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क्या होता है किडनी ट्रांसप्लांट? कब पड़ती है किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत? किडनी ट्रांसप्लांट में कितना आता है खर्च?

किडनी और उसकी ज़िम्मेदारी

किडनी बीन के आकार का होता है, जो रीढ़ के दोनों तरफ़ होती हैं। ये आंत के नीचे और पेट के पीछे की तरफ़ होती है। किडनी खून से वेस्ट को फिल्टर करते हैं और मूत्र के माध्यम से इसे शरीर से निकाल देते हैं।

kidny Transplant
Kidny Transplant


जब किडनी काम करना बंद कर देता है। जिससे वेस्ट मैटेरियल शरीर में जमा होने लगता है, जिससे शरीर में धीरे धीरे बीमारियां आने लगती है। जब किडनी का काम करना 90% से कम हो जाता है, तो ऐसे किडनी फेलियर हो जाता है।

ऐसे लोगों को शरीर से कचरा निकालने और जीवित रहने के लिए डायलिसिस की जरूरत पड़ती है।

क्या होता है किडनी ट्रांसप्लांट?

किडनी ट्रांसप्लांट में एक स्वस्थ व्यक्ति (kidney donor) से किडनी लेकर मरीज के शरीर में सर्जरी करके लगाई जाती है।


किडनी ट्रांसप्लांट तीन तरह से किया जा सकता है:

1. लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट – सबसे ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट लिविंग डोनर से ही होता है। इसमें एक स्वस्थ व्यक्ति से उसकी एक किडनी दान में ली जाती है और उनकी दूसरी किडनी अपना काम वैसे थी ठीक तरह से करती रहती है।

2. पेयर किडनी एक्सचेंज – जब एक जीवित डोनर तो होता है लेकिन उनके किडनी, रोगी के किडनी से नहीं मैच नहीं हो पाती तो ऐसे में एक ऐसे किडनी डोनर को ढूंढा जाता है जिनसे किडनी बदल लिया जाता है।


3. मृत डोनर ट्रांसप्लांट – जब किसी कारण से किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और उनके करीबी उसके अंगों का दान करने का फैसला करता है। तो ऐसे में इस मृत व्यक्ति की किडनी ट्रांसप्लांट करके लगाई जाती है।



कब पड़ती है किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत?

• किडनी खराब होने के बाद जब खून के वेस्ट मैटेरियल जमा होने लगे।

• जब किडनी खराब होने पर मृत्यु का कारण बनने लगे।

• डायलिसिस के दुष्प्रभावों से बचने के लिए।

• जब रोगी की हालत गंभीर होने लगे।

• विलिंग किडनी डोनर मौजूद हो।

कब नही करवा सकते किडनी ट्रांसप्लांट?

• हृदय की गंभीर बीमारी होने पर ;

• वृद्धावस्था में;

• कैंसर हो या कभी कैंसर रह चुका हो तो;

• मानसिक बीमारी होने पर;

• मनोभ्रंश होने पर;

• धूम्रपान या मदिरा का सेवन करने वाली पर;

• लिवर की कोई बीमारी;

• गंभीर इनफिक्शन जैसे टीबी आदि होने पर।

क्या है किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता दर?

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद, मरीज की ट्रांसप्लांट किडनी उसके खून को साफ करने में फिर से तैयार हो जाती है। डायलिसिस पर रह रहे मरीजों के लिए बहुत अच्छा होता है क्योंकि इसके बाद उन्हें डायलिसिस की जरूरत नहीं होती।

लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट एक कठिन और जरूरी सर्जरी भी है। इसलिए सर्जरी की सफलता दर 100% नहीं होती है। किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता दर, किडनी डोनर के जीवित या मृत होने पर निर्भर करती है। किडनी डोनर अगर जीवित है, तो सर्जरी की सफलता दर 90-95% होगी लेकिन अगर वो मृत है तो सफलता दर 85-90% होगी।

डायलिसिस से किडनी ट्रांसप्लांट बेहतर क्यों है?

• किडनी की कार्यक्षमता डायलिसिस से बेहतर होती है।

• बार बार डायलिसिस सेंटर जाने की जरूरत नहीं होती।

• ट्रांसप्लांट के बाद जीवन, डायलिसिस पर चल रहे जीवन से काफी हद तक अच्छी हो जाती है।

• डायलिसिस में खर्च भी ज्यादा और बार बार होता रहता है, लेकिन ट्रांसप्लांट के बाद किडनी के काम करने पर यह खर्च कम हो जाता है।

• डायलिसिस पर रह रहे मरीजों पर खाने पीने का परहेज ज्यादा होता है और प्रत्यारोपण के बाद आप आराम से सब कुछ खा सकते है।

किडनी ट्रांसप्लांट से पहले क्या तैयारी करनी होती है?

