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लो ब्लड प्रेशर (low blood pressure) को हाइपोटेंशन (hypotension)

आज की बिजी और गलत लाइफस्टाइल, खाने पीने की खराब आदतें, तनाव और खराब वातावरण के वजह से लोगों को बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इसी वजह से कम उम्र के लोग भी कई बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। जिसमें Blood Pressure की समस्या भी आम बन चुकी है। बीपी की बीमारी इतनी गंभीर समस्या बन चुकी है कि इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है जो शरीर के अंदर दूसरी बीमारियों को भी जन्म देने लगता है।



ब्लड प्रेशर क्या है-

दिल ख़ून को पंप करके पूरे शरीर में पहुंचाने का काम करता है और शरीर को ऑक्सीजन और एनर्जी पहुंचाता है। यही ख़ून धमनियों की दीवारों पर जो प्रेशर डालते है, उसे ब्लड प्रेशर (BP) कहते है।

ब्लड प्रेशर की रीडिंग कैसे करते हैं-

ब्लड प्रेशर, को दो रीडिंग के ज़रिए मापा जाता है सिस्टोलिक और डायस्टोलिक

सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर, ये उस समय की रीडिंग होती है जब शरीर में ख़ून भेजने के लिए दिल पर दबाव बढ़ाता है।

डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर, ये उस समय की रीडिंग होती है, जब हमारा दिल धड़कनों के बीच आराम कर रहा होता है। इन दोनों रीडिंग को एक साथ लिखा जाता है।

ब्लड प्रेशर रीडिंग को समझे कैसे?

अगर ब्लड प्रेशर 90/60 या इससे कम है, तो ये ब्लड प्रेशर है और अगर ब्लड प्रेशर 90/60 से ज़्यादा और 120/80 से कम है, ये नॉर्मल ब्लड प्रेशर है।

आजकल की भागम भाग वाली जिंदगी में ब्लड प्रेशर एक आम बात है। इसमें कुछ लोग हाई ब्लड प्रेशर( high BP) से परेशान रहते है तो कुछ लोग लो ब्लड प्रेशर (low BP) से। एक बात का ध्यान जरूर रखें की ब्लड प्रेशर की समस्या को छोटा न समझें क्योंकि इससे ऑर्गन फैलियर या हार्ट फेलियर होने का खतरा हो सकता है।

लो ब्लड प्रेशर क्या होता है

लो ब्लड प्रेशर (low blood pressure) को हाइपोटेंशन (hypotension) भी कहते हैं। जब दिल , मस्तिष्क और शरीर के अन्य भागों में खून अच्छे से नहीं पहुंच पाता है तो लो बीपी की समस्या आने लगती है। वैसे तो नॉर्मल बीपी 120/80 होनी चाहिए लेकिन जब ये ब्लड प्रेशर 90/60 से नीचे चला जाता है तो उसे लो बीपी की समस्या होने लगती है।

लो ब्लड प्रेशर के प्रकार

1. Orthostatic or Postural Hypotension

इसमें जब बैठने के बाद अचानक से खड़े होते हैं तो ग्रैविटी पैरों में खून जमा देती है, जिससे हल्का सा चक्कर लगने लगता है। ऐसा भी बीपी लो होने की वजह से होता है। आमतौर पर ये बुजुर्गों में ज्यादा होता है, लेकिन युवाओं में भी इसका असर आ जाता है। इसमें किसी खास ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं पड़ती है और अच्छे खानपान से ही ये ठीक हो जाता है।

2. Postprandial Hypotension

इसमें खाना खाने के बाद में बीपी लो होता है। जब पेट और आंत को खाना पचाने के लिए खून का प्रवाह ज्यादा चाहिए होता है लेकिन शरीर ऐसा नही कर पाता है तो ब्लड प्रेशर गड़बड़ा जाता है और बीपी लो हो जाता है।

इसमें कभी कभी अचानक चक्कर आ जाता है और बेहोश होकर गिर भी जाते है जिसकी वजह से चोट भी लग जाती है।

3. Neurally Mediated Hypotension

इसमें व्यक्ति एक दम से घबरा जाता है और बीपी लो हो जाता है। इसकी वजह से कभी कभी अचानक चक्कर भी आ जाता है, जिससे चोट आने का डर रहता है।

4. Severe Hypotension

इसमें अगर व्यक्ति को कोई सदमा लग जाए, चोट पहने से खून ज्यादा निकल जाए, पानी की कमी हो जाए, तो बीपी लो हो जाता है। ये हाइपोटेंशन जान के लिए बहुत खतरनाक होता है। इसलिए इसमें इलाज की जरूरत पड़ती है।

