Type Here to Get Search Results !

आंवला क्या है? आंवला के फायदे

आंवला एक ऐसा फल है, जिसके अनगिनत लाभ हैं। आंवला ना सिर्फ त्वचा, और बालों के लिए फायदेमंद है, बल्कि कई तरह के रोगों के लिए औषधि के रूप में भी काम करता है। आंवला का प्रयोग कई तरह से किया जाता है, जैसे- आमला जूस, आंवला पाउडर, आंवला अचार आदि। आंवला में प्रचुर मात्रा में विटामिन, मिनरल, और न्यूट्रिएन्ट्स होते हैं, जो आंवला को अनमोल गुणों वाला बनाते हैं।

आंवला क्या है? 
आंवला को आयुर्वेद में अमृतफल कहा गया है। वैदिक काल से ही आंवला का प्रयोग औषधि के रूप में किया जा रहा है।

पेड़-पौधे से जो औषधि बनती है उसको काष्ठौषधि कहते हैं और धातु-खनिज से जो औषधि बनती है उनको रसौषधि कहते हैं। इन दोनों तरह की औषधि में आंवला का इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कि आंवला को रसायन द्रव्यों में सबसे अच्छा माना जाता है यानि कहने का मतलब ये है कि जब बाल बेजान और रूखे-सूखे हो जाते हैं तब आंवला का प्रयोग करने पर बालों में एक नई जान आ जाती है। आंवला का पेस्ट लगाने पर रूखे बाल काले, घने और चमकदार नजर आने लगाते हैं।

चरक संहिता में आयु बढ़ाने, बुखार कम करने, खांसी ठीक करने और कुष्ठ रोग का नाश करने वाली औषधि के लिए आंवला का उल्लेख मिलता है। इसी तरह सुश्रुत संहिता में आंवला के औषधीय गुणों के बारे में बताया गया है. आंवला वह औषधि है, जो शरीर के दोष को मल के द्वारा बाहर निकालने में मदद करता है। पाचन संबंधित रोगों और पीलिया के लिए आंवला का उपयोग किया जाता है। इसे कई जगहों पर अमला नाम से भी जाना जाता है।

आंवला के फायदे आंवला के प्रयोग से अनगिनत फायदे होते हैं। आंवला खून को साफ करता है, दस्त, मधुमेह, जलन की परेशानी में लाभ पहुंचाता है। इसके साथ ही यह जॉन्डिस, हाइपर-एसिडिटी, एनीमिया, रक्तपित्त (नाक-कान से खून बहने की समस्या), वात-पित्त के साथ-साथ बवासीर या हेमोराइड में भी फायदेमंद होता है। यह मल त्याग करने की प्रक्रिया को आसान बनाता है। यह सांसों की बीमारी, खांसी और कफ संबंधी रोगों से राहत दिलाने में सहायता करता है। अमला आंखों की रोशनी को भी बेहतर करता है। अम्लीय गुण होने के कारण यह गठिया में भी लाभ पहुंचाता है।

आंवला शरीर के पित्त, वात और कफ को संतुलित करने में मदद करता है। आंवला, पीपल और हरड़, सभी तरह के बुखार से राहत दिलाने में सहायता करता है। यह दर्द निवारक दवा के रूप में भी काम करता है।

बालों की समस्या में आंवले के फायदे
सफेद बालों की समस्या से हर उम्र के लोग जूझ रहे हैं। आंवला के मिश्रण का लेप लगाने से कुछ ही दिनों में बाल काले हो जाते हैं। 30 ग्राम सूखे आंवला, 10 ग्राम बहेड़ा, 50 ग्राम आम की गुठली की गिरी और 10 ग्राम लौह भस्म लें। इन्हें रात भर लोहे की कढ़ाई में भिगोकर रखें। अगर कम उम्र में बाल सफेद हो रहे हैं तो इस लेप को रोज लगाएं। कुछ ही दिनों में बाल काले होने लगते हैं।

मोतियाबिंद में अमला के फायदे
आमतौर पर उम्र के बढ़ने के साथ कई लोगों को मोतियाबिंद की परेशानी होने लगती है। इससे बचने के लिए आंवला के साथ रसांजन, मधु और घी मिला लें। इस मिश्रण को आंखों में लगाने से आंखों के पीलेपन और मोतियाबिंद में फायदा मिलता है।

