी रहते है। वो अपनी ज़मीन में बहुत सारे फल और सब्जियाँ को भी उगाते हैं।

17 सालों से नहीं पड़ी जरूरत कभी दवा की

हरि और आशा का कहते है कि उनके नेचर फ्रेंडली लाइफस्टाइल से उनको बहुत फायदा मिलता है। प्रकृति के बीच रहने से उन्हें स्वच्छ वातावरण और हवा-पानी मिल रहा है जिससे वे कभी बीमार नहीं पड़े और 17 सालों से किसी भी तरह की दवाई भी नहीं खाई। वो लोग प्राकृतिक रूप से उगाया गया भोजन ही खाते हैं।

हरि ने कहा कि उन्हें कभी सर्दी-जुकाम हो भी जाता है तो वो पेय पदार्थों का सेवन, रेस्ट करने से उनका शरीर फिर से ठीक हो जाता है। लेकिन हर आदमी, हरि और आशा की तरह जंगल बनाकर नहीं रह सकतें है, लेकिन उनकी लाइफस्टाइल से हम कुछ चीज़े तो अपना ही सकते हैं, जैसे प्रकृति के साथ मिलकर रहना और सादा, व्यवस्थित जीवन गुजारना।





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