लो ब्लड प्रेशर क्यों होता है

ब्लड प्रेशर लो होने के बहुत सारे कारण होते हैं जैसे की

1. खून की कमी- अगर शरीर में खून की कमी हो जाती है, तो इससे बीपी लो होने की दिक्कत होती है।

2. कमजोरी व पोषण की कमी- अगर शरीर में पोषक तत्वों की कमी है और कमजोरी है तो शरीर लाल रक्त कोशिकाएं सही से नहीं बना पाती जिससे बीपी लो हो जाता है।

3. हृदय रोग- अगर व्यक्ति को किसी तरह का हृदय रोग है तो बीपी लो की समस्या हो सकती है।

4. पानी की कमी- अगर शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो कमजोरी महसूस होने की वजह से बीपी लो हो सकता है और चक्कर भी आ सकते हैं।

5. गर्भावस्था- महिलाओं में गर्भावस्था के समय सर्कुलटरी सिस्टम बहुत तेज़ी से काम करता है, जिसकी वजह से ब्लडप्रेशर कम होने को दिक्कत होने लगती है।

6. दवाइयां- अगर कोई हाई ब्लड प्रेशर की दवा लेने, हार्ट प्रॉब्लम्स, पार्किंसन्स डिसीज, डिप्रेशन की गोलियां या पेनकिलर दवाइयां ज्यादा लेता है तो अचानक बीपी लो हो सकता है।

7. एसिडिटी– जब हमारे पेट के अंदर एसिडिटी पैदा होती है तो पेट में गर्माहट ज्यादा होने लगती है जिसकी वजह से शरीर का पानी जल जाता है। पीनी जलने की वजह से शरीर में कमजोरी आने लगती है और बीपी लो हो जाता है।

लो ब्लड प्रेशर के लक्षण

1. सिर घूमना: अगर आपका सिर घूमता है तो आपको अपना ब्लड प्रेशर चेक करवाना चाहिए क्योंकि ये बीपी लो हो सकता है।

2. बेहोशी: अगर आपका बीपी लो रहता है तो इसकी वजह से बेहोशी की समस्या हो सकती है।

3. नजर कमजोर होना: लो ब्लड प्रेशर होने पर आपकी आंखों की रोशनी कम हो सकती है सिर धुंधला दिखाई दे सकता है।

4. जी मिचलाना: जी मिचलाना लो ब्लड प्रेशर का संकेत है लेकिन जी मिचलाने के और भी कारण होते हैं।

5. थकान: अगर आप बार बार थकान महसूस करते हैं तो यह लो बीपी के कारण हो सकता है।

6. ध्यान केंद्रित ना कर पाना: अगर आपका बीपी लो रहता है तो आपको ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत हो सकती है।

7. भ्रम की स्थिति: कई बार लो ब्लड प्रेशर के कारण भ्रम पैदा होने लगता है। अगर ऐसा है तो डॉक्टर को जरूर दिखाना चहिए।

8. ठंडी और रूखी त्वचा: अगर ब्लड प्रेशर लो होता है तो स्किन रूखी हो सकती है और शरीर ठंडा हो सकता है।

9. सांस का जल्दी जल्दी लेना: कई बार लो ब्लड प्रेशर की वजह से सांस की गति में परिवर्तन हो जाता है।

10. कमजोर नाड़ी: अगर नाड़ी कमजोर रहती है तो इससे बीपी लो हो सकता है।

लो ब्लड प्रेशर से होनी वाली समस्याएं

- किडनी और हार्ट फेलियर हो सकता है।

- नर्वस सिस्टम और ब्रेन डैमेज हो सकता है।

- प्रेग्नेंसी में अगर लो बीपी ज्यादा होता है, तो पेट में बच्चे की मृत्यु हो सकती है।

- स्ट्रोक, डेमेन्शिया, ब्रेन डिसऑर्डर, किडनी डिजीज हो सकते हैं।

- चक्कर आने से गिरने पर गंभीर चोट भी आ सकती है।

- अगर किसी तरह का सदमा लगता है, तो ऑर्गन्स डैमेज हो सकते हैं।

- ब्लड इंफेक्शन के चांसेज बढ़ जाते है।

लो ब्लड प्रेशर से बचने के उपाय

लो ब्लड प्रेशर से बचने के लिए कुछ सावधानिया बरतनी जरुरी है। और इसके लिए जीवनशैली और आहार में बदलाव लाना जरूरी होता है।

जीवनशैली

- अगर आपको लो बीपी की समस्या हो तो एक दम झटके से कभी भी न उठें। इससे चक्कर आने और गिरने का खतरा रहता है।

– हेवी डाइट ना ले, और कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें जैसे आलू, चावल, पास्ता और ब्रेड आदि कम खाइए।