आंखों की बीमारी में आंवला के फायदे
आंवले के 1-2 बूंद रस को आंखों में डालने से आंखों के दर्द से राहत मिलती है।
आंवले के बीज को घिसकर आंखों में लगाने से आंखों के रोग में फायदा पहुंचता है।
अपांप्म, आंवले का रस, धाय के फूल, नीलाथोथा तथा खपरिया तुत्थ को नींबू के रस से मिला लें। इसकी गोली बनाकर आंखों में काजल की तरह लगाने से आंखों के अनेक रोग ठीक होते हैं।
7 ग्राम आंवले को जौ के साथ कुटकर ठंडे पानी में भिगो लें। दो-तीन घंटे बाद आंवलों को निचोड़ कर निकाल लें। इसी पानी में फिर से दूसरे आंवला को ऐसे ही भिगो दें। दो-तीन घंटे बाद फिर निचोड़ कर निकाल लें। इस तरह तीन-चार बार करें। इस पानी को आंखों में डालने से आँखों की सूजन कम  होती है।
आंवले के पत्ते और फल का मिश्रण आंखों में लगाएं। इससे आंख आने की परेशानी से राहत मिलती है।
आंवले को पीसकर पेस्ट बना लें, और उसकी पोटली बनाकर आंखों पर बांधें। इससे पित्त दोष के कारण होने वाली आंखों की खुजली, जलन आदि की परेशानी में लाभ मिलता है।

नाक से खून बहने की समस्या में फायदेमंद आंवला
नाक से खून बहने की समस्या अनेक कारणों से हो सकती है। इसमें आंवला फायदेमंद होता है। जामुन, आम तथा आंवले को कांजी आदि के साथ बारीक पीस लें। इसे मस्तक पर लेप करने से नकसीर (नाक से खून बहने की समस्या) में लाभ होता है।

गले की खराश में आंवला के फायदे
जब भी मौसम बदलता है तो आमतौर पर गले में खराश की परेशानी होने लगती है। ऐसे में आमला चूर्ण काफी फायदेमंद है। अजमोदा, हल्दी, आंवला, यवक्षार तथा चित्रक को समान मात्रा में मिला लें। 1 से 2 ग्राम आमला चूर्ण को 2 चम्मच मधु तथा 1 चम्मच घी के साथ चाटें। इससे गले की खराश दूर होती है।

अपच में लाभकारी आंवला
कई बार असमय खाने या कुछ भी गलत खा लेने पर अपच या इंडाइजेशन हो जाता है। इसके लिए आंवला को पका लें। इसमें उचित मात्रा में काली मिर्च, सोंठ, सेंधा नमक, भूना जीरा और हींग मिला लें। इसे छाया में सुखाकर सेवन करने से भूख लगती है, तथा कब्ज और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।

अपच में करिश्माई के फायदे

आईबीएस (संग्रहणी) रोग से दिलाये राहत आंवला
संग्रहणी रोग में बार-बार दस्त होता है। ये अक्सर खान-पान में बदलाव होने पर होता है। मेथी-दाना के साथ आंवले के पत्तों को मिलाकर काढ़ा बना लें। दिन में दो बार 10 से 20 मिली पीने से संग्रहणी रोग में लाभ होता है।

कब्ज में आंवला के फायदे
आजकल की जीवनशैली या खान-पान की वजह से सभी लोग कब्ज से परेशान रहते हैं। 3-6 ग्राम त्रिफला चूर्ण को गुनगुने जल के साथ सेवन करें। इससे कब्ज में लाभ मिलता है।

दस्त में आंवला के फायदे
10-12 ग्राम आंवले के कोमल पत्तों को पीसकर, छाछ के साथ रोज सुबह-शाम सेवन करें। इससे दस्त में लाभ होता है।

प्रवाहिका में आंवला के फायदे
मल के साथ खून आने लगता है तो यह स्थिति शरीर के लिए गंभीर हो जाती है। 10-20 मिली आंवले के रस में 10 ग्राम शहद और 5 ग्राम घी मिला लें। इसे पिएं, और इसके बाद 100 मिली बकरी का दूध पी लें। ऐसा दिन में तीन बार करें। पेचिश में लाभ होता है।

उल्टी से दिलाये राहत आंवला
10-20 मिली आंवला के रस में 5-10 ग्राम मिश्री मिलाकर सेवन करें। इससे हिचकी और उल्टी बंद हो जाती है।