किसी भी काम को करने से पहले हमें कुछ तैयारिया, कुछ योजनाएँ बनाने की जरूरत होती है। जो इस प्रकार हैं-

1. किडनी डोनर को खोजना

किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए सबसे जरूरी है, किडनी यानि किडनी डोनर ढूँढना। किडनी डोनर दो प्रकार के होते हैं- जीवित और मृत

2. ट्रांसप्लांट से पहले किडनी डोनर का पूरा परीक्षण करना

किडनी डोनर के मिलने के बाद डोनर का परीक्षण कराने की जरूरत सबसे पहले होती है जैसे- डोनर का खून का परीक्षण, टिशूज का प्रकार आदि। किस से ले सकते हैं आप किडनी-

मरीज का रक्त समूह किस रक्त समूह से आप ले

हैं किडनी

0 0

A A,0

B B,O

AB O, A, B, AB


इससे मरीज और डोनर का genes देखा जाता है। यदि डोनर और मरीज के Tissue आपस में मिलते हैं तो मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट किडनी ठीक से काम करना शुरू कर सकती है।

3. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट

सर्जरी से पहले कई टेस्ट किए जाते है, जिनके आधार पर सर्जरी की तारिक तय की जाती है। यह इसलिए हुई जरूरी है, क्योंकि सर्जरी के दौरान एनेसेथियासा का यूज भी किया जायेगा और सर्जरी बिना किसी रुकावट के हो जाए।

4. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच

एनेसेथिसिया देने पर पाचन क्रिया बंद हो जाती है। यदि रोगी ने सर्जरी से पहले कुछ खाया है तो वो पेट से निकल कर फेफड़ों में चली जाती है और इससे सांस की दिक्कतें आ सकती है, इसलिए सर्जरी के हिसाब से एनेस्थीसिया चुना जाता है।

5. सर्जरी की योजना

सर्जन और मरीज के लिए पूर्व तैयारी, इसके फायदे नुकसान, सर्जरी के बाद की जाने वाली देखभाल पर योजना बनाना जरूरी होता है। जिससे डॉक्टर को मरीज की हर चीज पहले से पता हो।

6. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ

सर्जरी से पहले डॉक्टर कुछ दवाइयां देता है, इसलिए इन दवाओं को ठीक तरह से लेते रहना चाहिए।

7. सर्जरी से पहले फास्टिंग खाली पेट रहना

डॉक्टर आपको आधी रात से कुछ भी खाने के लिए मना कर सकते है। इसलिए डॉक्टर की बात जरुर माने। क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो सर्जरी रोकी भी जा सकती है।

8. सर्जरी का दिन

सर्जरी के दिन एक सहमती पत्र पर साइन करवाया जाता है। इसके बाद bp, pulse, temperature, देखा जाता है

9.सामान्य सलाह

सर्जरी से पहले धूमपान बंद कर दे, इससे रिकवरी होने में देरी होती है। किसी न किसी को अपने साथ जरूर रखें। किसी भी तरह का तनाव न ले।

किडनी ट्रांसप्लांट कैसे किया जाता है?

जैसे ही एनेस्थीसिया अपना प्रभाव पूरी तरह आ जाता है, सर्जन पेट में एक चीरा लगाकर डोनर के किडनी को अंदर रख देते है। उसके बाद डॉक्टर मरीज के धमनियों और नसों से नए किडनी की धमनियां और नसें जोड़ देते हैं। इससे नए किडनी में खून का प्रवाह शुरू हो जाता है। फिर नए किडनी की मूत्रनली को मरीज के मूत्राशय से जोड़ दिया जाता है, जिससे पेशाब करना आसान हो जाता है। डॉक्टर मरीज की किडनी को शरीर में ही रहने देते जब तक कि वो बीपी या इन्फेक्शन जैसी दिक्कतें न आ रही हों। इसके बाद सर्जिकल धागों की मदद से चीर को सिल दिया जाता है।

गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद कैसी देखभाल के जाती है?

अस्पताल में देखभाल

• होश आने के बाद अस्पताल में शारीरिक परीक्षण किया जाता है। बीपी, पल्स और श्वास स्थिर हो जाने पर ICU में शिफ्ट कर देते है। इसके कुछ समय बाद आपको अस्पताल के सामान्य कमरे में शिफ्ट कर दिया जाता है। लगभग एक हफ्ते तक अस्पताल में ही रहना होता है।

• नए गुर्दे तुरंत ही फ़िल्टर करने का काम शुरू कर सकते हैं लेकिन कई बार इसमें कुछ हफ्ते भी लग सकते हैं। परिवार के सदस्यों द्वारा डोनेट किभी किडनी अन्य डोनर्स के किडनी के मुकाबले जल्दी काम करना शुरू कर देते हैं।

