रविवार

कैल्शियम की कमी क्या है? कैल्शियम की कमी के लक्षण क्या हैं? कैल्शियम की कमी की पहचान कैसे करें?

कैल्सियम हमारे शरीर के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। कैल्शियम, हड्डियों को मजबूत बनाने, नसों, ब्लड, मांसपेशियों और दिल की कमजोरी दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारे शरीर की हड्डियों और दांतो में 99% कैल्शियम होता है और 1% खून और मांसपेशियों में होता है। इसलिए अगर शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाए तो बोन्स कमज़ोर होने लगते हैं, इसके अलावा और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है।


महिलाओं में कैल्शियम की कमी सबसे ज्यादा होती है। जो महिलाएं बच्चे को दूध पिलाती है और जिन महिलाओं को उम्र 40 के पार हो जाती है, उन महिलाओं में अक्सर कैल्शियम की कमी होने लगती है, इसलिए उन महिलाओं को खाने पीने का खास ख्याल रखने की जरूरत है।

कैल्शियम की कमी क्या है?


कैल्शियम की कमी को हाइपोकाल्सीमिय (Hypocalcemia) भी कहते है। ये एक ऐसी स्थिति होती है, जब खून में कैल्शियम की कमी हो जाती है।
वैसे तो इसका इलाज संभव है, अगर काफी लंबे समय तक इसका इलाज न करवाया जाए तो इसका असर शरीर के अन्य अंगों जैसे दाँत, आंख, मस्तिष्क इत्यादि पर पडने लगता है।

कैल्शियम की कमी के लक्षण क्या हैं?

किसी भी दूसरी बीमारी की तरह कैल्शियम की कमी के भी लक्षण होते हैं जिसका समय रहते अगर पता चल जाए तो इसको बढ़ने से रोका जा सकता है। ऐसे ही कुछ संकेत नीचे दिए हुए हैं-

• उंगलियों में झुनझुनाहट लगना- कैल्शियम की कमी होने पर उंगलियों में झुनझुनी होने लगती है।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, ताकि इसको रोका जा सके।

• मांसपेशियों में ऐंठन लगना- कैल्शियम की कमी होने पर मांसपेशियों में ऐंठन होने लगती है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

• थकावट लगना- किसी काम को करने के बाद थकावट होना आम चीज़ है, लेकिन थोड़ा सा काम करने पर भी थकान ज्यादा लगे, तो ऐसे में हेल्थचेकअप कराना जरूरी हो जाता है।

• भूख न लगना- कैल्शियम की कमी होने पर भूख कम लगने लगती है। इसलिए ऐसा होने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

• नाखुन कमजोर होना- जिन लोगों के नाखुन कमज़ोर हो जाते हैं और टूटने लगते हैं, वो सब कैल्शियम की कमी होने का लक्षण है।

• निगलने में कठिनाई होना- निगलने में कठिनाई होने को गले में खराश या फिर जुखाम का संकेत माना जाता है, लेकिन कई बार यह कैल्शियम की कमी होने से भी हो सकता है।

कैल्शियम की कमी के कारण क्या है?

कैल्शियम की कमी होने के बहुत सारे कारण होते हैं, जो नीचे दिए हुए हैं-

• खून में प्रोटीन का कम होना- कैल्शियम की कमी होने का प्रमुख कारण खून में प्रोटीन का कम होना है।
और ऐसा तब होता है, जब शरीर को ठीक से प्रोटीन नहीं मिल पाता है।

• भोजन का ठीक से न करना- अगर इस भागदौड़ भरी ज़िदगी में अच्छी तरह से भोजन नही किया जाए तो कैल्शियम की कमी का कारण बन सकता है।

• दवाइयों का साइड इफेक्ट्स होना- कैल्शियम की कमी तब भी होती है, जब दवाइयों का साइड-इफेक्ट्स हो जाता है।

• हार्मोन का बदलना- यदि किसी व्यक्ति में हार्मोन का असामान्य तरीके से बदलाव हो रहा है, तो उसे कैल्शियम की कमी कारण कह सकते हैं।

• जेनेटिक कारण- कैल्शियम की कमी की समस्या जेनेटिक भी होता है अगर परिवार में किसी अन्य सदस्य को ये बीमारी है तो दूसरो को भी इसके कारण हो सकता है।

कितने कैल्शियम की जरूरत होती है?

• बढ़ती उम्र के बच्चों को रोज 500-700 मिलीग्राम कैल्शियम लेना जरूरी होता है।

• युवाओं को रोज 700-1,000 मिलीग्राम कैल्शियम लेना जरूरी होता है।

• प्रेग्नेंट महिलाओं को रोज 1,000 से 1200 मिलीग्राम कैल्शियम लेना जरूरी होता है।

• दूध पिलाने वाली महिलाओं को रोज 2,000 मिलीग्राम कैल्शियम लेना जरूरी होता है।

कैल्शियम की कमी की पहचान कैसे करें?

• मेडिकल हिस्ट्री द्वारा- कैल्शियम की कमी की पहचान मेडिकल हिस्ट्री द्वारा की जा सकती है। इसमें इस बात का पता लगाया जाता है कि अतीत में कैल्शियम संबंधी कोई बीमारी थी या नहीं।

• ब्लड टेस्ट द्वारा- कैल्शियम की कमी की पहचान ब्लड टेस्ट के द्वारा भी लगाई जाती है। ऐसे इस बात का पता चलता है कि शरीर में कैल्शियम की मात्रा कितनी है।

• एल्युबिन टेस्ट द्वारा- कैल्शियम की कमी की पहचान एल्युबिन टेस्ट से भी की जाती है।

• हड्डियों की जांच द्वारा- कैल्शियम की कमी की पहचान हड्डियों की जांच करके भी किया जाता है।

कैल्शियम की कमी का इलाज कैसे किया जाता है?