5-10 ग्राम आंवला के चूर्ण को पानी के साथ पीने से भी उल्टी में फायदा होता है।

एसिडिटी में आंवला या अमला के फायदे
अम्लपित्त या हाइपरएसिडिटी आजकल आम समस्या बन गई है। बच्चों से लेकर बूढ़े, किसी को भी यह समस्या हो सकती है। आंवले के 10 ग्राम बीजों को रात भर जल में भिगोकर रखें। अगले दिन गाय के दूध में बीजों को पीस लें। इसे 250 मिली गाय के दूध के साथ सेवन करें। इससे एसिडिटी में लाभ होता है।

बवासीर में आंवला के लाभ
अर्श यानि बवासीर कब्ज के कारण होने वाली बीमारी है। अक्सर जो लोग मसालेदार खाना खाते हैं उनको ये समस्या होती है। इसके लिए आंवला का उपयोग लाभ पहुंचाता है।

–आँवलों को अच्छी तरह पीसकर एक मिट्टी के बरतन में (अन्दर की तरफ) लेप कर देना चाहिए। रोगी को इस बरतन में छाछ रखकर पीना चाहिए। इससे बवासीर में लाभ होता है

-बवासीर में अधिक रक्तस्राव होता हो तो 3-8 ग्राम आंवला चूर्ण को दही की मलाई के साथ सेवन करें। ऐसा दिन में दो-तीन बार करें।

प्रमेह (डायबिटीज) में आंवला या अमला के फायदे
प्रमेह को डायबिटीज या मधुमेह भी कहते हैं। वर्तमान में डायबिटीज से अनेक लोग ग्रस्त हैं। इसके लिए आंवला, हरड़, बहेड़ा, नागरमोथा, दारुहल्दी एवं देवदारु लें। इनको समान मात्रा में लेकर पाउडर बना लें। इसे 10-20 मिली की मात्रा में सुबह-शाम डायबिटीज के रोगी को पिलाने से लाभ मिलता है।

खुजली से दिलाये राहत आंवला
आंवले की गुठली को जलाकर भस्म बना लें। इसमें नारियल तेल मिला ले। इसे गीली या सूखी किसी भी प्रकार की खुजली पर लगाने से लाभ होता है।

त्वचा रोग में फायदेमंद आंवला
नीम का पत्ता तथा आंवले को घी के साथ सेवन करें। इससे फोड़े, चोट संबंधी परेशानी, पित्त की समस्या, खुजली आदि में लाभ होता है। [


पीलिया में लाभकारी आंवला
कामला को पीलिया भी कहते हैं। पीलिया होने पर त्वचा का रंग पीला हो जाता है और शुरुआती स्थिति में इलाज नहीं होने पर यह गंभीर हो सकता है।

–आंवले की चटनी बनाकर उसमें शहद मिला लें। इसका सेवन करने से लिवर विकार और पीलिया में लाभ होता है।

-125-250 मिग्रा लौह भस्म के साथ 1-2 नग आंवले के चूर्ण का सेवन करने से पीलिया और एनीमिया में लाभ होता है।


कुष्ठ रोग में आंवला के फायदे
आंवला और नीम के पत्ते को समान मात्रा में लेकर महीन चूर्ण बना लें। इसकी 2 से 6 ग्राम या 10 ग्राम तक रोज सबुह शहद के साथ चाटें। इससे कुष्ठ की गंभीर बीमारी में भी तुरंत लाभ होता है।

धातु रोग में आंवला के फायदे
आंवले के गुठली रहित 10 ग्राम चूर्ण को धूप में सुखा लें। इसमें दोगुनी मिश्री मिला लें। इसे ताजे जल के साथ 15 दिन तक लगातार सेवन करें। इससे स्वप्नदोष, शुक्रमेह आदि रोगों में निश्चित रूप से लाभ मिलता है। 

सुजाक में आंवला के फायदे
सुजाक या गोनोरिया यौन संक्रमित रोग (एसटीडी) है। इस बीमारी में लिंग के अंदर घाव हो जाता है जिससे पस निकलता है। इसके लिए 2-5 ग्राम आंवला के चूर्ण को एक गिलास जल में मिला लें। इसे पिलाएं, और इसी जल से लिंग को धोएं। इससे सूजन और जलन शान्त होती है। इससे धीरे-धीरे घाव ठीक होता है और पीव आना बन्द हो जाता है।