• मूत्राशय में एक मूत्र के लिए थैली लगा दी जाती है।

जब तक कि खुद से खाना पीना नहीं खा सकते है। तब तक लिक्विड चीजे ही दी जाती है। धीरे धीरे ठोस आहार देना शुरू कर दिया जाता है।

• दर्द के लिए डॉक्टर दर्द निवारक दवाइया दे सकते हैं।

• अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले डॉक्टर अच्छे से समझा देते है कि कौन सी दवा कब लेनी है।

घर में रिकवरी

• घर जाने के बाद डॉक्टर बीच बीच में जांच के लिए बुलाते है कि नया गुर्दा सही से कार्य कर रहा है या नहीं।

• घाव को साफ़ और सूखा रखना ज़रूरी है।

• डॉक्टर के कहने पर टांके खुलवाने जाना चाहिए।

• ऐसी जगहों पर जाने से बचना चाहिए जहाँ कोई बीमार हो क्योंकि ट्रांसप्लांट के बाद में इम्यून सिस्टम थोड़ा कमज़ोर हो जाता है। इसलिए सावधानी बरतनी जरूरी है।

• आपको दवाओं का कड़े शिड्यूल का आजीवन पालन करना होगा।

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद क्या सावधानियां बरतें?

• कुछ महीनों तक डॉक्टर से नियमित रूप से मिलते रहना चाहिए।

• इनफेक्शक से बचना चाहिए।

• वजन कंट्रोल करके रखना चाहिए।

• वाहन नहीं चलाना चाहिए या सफर नही करना चाहिए।

• शारीरिक गतिविधियां कम करनी चाहिए जैसे झटके से उठना बैठना लेटने से बचना चाहिए।

• शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए।

• प्रेगनेंसी से बचना चाहिए।

• नशीले पदार्थो से दूर रहना चाहिए।

• पालतू जानवर से दूर रहना चाहिए।

किडनी ट्रांसप्लांट में क्या जोखिम आते हैं?

• एनेस्थीसिया की वजह से एलर्जी हो सकती है

• रक्तस्त्राव हो सकता है

• रक्त के थक्के बन सकते हैं

• मूत्रनली में स्त्राव हो सकता है

• मूत्रनली में ब्लॉकेज हो सकता है

• इन्फेक्शन का डर रहता है

• डोनेट किये हुए गुर्दे का शरीर द्वारा रिजेक्शन किया जा सकता है।

• डोनेट किये हुए गुर्दे का फेलियर हो सकता है

• डायबिटीज होने का डर रहता है

किडनी ट्रांसप्लांट में कितना आता है खर्च?

भारत के निजी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च 6 लाख से 7लाख तक आता है लेकिन शरीर द्वारा किडनी का रिजेक्शन या इन्फेक्शन हो जाए तो खर्च बढ़ सकता है। सर्जरी के बाद दवाओं और अन्य चीजों का खर्च लगभग 10 हजार से 15 हजार तक बैठ जाता है।

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद कैसा हो खान-पान?

डायलिसिस के मुकाबले किडनी ट्रांसप्लांट के बाद खाने पीने में अधिक छूट रहती है। नई किडनी के अनुसार संतुलित और पौष्टिक आहार लेना जरूरी रहता है। आहार इस बात पर निर्भर करता है कि नई किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है। कुछ भी खाने से पहले ये जरूर ध्यान रखना चाहिए की नई किडनी के लिए वो ठीक है की नहीं। ट्रांसप्लांट के बाद दवाओं से बीपी, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज बढ़ने का खतरा रहता है। दावा लेने की वजह से हड्डियां भी कमज़ोर होने लगती हैं, इसलिए कैल्शियम की मात्रा ज्यादा लेनी चाहिए।

खाने में एक संतुलित आहार की जरूरत होती है जैसे- विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाईट्रेट, वसा, फाइबर आदि।

इसके अलावा तरल पदार्थ भी ज्यादा लेना चाहिए।

जो भी खाना चाहिए वह सही से पका हुआ होन चाहिए ताकि उससे इन्फेक्शन होने का डर न रहें।

स्वयं की भी सफाई भी जरूरी है, इसलिए समय-समय पर हाथ धोते रहना चाहिए।

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद क्या नहीं खाना चाहिए?

1. कच्चा, पक्का या अधपका मांस

• मछली

• मुर्गी

• केकड़ा

2. डेयरी प्रोडक्ट्स

• दूध

• पनीर

• दही

• कच्चे या कम उबले हुए अंडे

3. फल और सब्जियां

• अंगूर या अंगूर का रस

• अनार या अनार का रस

• कच्चे फल

• कच्ची सब्जियां

• बिना पका हुआ सलाद

• सिरका

• स्प्राउट्स

4. एंटी-इंफ्लामेट्री दवाएं

• आइबूप्रोफेन

• नेप्रोक्सेन

5. विटामिन्स और हर्बल्स सप्लीमेंट

• सेंट जॉन्स पौधा

• हर्बल चाय

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