• खान पान में बदलाव करके- डॉक्टर कैल्शियम की कमी से पीड़ित लोगों को दही, चीज़ आदि खाने की सलाह देते हैं, जिससे कि शरीर में कैल्शियम की कमी दूर हो सके।

• एक्सराइज़ करके- कैल्शियम की कमी से पीड़ित लोगों को चलना, दौड़ना, जॉगिंग आदि एक्सराइज़ करना चाहिए ताकि उनके शरीर में कैल्शियम की कमी दूर हो सके।

• कैल्शियम के सप्लीमेंट द्वारा- कैल्शियम के ऐसे बहुत सारे सप्लीमेंट होते हैं, जिनने द्वारा कैल्शियम की कमी को दूर किया जा सकता है।

• कैल्शियम के इंजेक्शन द्वारा- कैल्शियम की कमी को इंजेक्शनों के द्वारा भी दूर किया जा सकता है।

• कैल्शियम की दवाई द्वारा- कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए डॉक्टर कैल्शियम की दवाई भी देते हैं।

कैल्शियम की कमी से बचाव कैसे कर सकते है?

• हेल्थी डाइट अपनाकर- हेल्थी डाइट अपनाना कैल्शियम की कमी से बचाव किया जा सकता है।
इसके लिए दूध, हरी सब्ज़ियाँ, दही इत्यादि का सेवन करना चाहिए।

• एक्सराइज़ करके- अगर कोई व्यक्ति रोज़ एक्सराइज़ करता है, तो उससे कैल्शियम की कमी कम हो जाती है।

• पर्याप्त नींद लेकर- सभी लोगों को 6 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। इससे भी कैल्शियम की कमी को रोका जा सकता है।

• हेल्थचेकअप करा कर- सभी लोगों के लिए समय-समय पर हेल्थचेकअप कराना काफी जरूरी होता है। जिससे इस बात का पता चल जाता है कि कैल्शियम की कमी है या नहीं।

• डॉक्टर के संपर्क में रहकर- अगर किसी व्यक्ति का कैल्शियम की कमी का इलाज चल रहा है, तो डॉक्टर के संपर्क में बने रहना चाहिए।

कैल्शियम की कमी से होने वाले रोग कौन-से हैं?

• दाँतों में बदलाव होना- कैल्शियम की कमी से दाँतों की संरचना में बदलाव होने लगता है।
इसकी वजह से दाँतों की कई अन्य समस्याएं जैसे दाँतों में दर्द होना, मसूड़ों से खून आना इत्यादि हो सकते हैं।

• मोतियाबिंद होना- अक्सर, कैल्शियम की कमी मोतियाबिंद का कारण भी बन सकती है। हालांकि,मोतियाबिंद का इलाज संभव है।
लेकिन यदि यह लंबे समय तक लाइलाज रहे तो इसकी वजह से आंखों की रोशनी भी जा सकती है।

• मस्तिष्क में बदलाव होना- कैल्शियम की कमी के कारण लोगों के मस्तिष्क पर भी असर पड़ता है।
जिसमें मस्तिष्क संबंधी काफी सारी समस्याएं जैसे चीज़ों को भूलना, सिरदर्द होना इत्यादि का सामना करना पड़ता है।

• हड्डियों का कमज़ोर होना- जब किसी व्यक्ति के शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है, तो उसकी हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं।

• ऑस्टियोपोरोसिस होना- कैल्शियम की कमी से ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) भी हो जाता है।ये एक ऐसी बीमारी है, जिससे फ्रेक्चर या चोट लगने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है।

कैल्शियम की कमी दूर करने वाले स्त्रोत क्या हैं?

• आंवला- आंवला में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। यह शरीर की इम्‍यूनिटी पावर को बढ़ाता है। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट के गुण भी पाए जाते हैं, जो शरीर को इंफेक्शन से बचाने में मदद करता है।

• कीवी- कीवी में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। इसमें विटामिन सी भी पाया जाता है, जिससे कैल्शियम की कमी दूर हो जाती है।

• संतरा- संतरों में भी कैल्शियम और विटामिन सी भी पाया जाता है जो कैल्शियम की कमी दूर करने में मदद करता है।

• ड्राइ फ्रूट्स- मुनक्का, किशमिश, बादाम, पिस्ता, अखरोट, तरबूज के बीज में कैल्शियम पाया जाता है। इसके अलावा अजवाइन, जीरा, हींग, लौंग, धनिया, काली मिर्च में भी कैल्शयिम होता है।

• हरी सब्जियां- हरी सब्जियों में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। इसलिए पत्ता गोभी, अरबी के पत्ते, मेथी, मूली के पत्ते, पुदीना, धनिया, ककड़ी, सेम, ग्वारफली, गाजर, भिंडी को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

• दूध से बनी चीजें- दूध कैल्शियम का अच्‍छा स्रोत है। इसके अलावा दूध से बने पदार्थ, जैसे दही, छाछ, मक्खन, घी, पनीर, चीज आदि में भी कैल्शि‍यम पाया जाता है।

कोई टिप्पणी नहीं:

Mathura Vrindavan

डिप्रेशन क्या होता है? डिप्रेशन के कारण क्या हैं? डिप्रेशन के लक्षण क्या हैं? डिप्रेशन का उपचार कैसे कर सकते हैं?

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमने कभी न कभी स्वयं को उदास और हताश महसूस किया होगा। असफलता, संघर्ष और किसी अपने से बिछड़ जाने के कारण दुखी ह...