- तनाव नहीं लेना चाहिए, इससे ब्लड प्रेशर बढ़ भी सकता है और घट भी सकता है ।

- लो ब्लड प्रेशर में व्रत नहीं रखना चाहिए और ज्यादा देर तक खाली पेट नही रहना चाहिए।

- 6–8 घंटे की नींद पूरी लें

- रोज कम से कम आठ गिलास पानी पीएं।

- खाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम ले।

- खाने में नमक की मात्रा को बढ़ा दें।

- अगर खाने के बाद ब्लड प्रेशर कम हो रहा है तो खाना थोड़ा थोड़ा करके कई बार में खाएं और खाने के बाद आराम करें।

- खाने में साबूत अनाज, फल, सब्जियां और मछली को शामिल करें।

लो ब्लड प्रेशर के घरेलू उपचार

लो ब्लड प्रेशर की समस्या को ठीक करने के लिए घरेलू उपचार यूज कर सकते है।

कैफीन

कैफीन जैसे चाय या कॉफी ब्लड प्रेशर को बढ़ाने में मदद करता हैं। इसलिए अगर आपका ब्लड प्रेशर कम हो जाए तो आप चाय कॉफी का सेवन करें। इससे ब्लड प्रेशर नार्मल होने में मदद मिलेगी।

तुलसी

हर दिन सुबह पांच से छह तुलसी के पत्तों को खाने से ब्लड प्रेशर नार्मल हो जाता हैं।

किशमिश

किशमिश को रात में पानी में भिगो के रख दें। सुबह अच्छे से चबा-चबा कर खाए।

गाजर

गाजर और पालक का रस मिला कर पीने से लो ब्लडप्रेशर के लिए फायदेमंद होता है।

छाछ

अगर रोज एक ग्लास छाछ पिया जाए तो इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।

दालचीनी

दालचीनी के पाउडर को गर्म पानी के साथ लेने से भी ब्लड प्रेशर ठीक रहता है।

आंवला का रस

लो बीपी के कारण अगर चक्कर आता है तो आंवले के रस में शहद मिलाकर लेने से ब्लड प्रेशर ठीक रहता है।

खजूर

खजूर को दूध में उबालकर पीने से लो ब्लड प्रेशर की समस्या ठीक होती है। आप खजूर खाकर भी दूध पी सकते हैं।

अदरक

अदरक के छोटे-छोटे टूकड़े करके, उनमें नींबू का रस और सेंधा नमक मिलाकर रख दें और थोड़ा थोड़ा करके दिन में 3 से 4 बार खाए। ऐसे लो ब्लड प्रेशर की दिक्कत ठीक हो जाती ही।

टमाटर

टमाटर के रस में थोड़ी-सी काली मिर्च और नमक मिलाकर पिएं, ये ब्लड प्रेशर को रोकने में फायदेमंद होता है।

चुकंदर

लो ब्लड प्रेशर में चुकुंदर बहुत फायदेमंद होता है इसलिए आप रोज इसे खा या इसका जूस पी सकते हैं।

लो ब्लड प्रेशर के लिए योग

अगर कुछ सावधानिया रखे, जीवन शैली में बदलाव लाएं, शारीरिक व्यायाम और योग करें, तो ये खून के प्रवाह को ठीक करता है और लो ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखता है। कुछ ऐसे रोग है जो करके ब्लड प्रेशर नॉर्मल रख सकते हैं जैसे की

1. उत्तानासन- यह आसन सिर में खून के प्रवाह को अच्छा करता है जिससे चक्कर आना और थकान जैसी समस्याए दूर होती है।

2. अधोमुखस्वान आसन- यह आसन सिर को शांत रखता है और थकान दूर करता है।

3. पवनमुक्त आसन- यह आसन रक्त को बढ़ाता है और पीठ के निचले हिस्से में थकान दूर करता है।

4. शिशु आसन- यह आसन मस्तिष्क को शांत करके तनाव और थकान दूर करता है।

5. सर्वांगासन- यह आसन सिर में खून के प्रवाह को अच्छा करता है जिससे चक्कर आना और थकान जैसी समस्याए दूर होती है।

6. मत्स्य आसन- यह आसन पीठ और गर्दन की मांसपेशियों को लचीला बनाता है और पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को ठीक करता है।

गर्भावस्था में लो ब्लड प्रेशर

गर्भावस्था में लो ब्लड प्रेशर शरीर में खून का प्रवाह बढ़ने और हॉर्मोन्स में बदलाव के कारण होता है। शुरुआत के तीन महीनों में कम रक्तचाप की समस्या ज्यादा होती है। इसलिए अगर लो ब्लड प्रेशर का ध्यान न रखा जाए तो गर्भपात भी हो सकता है। इसलिए समय-समय पर डॉक्टर के पास रूटीन चेकअप के लिए जाते रहना चाहिए।

गर्भावस्था में लो ब्लड प्रेशर रीडिंग

प्रेगनेंसी में नॉर्मल ब्लड प्रेशर 120/80 होना चाहिए। अगर शरीर में ब्लड प्रेशर 90/60 से कम हो जाता है तो ये लो ब्लड प्रेशर होता है।

प्रेगमैंसी में नॉर्मल ब्लड प्रेशर का मतलब है कि मां और बच्चे ठीक है और बच्चे का विकास अच्छे से हो रहा है।लेकिन अगर रक्तचाप कम या ज्यादा होता है, तो इससे शरीर में दिक्कतें आ सकती हैं।

गर्भावस्था में लो ब्लड प्रेशर कब होता है?

