सोमवार

प्रेरणादायीं और सूझ बूझ के धनी कर्मठ स्वयंसेवक श्री ओम प्रकाश जी पारीक एडवोकेट

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ग्रहस्थ स्वयंसेवकों की श्रंखला में बाबूजी श्री ओम प्रकाश जी पारीक का जन्म सन 1927 में होली की धूल वाले दिन राजस्थान के मंडावर कस्बे के पास के गांव गढ़ हिम्मत सिंह में हुआ था।

बाबूजी ने मथुरा के किशोरी रमन इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की, पिताजी श्री पं.बनवारी लाल जी पारीक मथुरा में घी की आढ़त का कार्य करते थे।


श्री ओम प्रकाश जी पारीक
श्री ओम प्रकाश जी पारीक


मथुरा में पढ़ाई के समय ही बाबूजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे और कुशक गली स्थित संघ कार्यालय केशव दुर्ग की भूमि खरीदने तथा उसका विवाद सुलझाने में अन्य स्वयंसेवको के साथ ही बाबूजी की भी महत्व पूर्ण भूमिका रही थी ।

बाबूजी घोष के वादक थे तथा पड़व के वादक थे। और पड़व बजाना बाबूजी ने संघ के उस समय के जिला प्रचारक श्री कृष्ण चन्द्र गांधी जी से सीख था ।संघ कार्यलय पर जब छोटे कैलाश जी ने घोष का कार्य सँभाला तब देखा बाबूजी का बड़ा और भारी पड़व कार्यालय पर रखा है तब कैलाश जी भाई साहब उसे लेकर मेरठ गए और उसके दो छोटे आनक बनवा कर लाये थे।

मथुरा से इंटरमीडिएट करने के बाद उन्होंने जयपुर जाकर राजस्थान यूनिवर्सिटी से बीकॉम. एमकॉम. तथा एल एल बी. की शिक्षा प्राप्त की तथा जयपुर में पढ़ाई के साथ -साथ जयपुर नगर प्रचारक के रूप में संघ कार्य में सक्रिय रहने लगे ।

माननीय श्री लालकृष्ण जी आडवाणी उस समय जयपुर के जिला प्रचारक थे ,जयपुर में बाबूजी के घनिष्ठ मित्रों में श्री सतीश चंद जी अग्रवाल जो केंद्र में जनता पार्टी की सरकार के समय वित्त राज्य मंत्री रहे तथा कई बार विधायक भी रहे थे ,श्री भंवर लाल जी शर्मा जो कि राजस्थान में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे जनता एवं पार्टी की सरकार में शिक्षा मंत्री रहे तथा श्री सुंदर सिंह जी भंडारी एवं श्री अटल जी के सचिव रहे श्री शिवकुमार जी पारीक से भी निकट संबंध बाबूजी के रहे ।

जब 1948 में संघ पर प्रथम प्रतिबंध लगा तब किसी मुखबिर ने पुलिस को सूचना दे दी की बाबूजी जहां संघ के नगर प्रचारक हैं और बाबूजी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया तब उन्हें कारावास भी झेलना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कुछ समय जयपुर में अकाउंट ऑफिस में नौकरी भी की लेकिन जल्द ही नौकरी से त्यागपत्र देकर बाबूजी अपने पिताजी के पास मथुरा आ गए।

क्योंकि बाबूजी ने वकालत की पढ़ाई कर रखी थी इसलिए मथुरा में सन 1955 में उन्होंने श्री केदारनाथ जी गुप्ता एडवोकेट के जूनियर के रूप में भी कार्य किया 1957 से उन्होंने स्वतंत्र वकालत प्रारंभ कर दी मथुरा में बाबूजी के साथी मित्रों में श्री बांके बिहारी जी माहेश्वरी, श्री राधा कृष्ण जी खंडेलवाल ,श्री हरि गुरु, श्री चीते गुरु, श्री नवनीत लाल जी शर्मा कातिब ,श्री राम बाबू जी भाटिया, श्री गोपाल जी अग्रवाल एडवोकेट जो कि मथुरा नगर पालिका अध्यक्ष बाबू रामेश्वर दास जी के छोटे भाई थे ,तथा अन्य स्वयंसेवकों से भी बाबूजी की घनिष्ठता रहती थी ।

