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गंगा दशहरा मुहूर्त, तिथि प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है।

गंगा दशहरा का हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। इस दिन अगर प्यासों को पानी और भूखों को भोजन कराया जाए तो इससे बहुत पुण्य मिलता है।


19 जून 2021 से शुरू गंगा दशहरा

प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस बार यह शनिवार, 19 जून को शाम 06 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा और रविवार, 20 जून को शाम 04 बजकर 23 मिनट पर खत्म होगी। इस बार गंगा दशहरा दो दिन का होगा लेकिन 20 जून को ही इसे मनाया जाएगा।

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Ganga Dashahara


इस दिन जो भी व्यक्ति पवित्र नदी या कुंड में स्नान करता है उसे अपने सभी पापों से मुक्ति मिलती है, और दान पुण्य करके मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हिंदू धर्म में गंगा दशहरा को मां गंगा की जयंती माना गया है। इसी दिन को मां गंगा स्वर्ग से उतरकर पृथ्वी पर आई थी और दुनिया का कल्याण किया था। तभी से इस दिन से गंगा दशहरा मनाने की शुरुआत हुई।

गंगा दशहरा मुहूर्त

दशमी तिथि आरंभ: शनिवार, 19 जून, 2021, शाम 06:50 बजे से

दशमी तिथि समापन: रविवार, 20 जून, 2021, शाम 04:25 बजे तक

ऐसे मनाए गंगा दशहरा पर्व

आप घर में रहते हुए भी गंगा दशहरा मना सकते हैं। इसके लिए आप

• गंगा दशहरा वाले दिन आप सुबह जल्दी उठकर अपने घर पर ही गंगाजल की कुछ बूंदें और हल्दी पानी में डाल के स्नान करें।

• स्नान के बाद अपने घर के पूजा वाली जगह में गंगाजल से भरा लोटा रखें और मां गंगा की पूजा करें।

• इसके बाद मां गंगा को पांच अलग-अलग प्रकार के फूल चढ़ा के "ऊँ नमो भगवते ऐं ह्रीं श्रीं हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा.." का जाप करें।

• मां गंगा को दस तरह के फूल, दस नैवेद्य, दस पान, दस पत्ते और दस तरह के फल अर्पित करें।

• और बाद में गरीबों, जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को दान दक्षिणा दें।

गंगा दशहरा का महत्व

गंगा मां की पूजा करने से व्यक्ति को दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। इसमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर, ईर्ष्या, ब्रह्महत्या, छल, कपट, परनिंदा जैसे पापों से मुक्ति मिल जाती है।

मां गंगा के अवतार की कथा

मां गंगा को स्वर्ग लोक से धरती पर राजा भागीरथ लेकर आए थे। इसके लिए उन्होंने कठोर तप किया था और तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने भागीरथ की प्रार्थना स्वीकार की थी। लेकिन गंगा मैया ने भागीरथ से कहा था कि पृथ्वी पर आते समय उनके वेग को रोकने वाला कोई चाहिए, वरना वे धरती को चीरकर रसातल में चली जाएंगी और धरती के लोग पाप से मुक्त नहीं हो पाएंगे।

तब भागीरथ ने मां गंगा की बात सुनकर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गंगा मां को अपनी जटाओं में धारण किया।

gopal achary
पं गोपाल आचार्य

पं गोपाल आचार्य
राधा वैली मंदिर, मथुरा
9634762840

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