प्रेगनेंसी के शुरुआत के तीन महीनों में लो ब्लड प्रेशर हो सकता है। इसलिए इसका नियमित जांच करवाना जरूरी है, ताकि गर्भ में पल रहे शिशु को किसी तरह का नुकसान न हो।

गर्भावस्था में लो ब्लड प्रेशर के कारण

प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर होने के कई कारण होते हैं जैसे की-

1. प्रेगनेसी में हार्मोनल चेंज के कारण ब्लड प्रेशर लो हो जाता है।

2. प्रेगनेंसी के शुरुआत में कई बार उल्टियां होती है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है, और ब्लड प्रेशर लो हो जाता है।

3. जैसे जैसे गर्भाशय बढ़ता है, रक्त वाहिकाओं पर दबाव दवाब पड़ता है, जिससे लो ब्लड प्रेशर हो जाता है।

5. अगर प्रेगनेंसी में हृदय की कोई बीमारी हैं, तो ब्लड प्रेशर लो हो सकता है।

गर्भावस्था में लो ब्लड प्रेशर के लक्षण-

- चक्कर आना।

- जी-मिचलाना।

- धुंधला दिखाई देना।

- बार-बार प्यास लगना।

- सांस लेने में दिक्कत महसूस होना।

- दिन भर थकान लगना।

- शरीर का ठंडा होना या त्वचा का पीला पड़ना।

- अचानक से खड़े होने पर सिर घूमना या आंखों के आगे अंधेरा छा जाना

प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर के खतरे

वैसे तो प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर से उतनी दिक्कत नहीं होती जितनी हाई ब्लड प्रेशर से होती है। लेकिन अगर लो ब्लड प्रेशर बनी रहे तो इससे थोड़ा खतरा रहता है:

- प्रेगनेंसी में बीपी लो होने पर चक्कर आ सकता है जिससे बेहोश होकर गिरने का खतरा रहता है। ऐसे में महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे को चोट लगने का डर रहता है।

- अगर ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा कम होता है, तो शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है, जिससे शिशु का ग्रोथ अच्छे से नहीं हो पाता है।

गर्भावस्था में लो ब्लड प्रेशर का इलाज

- प्रेगनेंसी में डॉक्टर लो ब्लड प्रेशर की दवा तब तक नहीं देते, जब तक डॉक्टर को दिक्कत ज्यादा न लगे। क्योंकि बीपी की दवाई मां और बच्चे के लिए अच्छी नही होती।

- अगर सही खाना पीना और डेली रूटीन हो तो इससे ब्लड प्रेशर से दिक्कत नहीं होती।

गर्भावस्था में खुद की देखभाल के टिप्स-

ब्लड प्रेशर की समस्या ठीक करने के लिए खुद देखभाल करना जरूरी होता है। इसलिए अगर थोड़ी सी केयर और परहेज की जाए तो ब्लड प्रेशर कंट्रोल रख सकते है।

- खानपान का ध्यान रखे : ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए सही खानापीना जरूरी है। इसलिए हरी पत्तेदार सब्जियां व फल खाना चाहिए।

- आराम करना : प्रेगनेंसी में आराम करना जरूरी है। इससे ब्लड प्रेशर की दिक्कत होती है। इसके अलावा, जब बिस्तर पर लेटे तो आराम से उठे। क्योंकि अगर आप उठने में जल्दबाजी करेंगी आपको चक्कर आ सकता हैं।

- आरामदायक कपड़े पहनना : प्रेगनेंसी में ढीले और आरामदायक कपड़े पहनना चाहिए। इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है।

- पानी खूब पिएं : दिनभर में कम से कम 3 लीटर पानी पिए, और जब बाहर जाए तो पानी अपने साथ लेकर जाए।

लो ब्लड प्रेशर का बच्चे पर प्रभाव-

- बेहोश होने के कारण गिरने का खतरा रहता है, जिससे शिशु को नुकसान पहुंच सकता है।

- बीपी लो होने के कारण भ्रूण तक खून अच्छे से नहीं पहुंचता है, जिससे भ्रम का ग्रोथ अच्छे से नहीं हो पाता है।

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