Type Here to Get Search Results !

तुलसी क्या है कितने प्रकार की होती है, इसके क्या लाभ हैं।

तुलसी को हिन्दू धर्म में पूज्य माना गया है, जो हर आंगन और घर की छतों में पाया जाता है। इसे सिर्फ पौधे ही नहीं बल्कि घर में भगवान के रूप में माना जाता है। तुलसी में बहुत सारे रोगों से लड़ने की क्षमता होती है इसलिए इसे 'क्वीन ऑफ हर्ब्स' भी कहा जाता है।

Tulasi
Tulsi

आयुर्वेद के हिसाब से तुलसी के पौधे का हर हिस्सा स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत फायदेमंद है। तुलसी की जड़, शाखाएं, पत्ती और बीज सभी का अपना महत्व है। तुलसी शरीर के शोधन के साथ-साथ वातावरण का भी शोधन करती है तथा पर्यावरण को संतुलित बनाने में मदद करती है।

आइये जानते हैं तुलसी के गुणों, तुलसी के उपयोग और आयुर्वेदिक महत्व के बारे में।

तुलसी क्या है?

तुलसी एक औषधीय पौधा है जिसमें विटामिन और खनिज पाए जाते हैं। ये रोगों को दूर करने और शारीरिक शक्ति बढ़ाने में मदद करता है इसलिए इससे ज्यादा उपयोगी औषधि और कोई नहीं है। 

तुलसी का पौधा की ऊंचाई 30 से 60 सेमी तक होती है और इसके फूल सफेद और बैगनी रंग के होते हैं। 

तुलसी कितने प्रकार की होती है?

अनमोल पौधे के कुल 5 प्रकार होते हैं, जो स्वास्थ्य से लेकर वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। 

1) श्याम तुलसी
2) राम तुलसी
3) श्वेत/विष्णु तुलसी
4) वन तुलसी
5) नींबू तुलसी 


तुसली के नाम अन्य भाषाओं में?

तुलसी का वानस्पतिक नाम ओसीमम् सेंक्टम् (Ocimum sanctum) और कुल का नाम  लैमिएसी (Lamiaceae) है। अन्य भाषाओं में तुलसी का नाम इस तरह से है-

• Tamil: तुलशी (Tulashi)
• Telugu: गग्गेर चेट्टु (Gagger chettu)
• Sanskrit: तुलसी, सुरसा, देवदुन्दुभि, अपेतराक्षसी, सुलभा, बहुमञ्जरी, गौरी, भूतघ्नी
• Odia: तुलसी (Tulasi)
• Kannad: एरेड तुलसी (Ared tulsi)
• Gujrati: तुलसी (Tulasi)
• Bengali: तुलसी (Tulasi)
• Nepali: तुलसी (Tulasi)
• Marathi: तुलस (Tulas)
• Malyalam: कृष्णतुलसी (Krishantulasi)
• Arabi: दोहश (Dohsh)


तुलसी के फायदे किस तरह है?

औषधीय गुणों की दृष्टि से तुलसी की पत्तियां ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है। सभी तुलसी में राम तुलसी और श्याम तुलसी को प्रमुख माना गया है। इनकी पत्तियों को आप ऐसे ही लेकर खा सकते हैं। आइये जानते है तुलसी के फायदों के बारे में-

• दिमाग के लिए:

दिमाग के लिए तुलसी बहुत ही फायदेमंद होती है। इसके सेवन से मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ती है और याददाश्त तेज होती है। इसलिए रोज तुलसी की 4-5 पत्तियों को पानी के साथ निगलकर खाना चाहिए।

• सिर दर्द के लिए:

सिरदर्द होना एक आम बात है और अगर कोई इस समस्या से परेशान रहता है तो तुलसी के तेल की एक दो बूंदें नाक में डालना चाहिए। इससे बहुत जल्दी ही सिर दर्द से आराम मिलता है।


• सिर के जूँ और लीख के लिए:

अगर सिर में जुएं पड़ गये हैं और यह ठीक नहीं हो रही है तो बालों में तुलसी का तेल लगाने से जूं और लीखें मर जाती हैं। 

• रतौंधी (Night Blindness) के लिए:

कई लोगों को रात के समय ठीक से दिखाई नहीं पड़ता है, जिसे रतौंधी (Night Blindness) कहा जाता है। रतौंधी से पीड़ित लोगों के लिए तुलसी की पत्तियां काफी फायदेमंद होती है।

• साइनसाइटिस के लिए:

अगर आप साइनसाइटिस के मरीज हैं तो तुलसी की पत्तियां मसलकर सूघें। इन पत्तियों को सूंघने से साइनसाइटिस रोग जल्दी ठीक होता है।

• कान के दर्द और सूजन के लिए:

कान के दर्द और सूजन के लिए तुलसी के पत्ते काफी असरदार होते है। कान में दर्द होने पर तुलसी के रस को गर्म करके 2-2 बूँद कान में डालने से दर्द से जल्दी आराम मिलता है। 

• दांत दर्द के लिए:

तुलसी की पत्तियां दांत दर्द में भी काम आती हैं। काली मिर्च और तुलसी के पत्तों की गोली बनाकर दांत के नीचे रखने से दांत के दर्द से आराम मिलता है।

• गले में खराश के लिए:

तुलसी की पत्तियां गले से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में बहुत ही फायदेमंद हैं। तुलसी के रस को हल्के गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से आराम मिलता है। 

• खांसी के लिए:

तुलसी की पत्तियों से बने  शर्बत में गर्म पानी मिलाकर लेने से जुकाम में बहुत लाभ मिलता है 

• सूखी खांसी:

तुलसी की पत्तियां अस्थमा और सूखी खांसी से पीड़ित लोगों के लिए भी बहुत गुणकारी हैं। इसके लिए तुलसी की मंजरी, सोंठ, प्याज का रस और शहद को मिला कर मिश्रण बनाएं और चाटकर खाएं, इससे सूखी खांसी में लाभ होता है।

• डायरिया और पेट की मरोड़ के लिए:

गलत खानपान या प्रदूषित पानी की वजह से डायरिया हो जाता हैं। तुलसी की पत्तियां डायरिया, पेट में मरोड़ आदि समस्याओं को ठीक करने में मदद करती हैं। 

• अपच के लिए:

 पाचन शक्ति कमजोर होने पर तुलसी का सेवन करना चाहिए। इसके लिए तुलसी की 2 ग्राम मंजरी को पीसकर काले नामक के साथ दिन में 3 से 4 बार लेना चाहिए।

• पेशाब में जलन के लिए:

पेशाब में जलन होने पर भी तुलसी के बीज का उपयोग करने से आराम मिलता है। 

• पीलिया के लिए:

पीलिया एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज सही समय पर ना करवाने से यह आगे चलकर गंभीर बीमारी बन जाती है। तुलसी  के पत्तों को पीसकर छाछ के साथ मिलाकर पीने से पीलिया ठीक होता है।

• पथरी दूर करने के लिए:

पथरी होने पर तुलसी का सेवन करना फायदेमंद रहता है। इसके लिए तुलसी की पत्तियों को पीसकर शहद के साथ खाएं। यह पथरी को बाहर निकालने में मदद करता है। 

• डिलीवरी के बाद होने वाले दर्द से आराम के लिए:

डिलीवरी के बाद महिलाओं को तेज दर्द होता है और इस दर्द को दूर करने में तुलसी (Tulsi plant) की पत्तियां फायदेमद रहती हैं। 

• कुष्ठ रोग के लिए:
 तुलसी का सेवन कुष्ठ रोग को दूर करने में सहायक है। 


• रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए:

तुलसी के नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है। 

• मलेरिया के लिए:

तुलसी का पौधा मलेरिया प्रतिरोधी है। तुलसी के पौधों को छूने से मलेरिया के मच्छर वहां से भाग जाते हैं, 

• पीरियड्स की अनियमितता के लिए:

शरीर में वात दोष बढ़ जाने से पीरियड्स अनियमित हो जाते है | तुलसी के बीज में वात को नियंत्रित करने का गुण होता है जिससे पीरियोड्स ठीक से आने लगता है।

• साँसों की दुर्गंध दूर करने के लिए:

साँसों में दुर्गन्ध, पाचन शक्ति कमजोर होने के कारण होती है | 

• चोट ठीक करने के लिए:

चोट लगने पर भी तुलसी का उपयोग किया जाता है क्योंकि इसमें रोपण और सूजन को कम करने वाला गुण होता है। तुलसी का यही गुण चोट के घाव एवं उसकी सूजन को भी  ठीक करने में सहायक होता है |

• चेहरे के निखार के लिए:

तुलसी का उपयोग चेहरे की निखार वापस लाने के लिए भी किया जाता है।

• सांप काटने पर:

5-10 मिली तुलसी-पत्र-स्वरस को पिलाने से तथा इसकी मंजरी और जड़ों को पीसकर सांप के काटने वाली जगह पर लेप लगाने से लाभ मिलता है।.
Tags

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Below Post Ad

Hollywood Movies