गठिया के दर्द से दिलाये राहत आंवला
गठिया में जोड़ों में दर्द और सूजन हो जाता है। इस परेशानी से सबसे ज्यादा बड़े-बूढ़े ग्रस्त होते हैं। इसमें 20 ग्राम सूखे आंवले और 20 ग्राम गुड़ लें। इसे 500 मिली पानी में उबाल लें। 250 मिली पानी शेष रहने पर छानकर सुबह शाम पिएं। इससे गठिया में लाभ होता है। इस दौरान नमक का सेवन ना करें।

बुखार में आंवला के फायदे
मोथा, इद्रजौ, हरड, बहेड़ा, आंवला, कुटकी तथा फालसा का काढ़ा बना लें। इसे 10-30 मिली मात्रा में पिएं। इससे कफ दोष के कारण होने वाले बुखार में लाभ होता है।

हिचकी से आराम दिलाये आंवला
हिचकी की परेशानी को ठीक करने के लिए पीपल, आंवला तथा सोंठ के 2-2 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम खांड तथा 1 चम्मच मधु मिला लें। इसे थोड़ी-थोड़ी देर में चाटने से हिचकी तथा दमा में लाभ होता है।

10-20 मिली आंवला रस तथा 2-3 ग्राम पीपल के पत्ते के चूर्ण में 2 चम्मच शहद मिला लें। दिन में दो बार सेवन करने से हिचकी में लाभ होता है।

गले में खराश के लिए आंवला के फायदे
गले में खराश होने पर आंवले का उपयोग आपको फायदा पंहुचा सकता है।आंवला में लवण रस को छोड़ कर सभी पांच रस (मधुर-अम्ल -कटु -तिक्त -कषाय) होते है। अतः इसके मधुर और कषाय रस के कारण ये गले की खराश को कम करने में सहायता करता है। अगर गले में खराश सूजन के कारण है तो इसका शीत गुण और मधुर शोथ या सूजन को कम कर गले को आराम देता है।




बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने के लिए आमला के फायदे

बढ़ती उम्र के प्रभाव को आंवला के सेवन के रोका जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार आंवला को रसायन माना गया है। यहाँ पर रसायन को मतलब जिसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। रसायन के सेवन से शरीर में होने वाले डिजेनरेटिव को रोकने में सहायता मिलती है जिससे बढ़ती उम्र के लक्षण कम होने लगते है।

हड्डियों को मज़बूत बनाने में आमला के फायदे
आंवला रसायन होने के के कारण सभी शरीर की सभी धातुओं को पोषण देता है। अतः यह अस्थि धातु को भी पोषण देकर हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है।

खून साफ करने में आमला फायदेमंद
आंवला का सेवन खून को साफ करने में सहायता करता है। अतः आंवला जूस खून के अशुद्ध से होने वाले रोगों से राहत दिलाने में फायदेमंद होता है।

कैंसर से बचने के लिए आंवले का उपयोग
आंवले का सेवन कैंसर को फैलने रोकने में भी सहायक होता है, क्योंकि इसमें कैंसर रोधी तत्व पाये जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार भी आंवला रसायन होता है यानि रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने बढ़ाता है अतः ये कैंसर को रोकने में मदद करता है।

दिमाग को तेज़ करने में आंवले का उपयोग
आंवला का उपयोग दिमाग की क्रियाशीलता बढ़ाने में सहायक होता है। आंवला में पाये जाने वाला रसायन गुण दिमाग को तेज करने में मदद करता हैं।

दांतों के लिए आंवला का उपयोग
आंवला की पत्तियां और फल दोनों ही मुँह से संबंधित रोगों में फ़ायदेमंद होते है। आंवला की पत्तियों का प्रयोग दांतो की मजबूती के लिए किया जाता है साथ हि फल का प्रयोग मसूड़ो यानि गम्स से संवंधी रोगों में फायदेमंद होता है।

हृदय को स्वस्थ रखने में आंवले के फायदे
आंवला का सेवन हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक होता है, क्योंकि आंवले का सेवन कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायता करता है साथ ही आंवले में पाये जाने वाला विटामिन-सी रक्तवाहिनी को संकुचित होने से रोकता जिसे रक्त का दबाब भी सामान्य रहता है।