तीनों स्वयंसेवक तथा तीनों वकीलों की तिकड़ी मथुरा में मशहूर है जिनमें श्री बांके बिहारी जी माहेश्वरी, श्री राधा किशन जी खंडेलवाल, और श्री ओम प्रकाश जी पारिक तीनों ही वरिष्ठ वकीलों में आज भी जाने जाते हैं । परंतु स्वयंसेवक के तौर पर तीनों का व्यवहार नम्र और अपनत्व लिए रहा है ।

बाबूजी ब्रज बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष रहे ,जनसंघ के नगर अध्यक्ष रहे, मथुरा बार एसोसिएशन के दो बार सचिव तथा एक बार अध्यक्ष रहे, वकीलों और जजों के बीच भी वरिष्ठ होने के कारण बाबूजी का सभी बहुत सम्मान करते थे सन 1978 में बाबूजी दीवानी के D. G .C. भी रहे ।मथुरा नगर पालिका के कई वर्ष तक वकील रहे वृन्दावन नगरपालिका के भी वकील रहे ,नेशनल टैक्सटाइल कॉरपोरेशन मुंबई के वकील रहे तथा कई बड़ी बैंकों के वकील के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान की थीं।

बाबूजी के चार पुत्र हैं जिनमें बड़े पुत्र श्री अशोक जी पारीक अच्छे वकील है और बाबूजी के समय से ही वकालत करते हैं, संघ के स्वयंसेवक हैं तथा भारतीय जनता युवा मोर्चा के 1984 से 1986 तक नगर अध्यक्ष रहे तथा 1986 से 1992 तक जिला अध्यक्ष के रूप में कार्य किया काश्मीर गई एकता यात्रा में भाग लिया और भाजपा तथा संघ के कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं।

दूसरे पुत्र श्री अरुण जी पारीक संघ के तृतीय वर्ष प्रशिक्षित कार्यकर्ता थे और संघ के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया था तथा संघ के शिक्षा वर्ग में गण शिक्षक की भूमिका में रहते थे । श्री अरुण जी भाई साहब श्री कृष्ण चन्द्र गांधी विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के अध्यक्ष भी रहे थे, श्रीडॉ. कृष्ण गोपाल जी व श्री रामलाल जी वर्तमान में संघ के अखिल भारतीय सह -संपर्क प्रमुख से श्री अरुण जी भाई साहब की निकटता अधिक रहती थी। ईश्वर के विधान के आगे मनुष्य कुछ नहीं कर सकता और 9 जुलाई सन 2018 को श्री अरुण जी भाई साहब का ब्रेन हेमरेज होने के कारण गुरूग्राम में स्वर्गवास हो गया जो बेहद दुखद विषय है और संघ परिवार के सभी स्वयंसेवक इस घटना से स्तब्ध रह गए थे।

तीसरे पुत्र श्री राजेश जी पारीक यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी में मथुरा में अधिकारी रहे हैं। यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी में बतौर एक विकास अधिकारी के रूप उनकी एक अलग ही पहचान रही है।

चौथे और छोटे पुत्र श्री राजीव जी पारीक गोलू जी के नाम से प्रसिद्ध हैं और संघ के घोष वादक हैं। संघ शिक्षा वर्ग द्वितीय वर्ष प्रशिक्षित है तथा श्री रवींद्र जी पांडेय के नगर पालिका अध्यक्ष कार्यकाल में अपने क्षेत्र से सभासद रहे हैं।
बाबूजी की पुत्री मंजू पारीक राष्ट्र सेविका समिति की सक्रिय कार्यकर्ता रही है।

आपातकाल में बाबूजी का घर संघ की गतिविधियों का केंद्र रहता था सभी प्रचारक बंधु वहाँ आकर रुकते थे एवं बाहर से पढ़ाई के लिए आने वाले स्वयंसेवक भी बाबूजी के घर मे रहते थे।

कहने का तात्पर्य है कि बाबूजी का पूरा परिवार जन्म से स्वयंसेवक परिवार है और बाबू जी की तीसरी पीढ़ी के परिवार के सदस्य भी संघ के स्वयंसेवक हैं और संघ परिवार के विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागी होते हैं।

बाबूजी एक वाक्य हमेशा बोला करते थे "हारिये न हिम्मत, बिसारिये न राम" और 11 सितंबर 2008 को ऐसा संघर्ष शील स्वयंसेवक सदा के लिये अपनी अमिट छाप छोड़कर इस लोक से चला गया।

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

प्रिय योगेंद्र भाई बाबूजी का जीवन परिचय अपने चैनल के माध्यम से पोस्ट करने के लिए आपका हृदय से आभारी हूँ। अपना स्नेह सदैव बनाये रखें।

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