नसों की कमज़ोरी दूर करने में आंवले का उपयोग
आंवले का उपयोग नसों की कमज़ोरी दूर करने में सहायक होता है, क्योंकि आँवले में रसायन का गुण पाया जाता है। रसायन का गुण नसों में समय साथ हो रहे परिवर्तनों यानि डिजेनरेटिशन को नियंत्रित कर कमजोरी दूर करता है।

आंवला कहां पाया या उगाया जाता है
आंवले के वृक्ष की पत्तियां इमली की पत्तियां जैसे ही होती हैं, लेकिन इसकी पत्तियां इमली से कुछ बड़ी होती हैं। आंवला बाग-बगीचों से लेकर जंगलों में पाया जाता है। बाग-बगीचों में आंवले के जो पौधे होते हैं उनमें जो फल आते हैं, वे जंगल में पैदा होने वाले फल की तुलना में बड़े होते हैं। ये समुद्र तल से 1300 मीटर की ऊंचाई पर भी पाया जाता है।

आंवले की खुराक
आमतौर पर आप आंवले का सेवन कई तरह से कर सकते हैं। आंवले का कच्चा फल, आमला जूस, आमला चूर्ण, आमला कैंडी या आंवले का मुरब्बा बनाकर इसका सेवन किया जा सकता है। इस लेख में ऊपर यह बताया गया है कि कौन सी बीमारी में कितनी मात्रा में आंवले का सेवन करना चाहिए। यहां यह बात ध्यान रखिये कि बहुत अधिक मात्रा में आंवले का सेवन करने से आंवला के नुकसान हो सकते हैं।

आंवला से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1-आंवला के सेवन से क्या नुकसान होता है?
सामान्यतः आंवला का प्रयोग करने से किसी प्रकार का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है, लेकिन इसकी तासीर शीत होने के कारण इसका सर्दी में फल रूप में प्रयोग करने से बचना चाहिए।

2-आंवले की तासीर क्या है?
आंवले एक प्रकार का स्वादिष्ट फल होता है। जिसमें आयुर्वेद के अनुसार लवण रस को छोड़कर पांचों रस पाए जाते हैं, जिसमें अम्ल और कषाय प्रधान होता है। आंवले की तासीर शीत यानि ठंडी होती है अर्थात इसके सेवन से शरीर शीतल होती है।

3- क्या आंवला खाने से इम्यूनिटी बढ़ती है?
आंवले में कई ऐसे गुण होते हैं जो हमारे शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ाने में मदद करते हैं. सर्दियों में सर्दी-जुकाम के साथ-साथ कई छोटी मोटी समस्याएं होती ही रहती हैं, ऐसे में अगर आप नियमित रूप से आंवले का सेवन करें तो इससे शरीर की इम्यूनिटी बढ़ जाती है. इम्यूनिटी मजबूत होने से इन सभी समस्याओं के होने की संभावना कम हो जाती है.

4- सर्दियों में आंवले का सेवन कैसे करें?
सर्दियों के दिनों में आप आंवले का सेवन कई तरीकों से कर सकते हैं। आप चाहें तो सीधे फल खा सकते हैं या फिर इसका जूस पी सकते हैं। सर्दियों में अधिकांश लोग इम्यूनिटी और शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए च्यवनप्राश का सेवन करते हैं। च्यवनप्राश का मुख्य घटक भी आंवला ही होता है, इसलिए अगर आपको आंवले के फल या जूस का स्वाद पसंद नहीं है तो च्यवनप्राश के रूप में इसका सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा बाज़ार में मिलने वाले आंवले के चूर्ण, कैंडी , कैप्सूल और मुरब्बे का भी उपयोग किया जा सकता है।

5- सर्दियों में आंवले का जूस कब पीना चाहिए?
आयुर्वेदिक चिकित्सकों का मानना है कि सर्दियों के दिनों में हर उम्र के लोगों को नियमित आंवले के जूस का सेवन करना चाहिए। इसके नियमित सेवन से पेट के रोग दूर होते हैं और शरीर स्वस्थ रहता है। रोजाना सुबह नाश्ते से पहले आंवले का जूस पीना ज्यादा फायदेमंद होता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Below Post Ad

Hollywood Movies